सुनील मित्तल की जीवनी | Sunil Mittal Biography in Hindi  

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परिचय

सुनील मित्तल एक भारतीय उद्योगपति, समाज सेवी तथा भारत के सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Airtel के अध्यक्ष हैं। उनका नाम विश्व के टेलीकॉम व्यापारियों की श्रेणी में शामिल है। सुनील मित्तल की कंपनी ‘भारती एयरटेल’ विश्व की सबसे बड़ी टेलीफोन कंपनियों में से एक है, जिसका कारोबार करीब 19 देशों में फैला हुआ है। Airtel GSM मोबाइल सेवाओं के साथ-साथ इंटरनेट ब्रॉडबैंड सेवाएं भी प्रदान करती है और लगभग 20 करोड़ ग्राहक उसकी सेवाओं का उपयोग करते हैं। सुनील मित्तल ने अपने कठिन परिश्रम और सच्ची लगन से सफलता प्राप्त की है।

शुरूआती जीवन

सुनील मित्तल का जन्म सन 1957 को पंजाब राज्य के लुधियाना जिले में एक पंजाबी अग्रवाल परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘सतपाल मित्तल’ तथा माता का नाम ‘ललिता मित्तल’ है। इनके पिता एक राजनेता थे और दो बार (1976 , 1982) लोकसभा से और एक बार (1988) राज्यसभा से सांसद रह चुके थे। उनके परिवार की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी थी, फिर भी अपने पिता के कदमों का पालन नहीं करना चाहते थे और जल्दी ही बहुत कम की उम्र में एक व्यापार शुरू कर दिया था।

सुनील मित्तल ने अपनी शुरूआती पढ़ाई मसूरी के ‘विनबर्ग एलन स्कूल’ से की और बाद में ग्वालियर के ‘सिंधिया स्कूल’ से हुई। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री सन 1976 में हासिल की। सुनील मित्तल का बचपन से ही पढाई-लिखाई में कोई विशेष रूचि नहीं थी और वो अपना खुद का कारोवार स्थापित करना चाहते थे।

करियर

सुनील मित्तल ने कम उम्र में ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक छोटा-सा साइकिल का व्यापार केवल 20000 रुपए से प्रारम्भ किया और सबसे पहले उन्होंने ‘ब्रजमोहन मुंजाल’ की हीरो साइकिल कंपनी के लिए साइकिल के पार्ट्स बनाने शुरू किए। उन्हें बाद में महसूस होने लगा कि ये व्यापार ज्यादा बड़ा नहीं हो सकता, तो उन्होंने अपने साइकिल और दूसरे धंधों को बेच दिया और मुंबई चले गए और वहाँ अपने भाईयों के साथ मिलकर ‘भारती ओवरसीज ट्रेडिंग कंपनी’ की स्थापना की।

सुनील मित्तल ने सन 1981 में पंजाब के निर्यातकों से ‘इम्पोर्ट लाइसेंस’ खरीदा और फिर जापान से आयातित पोर्टेबल जेनरेटरों के बिक्री का कार्य करने लगे। इस व्यवसाय से उन्हें वस्तुओं के मार्केटिंग और सेल्स का बहुत अनुभव मिला। धीरे-धीरे यह व्यापार जम गया और सब कुछ सही चलने लगा, परन्तु सरकार के एक नीति परिवर्तन ने उनके इस व्यापार को रातों-रात बंद कर दिया। यह लाइसेंस-राज का दौर था और सरकार ने जेनरेटर के आयात पर रोक लगा दी, क्योंकि दो भारतीय कंपनियों को देश में ही जेनरेटर बनाने का लाइसेंस दे दिया गया था।

सुनील मित्तल ने सन 1986 में भारती टेलीकॉम लिमिटेड (BTL) की स्थापना की थी और जर्मनी की AG सीमेंस कंपनी के साथ पुश बटन फ़ोन के निर्माण के लिए एग्रीमेंट किया था। उन्होंने धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार किया और 1990 के दशक तक सुनील मित्तल की कंपनी फैक्स मशीन, वायरलैस फोन और अन्य दूरसंचार उपकरण बना रही थी।

सन 1992 में जब सरकार पहली बार मोबाइल फोन सेवा के लिए लाइसेंस का वितरण कर रही थी, तब सुनील मित्तल ने उस मौके का लाभ उठाया। सुनील मित्तल ने फ्रेंच दूरसंचार समूह विवेंडी के सहयोग से दिल्ली क्षेत्र के साथ-साथ कुछ अन्य क्षेत्रों का भी सेलुलर लाइसेंस प्राप्त किया।

सन 1995 में सुनील मित्तल ने सेल्युलर सेवाओं की पेशकश के लिए भारती सेल्युलर लिमिटेड (BCL) की स्थापना की और एयरटेल ब्रांड के अंतर्गत कार्य शुरू किया। जल्द ही एयरटेल 2 लाख मोबाइल ग्राहकों का आंकड़ा पार करने वाली पहली दूरसंचार कंपनी बन गई। इसके बाद भारती सेल्यूलर लिमिटेड ने ‘इंडियावन’ नाम से भारत की पहली प्राइवेट राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय लंबी दूरी की STD/ISD टेलीफोन सेवा शुरू की।

सन 2008-2009 में भारती टेलीकॉम ने दक्षिणी अफ्रीका स्थित एक टेलीकॉम समूह MTN के अधिग्रहण की कोशिश की, पर कई दौर के बातचीत के बावजूद दोनों कंपनियों के मध्य कोई समझौता नहीं हो सका। कुछ सूत्रों का ऐसा मानना है कि दक्षिणी अफ़्रीकी सरकार शायद यह नहीं चाहती थी, इसी वजह से ये समझौता नहीं हो पाया।

जून 2010 में सुनील मित्तल के नेतृत्व में भारती टेलीकॉम ने दक्षिण अफ्रीकी टेलीकॉम कंपनी ‘जैन टेलीकॉम’ का अधिग्रहण किया। एक अभी तक का किसी भी भारतीय दूरसंचार कंपनी द्वारा सबसे बड़ा कभी अधिग्रहण था।

सन 2012 में भारती ने अमेरिकी कंपनी वॉल-मार्ट के साथ भारत में खुदरा स्टोर खोलने का करार किया पर यह ज्यादा लम्बा नहीं चल सका और अक्टूबर 2013 में यह डील समाप्त हो गयी। भारती ने सन 2014 में ‘लूप मोबाइल’ को भी लगभग 700 करोड़ में खरीदने की घोषणा की, पर बाद में सौदा रद्द कर दिया। मई 2015 में भारती रिटेल श्रंखला Easyday स्टोर और फ्यूचर ग्रुप के ‘बिग बाजार’ के विलय की घोषणा हुई।

अवार्ड एवं सम्मान

  • भारत सरकार द्वारा उन्हें सन 2007 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया।
  • NDTV बिजनेस लीडर पुरस्कार के तहत उन्हें ‘ट्रासफॉर्मिंग इंडिया लीडर’ पुरस्कार से सम्मानित किया।
  • उन्हें GSMA अध्यक्ष के पुरस्कार से भी सम्मानित किया।
  • सन 2006 में फॉर्च्यून पत्रिका ने ‘एशिया बिजनेसमैन ऑफ़ द ईयर’ से सम्मानित किया।
  • वॉयस एवं डाटा ने सन 2006 में ‘टेलीकॉम मैन ऑफ़ द ईयर’ चुना गया।
  • फ्रॉस्ट और सुलिवन एशिया प्रशांत ICT पुरस्कार से सन 2006 में ‘सीईओ ऑफ़ द ईयर’से सम्मानित किया।
  • टेलीकॉम एशिया पुरस्कार से सन 2005 में सर्वश्रेष्ठ एशियाई टेलीकॉम सीईओ से सम्मानित किया।
  • भारत संस्थागत निवेशक सन 2005 में ‘सर्वश्रेष्ठ सीईओ’ से सम्मानित किया।
  • इकनोमिक टाइम्स से सन 2005 में ‘बिज़नेस लीडर ऑफ़ द ईयर’ से सम्मानित किया।
  • एशियाई पुरस्कार से सन 2010 में ‘फिलैंथ्रॉपिस्ट ऑफ़ द ईयर’ से सम्मानित किया।
  • INSEAD बिजनेस लीडर अवार्ड से सन 2011 में सम्मानित किया।
  • सन 2016 में होनोरिस कोसा डॉक्टरेट ऑफ साइंसेज (DSC) डिग्री, एमिटी यूनिवर्सिटी गुड़गांव, से सम्मानित किया।
  • सन 2018 में ऑनर्सिस कॉसा डॉक्टरेट ऑफ साइंसेज (DSC) डिग्री, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, कटरा, जम्मू और कश्मीर, से सम्मानित किया।