तेलुगू भाषा | Telugu Language

447

तेलुगू भाषा भारत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा है। तेलुगू भाषा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की राजभाषा भी है। तेलुगू भाषा द्रविड़ भाषा-परिवार में आती है। तेलुगू भाषा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलावा तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में भी बोली और समझी जाती है। तेलुगू भाषा को लोग “तेलुगु”, “तेनुगु” और “आंध्र” के नाम से भी जानते हैं।

तेलुगू के शब्दों की उत्पत्ति

‘ऋग्वेदीय ऐतरेय ब्राह्मण’ में भी आंध्र शब्द का प्रयोग मिलता है। तेलुगू शब्द असल में संस्कृत शब्द ‘त्रिलिंग’ से लिया गया है, जिसका तात्पर्य आंध्र प्रदेश के श्रीशैल के मल्लिकार्जुन लिंग, कालेश्वर और द्राक्षाराम के शिवलिंग से होता है। तेलुगु के आदि-कवि “नन्नय भट्ट” ने इस शब्द का प्रयोग महाभारत में किया था। यह भी कहा जाता है कि तेलुगू शब्द ‘त्रिनग’ शब्द से बना है।

भाषा

इस भाषा की मधुरता इसमें इस्तेमाल हुए कुछ संस्कृत और तेलुगू के शब्दों की ही वजह से है। ज्यादातर आंध्र भाषा में संस्कृत के शब्दों का प्रयोग किया गया है। तेलुगुदेशीय शब्दों की अधिकता जिस भाषा में है, वे भाषा तेलुगु भाषा के नाम से जानी जाती हैं। तेलुगू भाषा के विकास के लिए विद्वानों के 2 मत हैं। डा. ‘चिलुकूरि नारायण राव’ के हिसाब से तेलुगु भाषा द्राविड़ परिवार की नहीं है, वह प्राकृतजन्य है और उसका संबंध ‘पैशाची भाषा’ से है। दूसरी तरफ अगर ‘बिशप कार्डवेल’ और ‘कोराड रामकृष्णय्य’ आदि विद्वानों की माने तो तेलुगू भाषा का संबंध द्राविड़ परिवार से ही है। तेलुगू भाषा का विकास दोनों तरह की भाषाओं से मिलकर हुआ है। तेलुगू भाषा में लगभग 75 प्रतिशत संस्कृत के शब्दों का सम्मिश्रण है। पश्चिम के विद्वानों ने भी तेलुगु भाषा को ‘पूर्व की इतालीय’ भाषा कहा है।

लिपि

तेलुगू भाषा की लिपि मोतियों की माला की तरह ही सुंदर प्रतीत होती है। तेलुगू लिपि के अक्षर गोल होते हैं। तेलुगु और कन्नड़ दोनों ही भाषाओं की लिपियाँ 7वीं और 13वीं शताब्दियों में साथ-साथ विकसित हुई हैं। तेलुगु भाषा में लिखित चीज़ें 633 ई. से मिलती हैं। तेलुगू के साहित्य की शुरुआत हिन्दू महाकाव्य महाभारत के ‘नन्नय भट्ट’ द्वारा तेलुगु में लिखे जाने से हुई, जो 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच का है।

तेलुगू साहित्य

तेलगु साहित्य बहुत प्राचीन और समृद्ध है। इसमें काव्य, उपन्यास, नाटक, लघुकथाएँ, तथा पुराण भी शामिल हैं। तेलुगु साहित्य का विभाजन 4 कालों में किया गया है-

1 पुराण काल

2 काव्य काल

3 ह्रास काल

4 आधुनिक काल