व्याकरण | Vyakaran | Grammer in Hindi

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सामान्यतः किसी भाषा की नियमावली को उसका व्याकरण कहते हैं।

व्याकरण भाषा का एक नियमबद्ध समूह है, जिनके द्वारा हम भाषा को व्यवहारिक रूप में बोल पाते हैं। व्याकरण के ज्ञान से ही भाषा का सही उच्चारण संभव हो सकता है। भाषा को शुद्ध बोलना एवं लिखना भी व्याकरण के द्वारा संभव है।

व्याकरण के अंग-

1) वर्ण-विचार – इसमें वर्णों के भेद, उच्चारण, लेखन और उनके संयोजन पर विचार किया जाता है।

2) शब्द-विचार – इसमें शब्दों की उत्पत्ति, भेद रूपांतर और रचना पर विचार किया जाता है।

3) पद-विचार – इसमें पदभेद, पदबंध पर विचार किया जाता है।

4) वाक्य-विचार – इसमें वाक्य संरचना, वाक्य-भेद, वाक्य रूपांतरण और विराम-चिन्ह् पर विचार किया जाता