स्वप्ना बर्मन की जीवनी | Swapna Barman Biography in Hindi

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स्वप्ना बर्मन भारतीय हेप्थैथलीट (Heptathlete) हैं। उन्हें ‘राहुल द्रविड़ एथलीट मेन्टरशिप प्रोग्राम’ के माध्यम से ‘गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन’ ने सहायता दी है। भारत की स्वप्ना बर्मन ने 2018 के एशियाई खेलों में, इंडोनेशिया में आयोजित महिला हेप्टाथलॉन (Heptathlon) में गोल्ड मेडल जीता था। वह इस हेप्टाथलॉन में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं।

हेप्टाथलान

एक हेप्टाथलॉन सात खेलों से बना एक ट्रैक और फील्ड (Track & Field) की संयुक्त आयोजन वाली प्रतियोगिता है। हेप्थैथलॉन के खिलाडी को हेपैथिलेट (Heptathlete) कहा जाता है।

हेप्टाथलॉन 2 तरह के होते हैं-

  • महिला हेप्टाथलॉन
  • पुरुष हेप्टाथलॉन

हेप्टाथलॉन कई अलग-अलग खेलों से बना है। पुरुषों का हेप्थाथलॉन बहुत पहले से चाहरदीवारी के अंदर खेला जाता है, जबकि महिलाओं का हेप्थाथलॉन बाहर खेला जाता है। हेप्टाथलॉन 1980 के दशक में बनाया (पेश किया) गया था, जो पहली बार 1984 के ओलंपिक में खेला गया था। महिलाओं के हेप्टाथलॉन में कुल 7 खेल होते हैं, जिसमें से 4 खेल पहले दिन और 3 खेल दूसरे दिन खेले जाते हैं।

वे खेल  हैं-

  • 100 मीटर हर्डल रेस
  • हाई जम्प
  • शॉर्ट पुट
  • 200 मीटर रेस
  • लॉन्ग जम्प
  • जैवलिन थ्रो
  • 800 मीटर रेस

जीवन

स्वप्ना बर्मन का जन्म 29 अक्टूबर 1996 को जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल में हुआ था। स्वप्ना बर्मन के दोनों पैरों में 6-6 उंगलियां हैं। स्वप्ना बर्मन के पिता का नाम पंचानन बर्मन और माता का नाम बसाना है। स्वप्ना बर्मन की मां चाय के बागान में मजदूरी करती थी और उनके पिता पंचानन बर्मन एक रिक्शा चालक थे। 2013 में एक स्ट्रोक (दौरा, आघात) का सामना करने के बाद पंचानन बर्मन ने बिस्तर पकड़ लिया था। स्वप्ना बर्मन को सही भोजन मिलने में भी मुश्किल होती थी और उनके असामान्य पैरों ने उनका दर्द और बढ़ा रखा था। उनके पैरों में 6 उंगलिया होने की वजह से उन्हें ज्यादा चौड़े जूतों की जरुरत थी, मगर वे ऐसे जूते नहीं खरीद सकती थी। स्वप्ना बर्मन अपने परिवार के साथ ऐसे घर में रहती हैं, जहाँ पक्की दीवारें भी नहीं हैं।

स्वप्ना बर्मन के बचपन के कोच का नाम सुकांत सिन्हा था, उनकी प्रतिभा उनके कोच ने बचपन में ही पहचान ली थी। स्वप्ना बर्मन को अपने खेल से संबंधी महंगे उपकरण खरीदने में भी काफी परेशानी होती है। स्वप्ना बर्मन अपनी पुरस्कार राशि का उपयोग अपने परिवार की देखभाल करने के लिए करती हैं।

2016 में स्वप्ना बर्मन ने एथलेटिक्स में मिली सफलता की वजह से 150,000 रुपये की स्कॉलरशिप जीती। वह वर्तमान में कोलकाता में ‘स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया कैंपस’ में ट्रेनिंग लेती हैं। 2017 में आयोजित ‘एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप’ की अंतिम खेल के दौरान स्वप्ना बर्मन चोटिल हो गए थीं। हालांकि, स्वप्ना बर्मन ने अपने कई व्यक्तिगत रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और उन्होंने पिछले 6 खेलों में पहले से ही पर्याप्त अंक प्राप्त कर लिए थे। स्वप्ना बर्मन 800 मीटर में चौथे स्थान पर रही थीं।