ताशकंद समझौता क्या था (Tashkand samjhota kya tha)

ताशकंद समझौते के 12 घंटे बाद ही देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था । उनकी मौत कैसे हुई इस सवाल का सही जवाब आज तक किसी को नहीं मिल पाया है । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ – साथ हम देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती मनाते हैं । आज हम आपके लिए ताशकंद समझौते के बारे में जानकारी लेकर आए हैं कि आखिर ताशकंद समझौते में हुआ क्या था तो आइए जानते हैं कि ताशकंद समझौते के बारे में-

ताशकंद समझौता क्या था (Tashkand samjhota kya tha)

लाल बहादुर शास्त्री जी के बारे में जानकारी –

लाल बहादुर शास्त्री जी एक बहुत ही साधारण परिवार में जन्मे थे । पर साधारण परिवार से होने के बाद भी वे अपनी काबिलियत के दम पर देश‌ के सबसे शीर्ष पद पर पहुंचे । सार्वजनिक जीवन में लाल बहादुर शास्त्री जी ने बहुत सारी मिसालें पेश की है । जैसे उन्होंने अपने कार्यकाल में हुए रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते हुए खुद इस्तीफा दिया । और उनके पास ना ही आलीशान घर था और ना ही बड़ी – बडी गाडियां , ना ही बहुत सारा बैंक बैलेंस यहां तक कि उनके बच्चों ने कार लेने की जिद की तो उनके लिए उन्होंने लोन लेकर कार ली । लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय राजनीति में ऐसी और भी कई मिसालें दे पाते पर 1996 में ताशकंद के बाद उनकी अचानक मृत्यु हो गई । लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर कभी भी विवाद नहीं उठा पर उनकी मौत काफी रहस्यमय परिस्थितियों में हुई । 10 जनवरी , सन् 1996 में ताशकंद में पाकिस्तान के साथ हुए शान्ति समझौते के महज 12 घंटे बाद ही उनकी अचानक मृत्यु हो गई ।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से बताई जाती हैं । लाल बहादुर शास्त्री जी को दिल से सम्बंधित बीमारी तो थी और उन्हें सन् 1959 में दिल का दौरा भी पड़ा था । और इसके बाद से उनके परिजन और दोस्त ने उनको कम काम करने की सलाह भी दी थी ।

पर 9 जून सन् 1964 में देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन पर काम का दबाव में बढ़ गया था ।

समझौते के 12 घंटे बाद हुई लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु –

भारत और पाकिस्तान के बीच सन् 1965 से लेकर 23 दिसम्बर तक 6 महिने का युद्ध चला । और युद्ध खत्म होने के 4 महिने बाद सन् 1996 में दोनों देशों के शीर्ष नेता रूस में आने वाले क्षेत्र ताशकंद समझौते के लिए रवाना हुए । वहां पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान पहुंचे । और 10 जनवरी को दोनों देशों के बीच शांति समझौता भी हुआ।

ताशकंद में भारत और पाकिस्तान के शांति समझौते को लेकर लाल बहादुर शास्त्री बहुत दबाव में थे । क्योंकि पाकिस्तान को हाजी पीर और ठिथवाल देने के कारण उनकी बहुत आलोचना की जा रही थी । उनके इस फैसले से उनकी पत्नी भी उनसे नाराज़ थी ।

शास्त्री जी के फैसले पर उनकी पत्नी की नाराज़गी –

शास्त्री जी के साथ ताशकंद गए उनके अधिकारी कुलदीप नैयर ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस रात जब शास्त्री जी ने घर पर फोन मिलाया और जैसे ही फोन बच्चे ने उठाया तो उन्होंने कहा कि बेटा फोन अम्मा को दो । उसके बाद शास्त्री जी की बड़ी बेटी फोन पर आयी और बोली कि अम्मा फोन पर नहीं आएगी । तो शास्त्री जी ने कहा क्यों । तो उनकी बेटी ने जबाव दिया कि आपने हाजी पीर और ठिथवाल पाकिस्तान को दे दिया ना इसलिए अम्मा आपसे नाराज़ हैं । इस बात से शास्त्री जी को बहुत सदमा लगा । और फोन रखने के बाद वो अपने कमरे में चक्कर लगाते रहे। फिर कुछ देर बाद उन्होंने अपने सचिव वैंकरमन को फोन लगाया ताकि वो भारत से आने वाली प्रतिक्रिया जान सके । उनके सचिव ने उन्हें बताया कि दो बयान आए हैं पहला अटल बिहारी वाजपेई का था और दूसरा कृष्ण मेनन का और दोनों ने ही आपके इस फैसले की आलोचना की हैं ।

ताशकंद समझौते का प्रारूप क्या था –

* भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश अपने झगड़ों को शान्ति पूर्ण रूप से सुलझाएंगे और अपनी शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगे ।

* दोनों देशों के सशस्त्र बल 25 फरवरी 1966 में उस जगह पर चले जाएंगे जहां वे 5 अगस्त 1965 में थे ।

* दोनों देशों को शिखर वार्ताएं हमेशा जारी रहेगी और दोनों के बीच राजनयिक सम्बन्ध स्थापित रहेंगे ।

* शरणार्थी और अवैध प्रवासियों पर प्रश्न और विचार – विमर्श जारी रहेगा । और हाल में संघर्ष के चलते जब्त हुई सम्पत्ति लौटाने पर भी विचार – विमर्श किया जाऐगा ।

* दोनों देश एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे ।