स्वाइन फ्लू

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स्वाइन फ्लू या H1N1 इन्फ्लुएंजा श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। यह बीमारी आमतौर पर इन्फ्लुएंजा वायरस के इंफ्लुएंजा A (H1N1) प्रकार या स्ट्रेन के कारण होती है। यह वायरस सीधे श्वास नाली को प्रभावित करता है। इसके शुरूआती लक्षण आम फ्लू की तरह ही होते हैं। इन्फ्लुएंजा वायरस आमतौर पर सूअर में पाया जाता है और सूअर को इसका वाहक माना गया है, इसलिये इस बीमारी को स्वाइन फ्लू कहते हैं।

मुख्य लक्षण

  • बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
  • मांसपेशियों में दर्द और अकड़न।
  • सूखी खांसी, नाक बहना और ठंड लगना।
  • नींद ना आना और सर में तेज दर्द रहना।
  • बुखार 101 डिग्री तक पहुंच जाना।
  • पेट खराब होना, उल्टी और दस्त होना।
  • वजन कम होना और भूख कम लगना।

मुख्य कारण

स्वाइन फ्लू आमतौर पर इन्फ्लुएंजा A (H1N1) वायरस के संक्रमण से होता है। यह वायरस निम्नलिखित कारणों से व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे संक्रमित कर सकता है।

  • जब संक्रमित व्यक्ति छींकता है या खांसता है तो मुंह और नाक से निकलने वाली छोटी बूंदों के साथ वायरस भी बाहर आ जाता है। यह वायरस सांस के जरिए किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे बीमार कर सकता है।
  • यह वायरस लगभग 24 घंटे तक जीवित रह सकता है। यह दरवाजे के हैंडल, कंप्यूटर कीबोर्ड, फ़ोन आदि चीजों के ऊपर भी हो सकता है। यदि आप इस वायरस से संक्रमित किसी वस्तु को छूते हो तो यह वायरस आपके हाथों से आपके मुंह या नाक के जरिए आपके शरीर में प्रवेश कर आपको संक्रमित कर सकता है।

स्वाइन फ्लू से बचाव

  • हाथों को ऐसे सॉल्यूशन से धोएं जो वायरस को खत्म कर दे।
  • मास्क पहनकर घर से बाहर निकलें ताकि नाक और मुंह से वायरस शारीर में प्रवेश न कर पाए।
  • जब जरूरत पड़े तभी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाएं, जैसे हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन आदि।
  • छींकते वक्त नाक को टिस्यू पेपर से ढकें और इस्तेमाल के बाद टिस्यू पेपर नष्ट कर दें।
  • यदि आपको स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई दें तो घर में रहें और दूसरों के करीब ना जाएं।

घरेलू उपचार

दवा के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी स्वाइन फ्लू का उपचार किया जा सकता है। कुछ आसान एवं कारगर घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं।

  • गिलोय: गिलोय की शाखा के छोटे-छोटे टुकड़े और पांच से सात तुलसी की पत्तियां पानी में मिलाकर उबाल लें। इसमें स्वादानुसार काली मिर्च, सेंधा नमक या काला नमक और मिश्री मिला लें| गुनगुना होने पर इसे पी लें।
  • लहसुन: अगर कच्ची लहसुन खा सकते हैं तो रोज सुबह लहसुन की दो कलियां चबाकर खाएं। लहसुन को पीसकर गुनगुने पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं।
  • ग्वारपाठा (एलो वेरा): ग्वारपाठा की कैक्टस जैसी पत्तियों में जैल होता है। इस जैल का एक चम्मच आधा गिलास पानी में मिलाकर पीएं।
  • हल्दी: एक गिलास गरम दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीएं। हल्दी को गरम पानी या शहद में मिलाकर भी ले सकते हैं।
  • नीम: नीम की पत्तियों का रस पीएं या तीन से पांच नीम की पत्तियों को चबा भी सकते हैं।
  • तुलसी: तुलसी के आठ से दस पत्तों को सुबह खाली पेट अच्छी तरह से चबाकर खाएं। चाय या काढ़े में भी तुलसी के पत्ते मिलाकर सेवन किया जा सकता है।
  • विटामिन C: विटामिन C युक्त फलों का सेवन करें, जैसे कि संतरा, मौसंबी, आवंला और निम्बू।

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