व्याकरण (Grammer)

इस लेख में हम आपको व्याकरण(Grammer) के बारे में जानकारी देंगे| व्याकरण की परिभाषा क्या है? उसका भाषा में महत्व, और प्रकार के बारे में भी समझाएंगे|

व्याकरण क्या है? 

 किसी भी भाषा को शुद्ध रूप से लिखने-समझने और बोलने के लिए उसके व्याकरण का ज्ञान होना बहुत जरूरी होता है| अतः व्याकरण वह है, जिसके द्वारा हम किसी भाषा को शुद्ध रूप से लिख, बोल, एवं समझ सकते हैं| हर भाषा के अपने कुछ नियम होते हैं, वही व्याकरण कहलाती हैं| कभी-कभी व्याकरण की कमी या जानकारी न होने से वाक्य गलत हो जाता है, और उसका अर्थ निकालना भी मुश्किल हो जाता है| जैसे:-

मीना बाजार गया था और उसके साथ मोहन भी गयी थी.

उपरोक्त वाक्य को पढ़ने में ही अशुद्धि मालूम हो रही है, यानि स्त्री लिंग की जगह पुल्लिंग प्रयोग किया गया है जबकि पुल्लिंग की जगह स्त्री लिंग|

शुद्ध वाक्य:- मीना बाजार गयी थी, उसके साथ मोहन भी गया था|

व्याकरण के प्रकार

व्याकरण के चार प्रकार होते है: 

1-वर्ण या अक्षर

2-शब्द

3-पद

4- वाक्य

1-वर्ण या अक्षर

वर्ण या अक्षर किसी भी भाषा की सबसे छोटी इकाई है, इसे बाँटा नहीं जा सकता| जैसे: क, ख,अ, ब इत्यादि|

2- शब्द

वर्णों अथवा अक्षरों के उन समूहों को शब्द कहते हैं, जिनसे कुछ अर्थ निकलता है| जैसे- राजेश, बरेली, मेज, सब्जी इत्यादि|

3- पद

इसके अंतर्गत पद-भेद, पद रूपांतर, एवं उनके प्रयोग को समझा जाता है| 

4-वाक्य

कई शब्दों को मिलाकर एक अर्थ पूर्ण वाक्य बनाया जाता है| जैसे: सीता स्कूल जा रही है, मोहन फुटबॉल खेल रहा है|

हिंदी व्याकरण की विशेषताएँ

हिंदी भाषा में व्याकरण का विशेष महत्व है| यह मुख्यतः संस्कृत पर आधारित होते हुए भी अपना विस्तार रखती है| संस्कृत की अपेक्षा हिंदी सरल है| इसे ध्वनि और लिपि में अलग-अलग वर्गीकृत किया जा सकता है|

  • ध्वनि

 मनुष्य और प्रकृति में मौजूद अन्य जीव भी अपनी ध्वनि निकालते हैं| निर्जीव वस्तुओं की भी ध्वनि होती है, जैसे कम्पन इत्यादि| लेकिन व्याकरण में हम मनुष्यों द्वारा उच्चारित भाषा का ही अध्ययन करते हैं| ध्वनियां क्रिया पर स्वतः निकलती हैं, जैसे चलने की ध्वनि| कुछ ध्वनियां अनैच्छिक होती हैं, जैसे खर्राटे, जम्हाई की ध्वनियाँ, इत्यादि.

अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग भाषा बोली जाती है| इन्हें सार्थक और निर्रथक रूप में विभाजित कर सकते हैं| निर्रथक में वे शब्द हो सकते हैं जिनका अर्थ कोई अन्य न समझ सके, जैसे सीटी बजाना|

  • लिपि

विचारों या भाषा  को लिखित रूप में प्रकट करना ही लिपि है| हिंदी में लिखित भाषा  देवनागरी लिपि कहलाती है| देवनागरी में ग्यारह(11) स्वर और इकतालीस(41) व्यंजन हैं| व्यंजन के साथ स्वर मिलने पर जो रूप बनता है, वह मात्रा कहलाती है| जैसे अ, आ, इ, ई, ा ि ी ु ू ृ े ै ो ौ , क का कि की कु कू के कै को कौ|

इस लेख से निश्चित रूप से आपको व्याकरण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली होगी| अगर आपके मन में कोई संशय या फिर कोई सवाल है तो आप हमें लिख सकते हैं|