वाटरलू युद्ध कब हुआ था (Waterloo ka Yudh kb hua tha  

वाटरलू युद्ध विश्व के सभी युद्धों में सबसे महत्वपूर्ण युद्ध हैं। इस युद्ध में 19वीं शताब्दी के आरम्भ में फ्रांस के नेपोलियन बोनापार्ट के लिए निर्णय लिया गया था । यह युद्ध वाटरलू नाम के स्थान पर फ्रांस के अधिपति नेपोलियन बोनापार्ट के द्वारा अंग्रेजों और सहयोगी देशों के बीच लड़ा गया था । इस युद्ध के दौरान फ्रांस के हताहतों की संख्या लगभग 48,000 और अंग्रेज़ी सैनिकों की संख्या लगभग 17,000 थी । इसके बाद इस युद्ध में अंग्रेजो के द्वारा यूनाइटेड किंगडम के नाम से एक संगठन का गठन करके युद्ध में उतरने की एक नीति बनाई गई ।

और इस नीति में शामिल होने वाले देश इस प्रकार है – ब्रेसविक, हैनोव्हर, नीदरलैंड, पूसिया ।

सन् 1815 से पहले नेपोलियन देश ने खुद को विजेयता मान लिया था । और इसी के चलते यह लगातार विजय प्राप्त करता चला गया । और इसी तरह एक वक्त ऐसा आया कि नेपोलियन बोनापार्ट ने भारत में घुसकर अंग्रेजों को भी हटा दिया और उसके उपनिवेशवाद को तोड़कर इंग्लैंड की सेना को भी एक बार में समेटकर ही रख दिया था ।

Waterloo ka Yudh kb hua tha| वाटरलू युद्ध कब हुआ था?

वाटरलू युद्ध की शुरुआत –

नेपोलियन बोनापार्ट ने अजेय सेना के साथ एक के बाद एक कई स्थानों की सेना को परास्त करने के बाद अब इंग्लैंड की बारी थी जिसे वश में कर पाना नेपोलियन बोनापार्ट के अकेले की बस की बात नहीं थी । इसलिए नेपोलियन बोनापार्ट ने पांच देशों के साथ मिलकर मैत्रीपूर्ण संबंध बनाये और यूनाइटेड किंगडम के नाम से अपनी शक्ति बनाई । अन्य पांच देशों के साथ अंग्रेजों ने नेपोलियन बोनापार्ट की सेना को तब बेल्जियम के पास वाटरलू नाम के स्थान को चारों ओर से घेर लिया गया था । पर जब तक  नेपोलियन वेल्जियम ने फतह करने के उद्देश्य अपनी सेना को मैदान में उतार ही दिया  था ।

वाटरलू युद्ध में फ्रांसिसी सेना में एक मजबूत दस्ता शामिल था । इस सेना  में 69,000 प्रशिया की सेना के 250 बंन्दूकधारी सैनिकों के साथ नेपोलियन के पास अतिरिक्त सेना भी शामिल थी । प्रशिया की सेना के अलावा के साथ 48,000 पैदल सेना , 14,000 रिसाला घुड़सवार सेना और 7,000 तोपखाने की सेना शामिल थी । इसी के साथ ब्रिटिश सेना के पास 25,000 सैनिक थे । इसी के साथ जर्मन के राजा के सेना में 6,000 सैनिक , 17,000 डच और बेल्जियम के सैनिक और 11,000 हनोवर , 3000 नसाड के सैनिक और 6000 ब्राउनश्विक  सैनिक शामिल थे । इसी के साथ अनेक सफल विजय अभियान के नायक कहे जाने वाले नेपोलियन बोनापार्ट को ब्रिटिश सेनापति नेल्सन की युद्ध प्रणाली से मात खानी पड़ी थी । और ब्रिटिश सेना ने अपनी कुशल युद्धनीति का इस्तेमाल करके उस स्थान पर अपने कुशल योद्धाओं के साथ मिलकर सफलता प्राप्त की थी । और यहां नेपोलियन सिर्फ घोड़े पर बैठकर युद्ध ही करता रह गया । ब्रिटिश गठबंधन की सेना ने नेपोलियन की सेना को नेपोलियन से दूर कर दिया और नेपोलियन की सेना को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया । और बाद में नेपोलियन को भी यह आभास हो गया था कि अगर उसने आत्मसमर्पण नहीं किया तो वह निश्चित रूप से मारा जाऐगा । इसलिए अंत में नेपोलियन ने अपने हथियार डाल दिए ।

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नेपोलियन की पराजय –

अंत में नेपोलियन ने खुद ही पराजय स्वीकार कर ली । और इसके बाद नेपोलियन को गिरफ्तार करके ‘ सेन्ट हेलेनो द्वीप ‘ में भेज दिया गया । सेन्ट हेलेनो द्वीप मे नेपोलियन को निर्वासन के  दिन बहुत मुश्किल सिद्ध हुए । बाद में नेपोलियन के पास उसका डाक्टर और उसका सेवक ही था । इसके बाद में नेपोलियन को पेट की बीमारी हो गई और बहुत ज्यादा उल्टियां होने के कारण नेपोलियन की आंतें खराब हो गई । जिसकी वजह से 6 मई सन् 1821 ई° में सेन्ट हेलेनो द्वीप में नेपोलियन बोनापार्ट की मृत्यु हो गई ।

और किसने सोचा था कि  इस तरह फ्रांस का भाग्य विधाता सम्पूर्ण यूरोप का एकमात्र शासक बनने का लालसा रखने वाला , ब्रिटेन को काबू में रखने की कोशिश में लगे हुए , भारत पर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का अभियान चलाने वाले और मिस्र और रूस तक धावा बोलकर युद्व में जीतने वाले योद्धा एक दिन निर्जन द्वीप में गुमनामी की मौत मरने पर मजबूर हो जाऐगा । और फिर नेपोलियन की सेना के हथियार डालते ही फ्रांस की सेना भी भाग खड़ी हुई । और वह युद्ध समाप्त हो गया |