स्वर्णरेखा नदी | Subarnarekha River in Hindi

398

भारत के झारखंड राज्य में बहने वाली स्वर्ण रेखा नदी एक पहाड़ी नदी है। यह नदी राँची नगर से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित नगड़ी गाँव में ‘रानी चुआं’ नामक स्थान से निकलती है और उत्तर पूर्व दिशा की ओर बढ़ती हुई मुख्य पठार को छोड़कर प्रपात के रूप में गिरती है। इस प्रपात (झरना) को ‘हुन्डरु जलप्रपात’ कहते हैं। प्रपात के रूप में गिरने के बाद स्वर्ण रेखा नदी का बहाव पूर्व दिशा की तरफ हो जाता है और मानभूम जिले के तीन संगम बिंदुओं के आगे यह दक्षिण पूर्व दिशा की ओर मुड़कर सिंहभूम में बहती हुई उत्तर पश्चिम दिशा से मिदनापुर जिले में प्रवेश करती है।

इस जिले के पश्चिमी भूभाग के जंगलों में बहती हुई बालेश्वर जिले में पहुँचती है। यह पूर्व पश्चिम की ओर टेढ़ी-मेढ़ी बहती हुई बालेश्वर नामक स्थान पर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। स्वर्ण रेखा नदी की कुल लंबाई 474 किलोमीटर है और लगभग 28928 वर्ग किलोमीटर का जल निकास इसके द्वारा होता है। इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ काँची एवं कर्कारी हैं। भारत का प्रसिद्ध एवं पहला लोहे तथा इस्पात का कारखाना इसके किनारे स्थापित हुआ। कारखाने के संस्थापक ‘जमशेद जी टाटा’ के नाम पर बसा यहाँ का नगर जमशेदपुर या टाटानगर कहा जाता है। अपने मुहाने से ऊपर की ओर यह 16 मील तक देशी नावों के लिए नौगम्य है।

स्वर्ण रेखा नदी की रेत से सैकड़ों साल से सोना निकाला जा रहा है, लेकिन अभी तक रेत से सोने के कण मिलने का सही पता नहीं लगा पाया। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि स्वर्ण रेखा नदी अनेक चट्टानों से होकर गुजरती है। इसी दौरान घर्षण की वजह से सोने के छोटे-छोटे कण पानी में आ जाते हैं। ये नदी देश के झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ इलाकों से होकर बहती है। नदी का नाम ‘स्वर्ण रेखा’ है और कहीं-कही इसे ‘सुबर्ण रेखा’ के नाम से भी जाना जाता हैं। झारखंड में तमाड़ और सारंडा जैसी जगहों पर यहां के आदिवासी परिवारों के अनेक सदस्य पानी में रेत छानकर दिनभर सोने के कण निकालने का काम करते हैं। खासतौर पर एक व्यक्ति दिनभर काम करने के बाद सोने के 1 या 2 कण ही निकाल पाता है। नदी से सोना छानने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। एक व्यक्ति महीने भर में 60-80 सोने के कण ही निकाल पाता है। सोने के ये कण चावल के दाने या उससे थोड़े बड़े होते हैं। रेत से सोने के कण छानने का काम वर्ष भर होता है, सिर्फ बाढ़ के दौरान 2 महीने के लिए काम बंद रहता है।

रेत से सोना निकालने वालों को 1 कण के बदले 80-100 रुपए मिलते हैं। एक आदमी सोने के कण बेचकर महीने भर में 5-8 हजार रुपए कमा लेता है। जबकि 1 सोने के कण की बाजार में कीमत लगभग 300 रुपए है। सोना निकालने वाले व्यक्तियों से ये कण स्थानीय दलाल और सुनार खरीदते हैं। स्वर्ण रेखा नदी तीन राज्यों से होकर गुजरती है। झारखंड के जिस इलाके में सोने के कण को निकालने का काम किया जाता है वह बहुत जंगली इलाका है। ये नक्सलियों के गढ़ के रूप में भी बदनाम है। भले ही सोने के कण निकालने वाले आदिवासियों की आर्थिक हालत बदतर हो, लेकिन काम में सक्रिय दलाल और सुनारों ने इससे काफी संपत्ति बनाई है।