सुषमा स्वराज कोट्स | Sushma Swaraj Quotes in Hindi

417
“किसी के भी जीवन में 70वाँ वर्ष एक ऐसा पड़ाव लेकर आता है, जहाँ खड़ा होकर वो ये सोचता है कि मैंने क्या खोया क्या पाया।”
“फीसदी की भाषा बोलने वाले हिन्दुस्तान की अर्थव्यवस्था को नहीं समझ सकते और उसका समाधान भी नहीं दे सकते।”
“एक दूसरे को दोषारोपण करके किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि एक साथ मिलकर होता है।”
“ये इतिहास में पहली बार नहीं हुआ कि राज्य का सही अधिकारी अपने राज्य से वंचित कर दिया गया हो।”
“दुनिया की सबसे बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान होता तो सिर्फ संवाद से ही है, युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।”
“कौन सी चीज़ एकदम से बदल जाए, आख़िरकार मंज़िल कभी ना कभी जब आएगी, तो इसी गड्ढे वाली सड़क पर चलकर आएगी, लेकिन कितने झटके कितने हिचकोले लगने हैं ये देख सकते हैं।”
“हम आतंकवाद की परिभाषा तय करने में उलझे हुए हैं, हमें ये समझना होगा कि आतंकवादियों में अच्छे या बुरे के आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता।”
“सामाजिक और आर्थिक प्रगति भी हमारा एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, मानव के न्यूनतम आवश्यकताओं की यदि पूर्ति कर दी जाए तो शांति प्रिय समाज की स्थापना हो सकती है।”
“क्या हमने विश्व के संसाधनों का अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयोग किया है, या लालच में आकर उनका शोषण किया है।”
“यदि हम अपनी जीवन-शैली को परिवर्तित कर सकें और अनावश्यक खपत को घटा सकें तो हमारी दिशा ठीक हो सकती है।”
“मेरी यह आशा है कि जो हमने बीज बोया है, वो एक दिन बहुत बड़ा पेड़ बनेगा।”
“मैं बहुत ही सौभाग्यशाली हूँ, ज़िन्दगी में मुझे जो भी पुरुष मिले, इतने अच्छे मिले कि मैं अगर याद करूँ, तो मुझे ऐसा नहीं लगता कि मेरे साथ महिला होने के नाते कभी भेदभाव हुआ हो।”
“राजनीति में सफलता मेरी अपनी संघर्ष की यात्रा है, और ईश्वर की कृपा है।”
“एक खुशगवार माहौल में अगर दूसरी चीजों पर भी बात होती है, तो उन्हीं बातों से माहौल बनता है।”
“आप आक्रामक से आक्रामक बात संयमित भाषा में कर सकते हैं और इसलिए हम भाषा संयम बनाये रखें, तो अच्छा होगा।”
“आतंक के साथ बात नहीं हो सकती, लेकिन आतंक के बारे में बातचीत कर सकते हैं।”
“भारत ने हमेशा कहा है कि भारत-पाक वार्ता में कोई तीसरी पार्टी नहीं होगी। हुर्रियत एक पार्टी नहीं हो सकता।”
“हम हमेशा कहते हैं कि आतंकवाद और वार्ताएं एक साथ नहीं चल सकती हैं, लेकिन हम यह भी कहते हैं कि किसी भी बातचीत के लिए आतंक और हिंसा से मुक्त वातावरण होना चाहिए।”
“यदि पाकिस्तान एन.एस.ए आना चाहता है तो उनका स्वागत है, लेकिन वार्ता केवल आतंकवाद पर ही होगी, एजेंडे के विस्तार के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।”
“पाकिस्तान ने बार-बार संमिश्र बातचीत को पटरी से उतार दिया है।”