वर्गीज कुरियन की जीवनी | Verghese Kurien Biography in Hindi

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परिचय

वर्गीज कुरियन एक मशहूर भारतीय व्यवसायी और ‘श्वेत क्रांति’ के जनक थे। उन्हें ‘फादर ऑफ़ वाइट रेवोलुशन’ के नाम से भी पहचाना जाता है। उन्होंने भारत को दूध की कमी से संघर्ष करने वाले देश से विश्व का सबसे अधिक दूध उत्पादक देश बनाने वाले सहकारी दुग्ध उद्योग के मॉडल की नीव रखी थी। उनके ‘ऑपरेशन फ्लड’ ने सन 1998 में भारत को दुग्ध उत्पादकों के सूची में सबसे आगे खड़ा कर दिया। वर्गीज कुरियन ने अपने जीवनकाल में 30 से अधिक उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की और कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

शुरूआती जीवन

वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 में एक सीरियाई ईसाई परिवार में कालीकट, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब कोझीकोड, केरल) में हुआ था। इनके पिता का नाम ‘पुत्तनपरक्कल कुरियन’ था। वर्गीज कुरियन ने चेन्नई के लोयला कॉलेज से सन 1940 में विज्ञान से स्नातक किया और चेन्नई के ही जी.सी. इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद वे स्टील टेक्निकल इंस्टिट्यूट, जमशेदपुर स्थित टिस्को में काम किया। उन्हें भारत सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति की सहायता से मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की, जिसमें डेयरी इंजीनियरिंग भी एक विषय था।

करियर

वर्गीज कुरियन जब 13 मई 1949 को अमेरिका से भारत लौटे, तो उन्हें भारत सरकार द्वारा गुजरात के आनंद में सरकारी अनुसंधान क्रीमरी में डेयरी इंजीनियर के रूप में तैनात किया गया। इसी दौरान कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड निजी स्वामित्व वाले पॉलसन डेयरी से मुकाबला करने के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हो गए। इस चुनौती को पूरा करने के लिए वर्गीज कुरियन ने अपनी नौकरी छोड़ दी और दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने में ‘त्रिभुवनदास पटेल’ अध्यक्ष की मदद करने के लिए उनके साथ खड़े हो गए। इस प्रकार से अमूल का जन्म हुआ।

वर्गीज कुरियन का सपना देश को दुग्ध उत्पादन में आत्म निर्भर करने के साथ-साथ किसानों की स्थिति को भी सुधारना था। भैंस के दूध से पहली बार पाउडर बनाने का श्रेय भी वर्गीज कुरियन को जाता है। उन दिनों विश्व में गाय के दूध से दुग्ध पाउडर बनाया जाता था। अमूल के सफलता का एक अहम वजह ये भी थी कि इस तकनीक के कारण ही वो नेस्ले जैसे प्रतियोगी का सामना कर सके और नेस्ले अभी तक गाय के दूध से पॉवडर बनाता था, क्योंकि यूरोप में गाय के दूध की अधिक पैदावार है।

अमूल की सफलता से आशान्वित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने अमूल मॉडल को देश के अन्य स्थानों पर फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (NDDB) का गठन सन 1965 में किया और वर्गीज कुरियन को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। NDDB (National Dairy Development Board) ने सन 1970 में ‘ऑपरेशन फ्लड’ की शुरुआत की, जिससे विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक भारत बना। वर्गीज कुरियन सन 1965 से 1998 तक NDDB के अध्यक्ष रहे और 60 के दशक में भारत में दूध की खपत जहां लगभग 2 करोड़ टन थी, वहीं सन 2011 में जाकर यह 12.2 करोड़ टन तक पहुंच गई। सन 1973 में, वर्गीज कुरियन ने डेरियों द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार में बेचने के लिए GCMMF  (Gujarat Co-operative Milk Marketing Federation Ltd.) की स्थापना की और सन  2006 तक इसके अध्यक्ष रहे। इसके साथ-साथ वो सन 1979 से 2006 तक इंस्टीट्‍यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट के अध्यक्ष भी रहे।

मृत्यु

वर्गीज कुरियन की मृत्यु एक संक्षिप्त बीमारी की अवधि के बाद 9 सितंबर 2012 को गुजरात के आनंद के पास के नाडियाड कस्बे में हुई। उस समय वे 90 वर्ष के थे।

अवार्ड एवं सम्मान

  वर्ष            अवार्ड                                  सम्मानित

1963          रमन मेगसेसे अवार्ड                   रमन मेगसेसे अवार्ड फाउन्डेशन

1965          पद्म श्री                                 भारत सरकार

1966          पद्म विभूषण                           भारत सरकार

1986          कृषि रत्न                               भारत सरकार

1986          वाटलर शांति अवार्ड                  कार्नेगी फाउंडेशन

1989          वर्ल्ड फ़ूड प्राइज़                      वर्ल्ड फ़ूड प्राइज़ फाउंडेशन

1991          Distinguished Alumni         मिशिगन स्टेट विश्वविद्यालय

1993          इंटरनेशनल पर्सन ऑफ़ द इयर     वर्ल्ड डेरी एक्सपो

1999          पद्म विभूषण                          भारत सरकार