9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग | Vaidyanath Jyotirlinga in Hindi

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वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को वैद्यनाथ धाम (देवघर) के नाम से भी जाना जाता है। यह ज्योतिर्लिंग बिहार राज्य के संथाल परगना के दुमका जिले में पड़ता है। एक कथानुसार लंकापति रावण ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर एक शिवलिंग प्राप्त किया जिसे वह लंका में स्थापित करना चाहता था, परंतु ईश्वर की लीला से वह शिवलिंग वैद्यनाथ धाम में ‍ही स्थापित हो गया।

शिव पुराण में वर्णित कथानुसार एक बार लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर्वत पर जाकर कठोर तपस्या करनी शुरू कर दी। उसने एक-एक कर अपने नौ शीश काट-काटकर शिवलिंग पर चढ़ाने शुरू कर दिए। लंकापति रावण जब अपना दसवाँ शीश काटने ही वाला था कि उसी समय भगवान शिव प्रसन्न होकर स्वंय प्रकट हो गए।

भगवान शिव ने लंकापति रावण के सभी शीश यथावत कर कहा- ‘लंकापति रावण! में तुम्हारी तपस्या से अति प्रसन्न हूँ, माँगों क्या वर माँगते हो?’ लंकापति रावण ने कहा- ‘हे प्रभु! मेरी कामना है कि आप हमेशा के लिए लंका नगरी में ही विराजमान रहें।’ भगवान शिव ने कहा- ‘ऐसा संभव नहीं है, तुम अगर चाहो तो मेरा ज्योतिर्लिंग ले जा सकते हो, यह ज्योतिर्लिंग मेरा ही स्वरूप होगा। इसे मार्ग में मत रखना क्योंकि जहाँ इसे रखोगे, यह वहीं स्थापित हो जाएगा।’

लंकापति रावण प्रसन्न मन से, शिवलिंग को अपने साथ लेकर लंका नगरी की ओर चल पड़ा। कोई भी देवतागण नहीं चाहते थे कि भगवान शिव हमेशा-हमेशा के लिए ज्योतिर्लिंग के रूप में लंका नगरी में जाकर विराजित हो। अब देवताओं को चिंता होने लगी कि भगवान शिव की कृपा मिल जाने से लंकापति रावण और भी अधिक अत्याचारी बन जाएगा। देवताओं ने एक ऐसा उपाय सोचा, जिससे रावण शिवलिंग को अपने साथ न ले जा सके।

जब लंकापति रावण ज्योतिर्लिंग को साथ लेकर आकाश मार्ग द्वारा जाने लगा तो वरूणदेव ने उसके पेट में प्रवेश किया। इससे लंकापति रावण को लघुशंका का अहसास हुआ और विवश होकर उसे धरती पर उतरना पड़ा। जहाँ लंकापति रावण उतरा, वहाँ स्वयं भगवान विष्णु एक ब्राहमण का वेश धारण किए खड़े हुए थे। रावण ने ब्राहमण से ज्योतिर्लिंग को हाथों में पकड़ने का अनुरोध किया, ताकि स्वयं लघुशंका से निवृत हो सके। रावण ने उस ज्योतिर्लिंग को धरती पर न रखने का निर्देश भी दिया। ब्राहमण ने तुरंत ही उस ज्योतिर्लिंग को हाथों में पकड़ लिया।

ब्राहमण के रूप में मौजूद भगवान विष्णु ने लंकापति रावण से कहा कि बहुत विलंब हो गया है, मैं अब और अधिक समय तक ज्योतिर्लिंग को हाथों में उठाए नहीं रह सकता। इतना कहकर ब्राहमण ने ज्योतिर्लिंग को धरती पर रख दिया। बाद में लंकापति रावण की लघुशंका भी समाप्त हो गई, लेकिन धरती का स्पर्श होने के कारण लंकापति रावण अपनी सारी शक्ति लगाने के बावजूद भी उस ज्योतिर्लिंग को धरती से उठा नहीं पाया।

लंकापति रावण को भगवान शिव की यह लीला समझ में आ गई और वह गुस्से में ज्योतिर्लिंग पर अपना अंगूठा गढ़ाकर चला गया। तत्पश्चात ब्रहमा, विष्णु आदि देवताओं ने आकर उस ज्योतिर्लिंग की पूजा-अर्चना की। भगवान शिव का दर्शन पाकर सभी देवताओं ने ज्योतिर्लिंग की उसी स्थान पर स्थापना कर दी और शिव-स्तुति करके वापस स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर गए।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हे। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार हर रोज प्रातःकाल और संध्या के समय इन 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम जपने से या दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप या कष्ट दूर हो जाते हैं।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के संबंध में श्लोक निम्नलिखित है-

श्लोक-
पूर्वोत्तरे पारलिका‍भिधाने, सदाशिवं तं गिरिजासमेतम्।
सुरासुराराधितपादपद्मम्, श्री वैद्यनाथं सततं नमामि।।

ज्योतिर्लिंगों की तालिका

क्रम. संख्या ज्योतिर्लिंग का नाम ज्योतिर्लिंग का स्थान ज्योतिर्लिंग का संक्षिप्त वर्णन
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रभास पाटन, सौराष्ट्र, गुजरात विदेशी आक्रमणकारियों ने इसे 17 बार नष्ट किया। सबसे अधिक नुकसान महमूद गजनवी के हमले से हुआ था। हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया है।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर, कुर्नूल, आन्ध्र प्रदेश मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है।
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षिप्रा नदी के तट पर, महाकाल, उज्जैन, मध्य प्रदेश महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर, मध्य प्रदेश ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का आकार औंकार अर्थात ऊं जैसा है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर के नाम से जाना जाता है।
5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर, केदारनाथ, उत्तराखंड केदारनाथ ज्योतिर्लिंग समुद्र तल से लगभग 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है।
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मुंबई से पूर्व दिशा में और पुणे से उत्तर दिशा में भीमा नदी के किनारे सह्याद्रि पर्वत पर, भीमाशंकर, महाराष्ट्र भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को ‘मोटेश्वर महादेव’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर भगवान शिव ने भीमासुर राक्षस का वध किया था।
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग गंगा तट पर, काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ में भगवान शिव का वास है, जो व्‍यक्ति इस पवित्र स्‍थान पर मृत्‍यु को प्राप्‍त होता है, वह इस संसार के क्लेश से मुक्त हो जाता है।
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे, नासिक, महाराष्ट्र ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में रहना पड़ा।
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग देवघर, झारखंड लंकापति रावण ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर एक शिवलिंग प्राप्त किया, जिसे वह लंका में स्थापित करना चाहता था, परंतु ईश्वर की लीला से वह शिवलिंग वैद्यनाथ धाम में ‍ही स्थापित हो गया।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दारुकावन, द्वारका, गुजरात भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। धार्मिक शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता माने गए हैं, नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है।
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम, रामनाड, तमिलनाडु इस ज्योतिर्लिंग के विषय में मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। यहां पर श्रीराम ने बालू का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की और रावण पर विजय हेतु भगवान शिव से वरदान मांगा।
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग एल्लोरा के पास, औरंगाबाद, महाराष्ट्र ऐसी मान्यता है कि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से वंशवृद्धि होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसका निर्माण अहिल्‍याबाई होल्‍कर के द्वारा करवाया गया था।