वास्तु शास्त्र क्या है | What is Vastu Shastra

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वास्तु शास्त्र वैदिक विज्ञान है, जो घर के निर्माण में उपयोग होता है। अर्थात वास्तु शास्त्र एक ऐसा विज्ञान है, जो किसी भी जगह, घर, दुकान, मकान आदि का निर्माण और उसके शुभ-अशुभ प्रभावों की जानकारी देता है। वास्तु शास्त्र का सिद्धांत आठ दिशाओं और पंच महाभूतों- आकाश, प्रथ्वी, वायु, अग्नि, जल के प्रवाह को देखकर बनाया गया है। वास्तु शास्त्र का देवता भगवान ’विश्वकर्मा’ को माना जाता है।

संपूर्ण ब्रहमाण्ड में सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों का संचार होता है। इन दोनों के तालमेल से ही सृष्टि चलती है। वास्तु शास्त्र से हमें पता चलता है कि निर्माणाधीन भूखंड में पाँच तत्वों जैसे वायु, जल, प्रथ्वी, अग्नि, आकाश की कौन सी जगह होनी चाहिए। भूख्ंड पर निर्माण के लिए 3 बल जैसे- जल, अग्नि और वायु जरूरी हैं, जो भूख्ंड पर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर ये तीनों बल सही जगह पर स्थित होंगे, तो वहाँ शांति बनी रहेगी।

मानव के निवास करने के स्थान पर किसी तत्व में कोई कमी आती है, तो उसका जीवन दुःखों से भर जाता है। वास्तु शास्त्र यह निश्चित करता है कि घर के आस-पास का वातावरण पंच-तत्वों और आठ दिशाओं के अनुकूल हो।

वास्तु शास्त्र में अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। कुछ वास्तु नियम निम्नलिखित हैं-

प्लॉट का वास्तु

द्वारवेध का वास्तु

मुख्य द्वार का वास्तु

खिड़कियों का वास्तु

सीढ़ियों का वास्तु

शौचालय और स्नानघर का वास्तु

बच्चों के कमरे का वास्तु

घर का वास्तु

ड्राइंग रूम का वास्तु

बैडरूम का वास्तु

पूजा घर का वास्तु

किचन का वास्तु

दुकान का वास्तु

ऑफिस का वास्तु

रेस्टोरेन्ट का वास्तु