Vikram samvat ki shuruaat kab hui

विक्रम संवत के विषय में गहरे मतभेद हैं कुछ लोग इन्हें मालवा के शासक विक्रमादित्य के नाम से भी जानते हैं जिन्होंने 57 ईसा पूर्व शकों को पराजित किया था। विक्रमादित्य का शासन सतयुग के समान सुख एवं समृद्धि वाला हुआ करता था। अतः इस संवत् को कृत या सतयुग संवत् भी कहा जाता है । विक्रम संवत एक महत्वपूर्ण हिन्दू कैलेंडर है जिसका उपयोग प्रमुख रूप से समय की गणना करने हेतु किया जाता है । विक्रम संवत कैलेंडर ग्रेगोरी कैलेंडर से 57 वर्ष पहले ही शुरू किया गया था ।

विक्रम संवत में समय की पूरी गणना करने हेतु मुख्य रूप से सूर्य और चंद्रमा को आधार बनाकर इसे सप्ताह , मास और दिन और वर्ष में विभाजित किया गया हैं । इस विभाजन को पूर्ण रूप से वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर किया जाता हैं । वहीं अगर पौराणिक कथाओं के अनुसार माने तो चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को‌ ही ब्रम्हा जी ने सृष्टि की रचना करने की शुरुआत की थी । जिसके बाद से ही इस दिन को  हिन्दू धर्म में नववर्ष के रूप में मनाया जाने लगा है ।

विक्रम संवत की शुरुआत कब हुई (Vikram samvat ki shuruaat kab hui)

कैलैंन्डर कैसे कार्य करता है –

इस हिन्दू धर्म के  कैलेंडर का निर्माण चन्द्रमा और सूर्य के आधार पर ही किया गया है । पृथ्वी 365/366 दिन में सूर्य की परिक्रमा के आधार पर ही करता हैं। पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने की अवधि को एक वर्ष के रूप में गिना जाता है । और इस अवधि को पूरा करते-करते चन्द्रमा पृथ्वी के 12 चक्करों को पूरा कर लेता  हैं । इस तरह एक संपूर्ण वर्ष को 12 भागों में विभाजित किया गया हैं । इसके साथ वर्ष के 12 भागों को क्रम से निर्धारित करने हेतु इसका नामकरण किया गया था । इसकी जानकारी इस प्रकार हैं- 

* एकाम्बर (34)

* दुयीआम्बर (30)

* तिरियाम्बर (31)

* चौथाम्बर(30)

* पंचाम्बर (31)

* षष्ठम्बर (30)

* सेप्तम्बर (31)

* ओक्टाम्बर (30)

* नबम्बर (31)

* दिसंबर (30)

* ग्याराम्बर (31)

* बारम्बार (30/29)

महीनों का नाम –

चैत्र मास

बैशास मास

जेष्ठ मास

आषाढ़ मास

श्रावण मास

भाद्रपद मास

आश्विन मास

कार्तिक मास

मार्गशीर्ष मास

पौष मास

माघ मास

फाल्गुन मास

अंग्रेजी महिनों के नाम –

जनवरी

फ़रवरी

मार्च

अप्रैल

मई

जून

जुलाई

अगस्त

नवम्बर

दिसंबर

शक संवत और विक्रम संवत में अंतर –

अंग्रेजी कैलेंडर से 78 वर्ष पीछे है , 2021-78 =1943 इस प्रकार 1942 शक सवंत चल रहा है ।

विक्रम संवत की शुरुआत –

 राजा विक्रमादित्य ने इस सवंत की शुरुआत की थी । उस समय में शास्त्री वराह मिहिर बहुत बड़े खगोल शास्त्री थे । इनकी सहायता से इस संवत के प्रसार में सहायता ली गई थी ।

इस इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक हिजरी संवत को छोड़कर बाकी सभी कैलैंन्डर में जनवरी – फरवरी में नये साल की शुरुआत होती है । भारत में कई कैलेंडर प्रचलित हैं जिनमें विक्रम संवत और शक संवत प्रमुख रूप से हैं । पूरी दुनिया में काल गणना दो ही आधार पर की जाती है सौर चक्र और चंद्र चक्र । और इसमें सौर चक्र के अनुसार पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में 365 दिन में लगभग 6 घंटे का समय लगता है इस तरह की गणना करने पर सौर वर्ष पर आधारित कैलैन्डर के अनुसार 365 दिन लगते हैं । और चंद्र वर्ष के कैलेंडर में 354 दिन होते हैं

कुछ प्रचलित कैलैन्डर के नाम –

  • ग्रेगोरियन कैलेंडर

इस कैलेंडर की शुरुआत ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म के चार साल पहले से की जाती है । इसे एनो डोमिनी या ईश्वर का वर्ष भी कहा जाता हैं । तथा ये कैलैन्डर पूरी तरह से सौर वर्ष पर आधारित होता है । और इस कैलेंडर का पूरी दुनिया में इस्तेमाल किया जाता है ।

  • हिब्रु कैलेंडर –

यह कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से भी बहुत पुराना कैलेंडर हैं । इस कैलेंडर का इस्तेमाल दैनिक कार्यों को करने के लिए किया जाता है । तथा ये कैलैन्डर चंद्र चक्र पर आधारित होता है । फिर कुछ समय बाद में इस कैलेंडर में चंद्र और सूर्य दोनों चक्रो का समावेश कर दिया गया था ।

  • हिजरी कैलेंडर –

इस कैलेंडर की शुरुआत 16 जुलाई 622 से हुई थी ऐसा माना जाता है कि इसकी शुरुआत इस्लाम के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद मक्का छोड़कर मदीना को गए थे । और इस घटना को हिजरत और हिजरी संवत चंद्र वर्ष पर आधारित माना जाता हैं । इस कैलेंडर के मुताबिक साल में 354 दिन होते हैं।

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