थर्मामीटर का अविष्कार कब हुआ था (Thermometer ka avishkar kab hua tha)

थर्मामीटर का इस्तेमाल फर्स्ट-एड में किया जाता हैं । इसका उपयोग आजकल हर घर में किया जाता हैं । थर्मामीटर आजकल सभी घरों में होता ही हैं । थर्मामीटर का इस्तेमाल बुखार नापने के लिए किया जाता हैं । अगर कभी बच्चों को अचानक बुखार लगता है तो आप घर पर ही थर्मामीटर से आसानी से बच्चों का बुखार नाप सकते हैं । थर्मामीटर का अविष्कार 18वीं में किया गया था। थर्मामीटर का इस्तेमाल डाक्टर तापमान नापने के लिए करते हैं। थर्मामीटर भी अलग अलग तरह के होते हैं जिनसे आप हाथ, मुंह, में थर्मामीटर को लगाकर तापमान को नाप सकते है।  आज हम आपके लिए थर्मामीटर से जुड़ी जानकारी लेकर आए हैं, जिनकी जानकारी होना सभी के लिए आवश्यक है तो आइए जानते हैं कि थर्मामीटर का अविष्कार  किसने किया और कब किया-

Thermometer ka avishkar kab hua tha

थर्मामीटर का अविष्कार किसने किया था –

थर्मामीटर का अविष्कार सन् 1596 में एक मशहूर वैज्ञानिक गैलीलियो गैलिली ने किया था । पर जिस उपकरण का अविष्कार किया था उसके द्वारा तापमान का सटीक माप नहीं किया जा सकता था । इसके बाद सन् 1612 में वैज्ञानिक संतोरिओ ने थर्मामीटर की खोज की थी जो टेंप्रेचर मैसुरिंग डिवाइस के रूप में सन् 1714 में पहला मरकरी थर्मामीटर का अविष्कार गेब्रियल फारेनहाइट ने किया था । और इनका बनाया गया थर्मामीटर ज्यादा सटीक रीडिंग देने वाला उपकरण बना ।

1848 में एब्सोल्यूट तापमान स्केल या केल्विनस्केल का  अविष्कार किया गया था । 1848 में विलियम थॉमस, लार्स के बैरन केल्विन , स्कॉटलैंड ने लार्डकेल्विन ने शून्य के साथ तापमान नापने के लिए इस पैमाने का सुझाव दिया था।

थर्मामीटर के प्रकार –

थर्मामीटर के दो प्रकार देखने को मिलता है –

  • मरकरी थर्मामीटर –

इस तरह के थर्मामीटर की बनाबट एक कांच के ट्यूब के जैसे होती हैं । जिसमें ट्यूब के ऊपर पारा भरा होता है जो शरीर को नापते समय तापमान के बढ़ने पर मरकरी तापमान के हिसाब से फैलता- सिकुड़ता है । इस थर्मामीटर से शरीर का तापमान नापने के लिए किया जाता हैं ।

  • डिजिटल थर्मामीटर –

इस तरह के थर्मामीटर LED में स्क्रीन लगी होती हैं जिसमें शरीर का तापमान LED स्क्रीन पर दिखाई देता हैं । ये थर्मामीटर बैटरी से चलने वाले सेंसर और LED स्क्रीन वाले होते हैं । ऐसे थर्मामीटर सेल्सियस में तापमान नापते हैं इसी के साथ इनकी रीडिंग करना बहुत आसान होता है ।

थर्मामीटर का इस्तेमाल कैसे करते हैं –

शरीर से तापमान मापने के लिए सबसे पहले तो आपको थर्मामीटर का इस्तेमाल सही से करना आना चाहिए । और शरीर का तापमान नापने से पहले एक बार थर्मामीटर चैक कर लें कि थर्मामीटर सही से चल रही हैं ।

* 6 महीने तक के बच्चों का तापमान नापने के लिए बच्चों के गुदा में डिजिटल थर्मामीटर से शरीर का तापमान नापना चाहिए । और 3 साल बच्चों से थर्मामीटर दूर रखना चाहिए। 3 साल के बच्चों का तापमान नापने के लिए बगल में थर्मामीटर लगाकर चैक करना चाहिए ।

* थर्मामीटर का का इस्तेमाल सही जगह पर और उम्र के अनुसार करना चाहिए ।

* तापमान नापने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल सामान्य तौर पर मुंह, बगल में लगाकर किया जाता हैं ।

एनालॉग थर्मामीटर –

एनालॉग थर्मामीटर एक सामान्य थर्मामीटर हैं जिसका अविष्कार सबसे पहले किया गया था यह एक कांच की नली का बना होता था जिसके अंदर एक पारा लगा होता था । अगर किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान ज्यादा होता था तो इस थर्मामीटर का पारा ऊपर की तरह बढता जाता हैं । पारा जैसे ही ऊपर जाता हैं जिससे यह पता चलता है कि शरीर का तापमान कितना ज्यादा है कि कम हैं । पारा नापने के लिए थर्मामीटर पर सेल्सियस के लगे होते हैं जिससे यह पता चलता है कि शरीर का तापमान कितना डिग्री सेल्सियस हैं एनालॉग थर्मामीटर का इस्तेमाल सिर्फ बुखार नापने के लिए किया जाता हैं।

थर्मामीटर के ख़तरे-

थर्मामीटर का इस्तेमाल तभी करें जब आपको उसके बारे में जानकारी हो । क्योंकि थर्मामीटर में पारा होता है जो अगर शरीर के अंदर चला जाए तो इससे किसी की जान भी जा सकती हैं । इसलिए थर्मामीटर का इस्तेमाल हमेशा सावधानी से करें । अगर आप किसी व्यक्ति के शरीर का बुखार नाप रहें हैं तो सबसे पहले थर्मामीटर को अच्छी तरह से धो लें उसके बाद ही इस्तेमाल करें । और तापमान नापने से पहले यह भी देख लें कि कही थर्मामीटर टूटा- फूटा तो‌ नहीं है ।