टाइफाइड

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टाइफाइड एक संक्रामक रोग है। इसको मोतीझरा और मियादी बुखार (आंत्र ज्वर) भी कहा जाता है। यह साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। इस बीमारी में तेज बुखार आता है, जो कम ज्यादा होता रहता है और कई दिनों तक बना रहता है। तेज बुखार के साथ उल्टी और दस्त आदि की समस्या भी रहती है।

मुख्य लक्षण

  • आलस और थकान रहना।
  • भूख कम हो जाना और उल्टी आना।
  • सिरदर्द और बदन दर्द रहना।
  • कमजोरी महसूस होना।
  • बच्चे को दस्त लग जाना।
  • बड़े लोगों में कब्ज हो जाना।
  • बुखार 104 डिग्री फ़ारेनहाइट तक पहुँच जाना।
  • छाती और पेट पर गुलाबी रंग के चकते पड़ सकते हैं।

मुख्य कारण

टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी के संक्रमण से होता है। यह बैक्टीरिया निम्नलिखित कारणों से व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे संक्रमित कर सकता है।

  • संक्रमित व्यक्ति जब मल या पेशाब करने के बाद अपने हाथ नही धोता और भोजन को छूता है तो यह बैक्टीरिया भोजन को दूषित कर देता है। कोई व्यक्ति जब यह भोजन खाता है तो वह भी संक्रमित हो जाता है।
  • संक्रमित व्यक्ति यदि खुले में शौच करता है तो आसपास का पानी दूषित हो सकता है। इस दूषित पानी को यदि पीया जाता है या खाना बनाने में उपयोग किया जाता है तो संक्रमण फैल सकता है।
  • टाइफाइड के रोगी का झूठा पानी पीने या झूठा खाना खाने से भी यह रोग हो सकता है।

टाइफाइड से बचाव

  • घर के आस-पास साफ सफाई रखें।
  • खुले में शौच ना करें।
  • खाने को हमेशा ढक कर रखें।
  • दूषित पानी और दूषित खाने का सेवन ना करें।
  • पीड़ित व्यक्ति का झूठा ना खाएं।

घरेलू उपचार

दवा के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी टाइफाइड का उपचार किया जा सकता है। कुछ आसान एवं कारगर घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं।

  • तुलसी और काली मिर्च: काली मिर्च के चार से पांच दानों को तुलसी के चार से पांच पत्तों के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट का पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करें।
  • सेब का सिरका: एक गिलास पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका और थोड़ा सा शहद मिला लें। लगभग एक सप्ताह तक खाना खाने से पहले इसका सेवन करें। इसके अलावा आप एक भाग सेब के सिरके को दो भाग पानी में मिला लें और इस मिश्रण में एक कपड़े को भिगो कर निचोड़ लें। इस कपड़े को पट्टी की तरह माथे और पेट पर रखें। कपड़ा गरम हो जाए तो दोबारा घोल में डुबाएं और इस प्रक्रिया को दोहराते रहें।
  • लहसून: एक कप दूध और चार कप पानी को मिला लें और इसमे आधा चम्मच पिसा हुआ लहसुन मिला दें। इस मिश्रण को तब तक उबालें जब तक कि यह आधा ना रह जाए। इसका दिन में तीन बार सेवन करें। बच्चे या गर्भवती महिलाएं इसका सेवन ना करें।
  • लौंग: चार गिलास पानी में पांच से सात लौंग की कलियां डालें। इस घोल को तब तक उबालें जब तक कि यह आधा ना रह जाए। ठंडा होने पर इसको छानकर पीएं।
  • केला: दो कप दही में दो केले अच्छी तरह से मिलाकर इसमें एक चम्मच शहद मिला लें। इसका दिन में दो से तीन बार सेवन करें।
  • गाजर: कच्चे गाजर या गाजर के रस का नियमित रूप से सेवन करें।
  • छाछ: आधा गिलास छाछ में दो चम्मच धनिया का रस मिला लें। दिन में दो बार इसका सेवन करें। आप एक केले के गुदे को एक गिलास छाछ में मिलाकर भी पी सकते हैं।

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