पित्ताशय की पथरी | Pittashay Ki Pathri | Gallbladder Stone in Hindi

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हमारे पेट में दायीं तरफ लीवर के निचे एक छोटी थैली होती है। इस थैली को पित्ताशय (Gall bladder) कहा जाता है। इस थैली में लीवर में निर्मित होने वाले पित्त (Bile) का संग्रह होता है। पित्त में यदि कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन और पित्त लवणों की मात्रा अधिक हो जाए तो यह तत्व पित्ताशय में जमा होने शुरु हो जाते हैं, और धीरे धीरे सख्त होकर पथरी में परिवर्तित हो जाते हैं। यह बीमारी 50 साल से अधिक आयु के लोगों में ज्यादा पायी जाती है और पुरषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक होती है।

मुख्य लक्षण

  • पेट और पीठ में अचानक दर्द होना।
  • पेट में गैस बनना और भूख कम लगना।
  • कब्ज, अपच होना और जी मचलना।
  • ज्यादा तला हुआ खाना खाने के बाद पेट का दर्द तेज होना।
  • आंखें और तव्चा पिली पड़ सकती हैं।
  • तेज दर्द के साथ उल्टी आ सकती है।

मुख्य कारण

  • वसायुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करना।
  • सामान्य से ज्यादा वजन होना (मोटापा)
  • शरीर में सामान्य से अधिक कोलेस्ट्रॉल होना।
  • समय पर खाना ना खाना।
  • पित्त में क्लोनोर्किस या अस्कारिस जैसे परजीवी होना।
  • यह भीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है।

पित्ताशय की पथरी से बचाव

  • उपयुक्त मात्रा में पानी पिएं।
  • वसायुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन ना करें।
  • आसानी से पचने वाला भोजन करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें और खाना खाने के बाद थोड़ा टहलें।
  • फाइबर से समृद्ध खाद्य पदार्थों (सब्जी, फल और जौ) का सेवन करें।

घरेलू उपचार

दवा के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी पित्ताशय की पथरी का उपचार किया जा सकता है। कुछ आसान एवं कारगर घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं।

  • सेब का जूस और सिरका: एक गिलास सेब के जूस में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर दिन में दो बार पिएं। यह पेय पथरी को कम करता है और बनने से भी रोकता है।
  • नाशपाती का जूस: एक गिलास गरम पानी में एक गिलास नाशपाती का जूस और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार पिएं। यह पेय कोलेस्ट्रॉल को को जमने से रोकता है।
  • चुकंदर, खीरा और गाजर का जूस: एक चुकंदर, एक खीरा और चार गाजर का जूस तैयार करें । इसका दिन में दो से तीन बार सेवन करें।
  • पुदीना: एक गिलास पानी में पुदीने की ताज़ी पत्तियों को मिलाकर उबालें। हल्का गुनगुना होने पर पानी को छानकर इसमें शहद मिला लें। एस पेय का दिन में दो बार सेवन करें।
  • विटामिन C: ऐसे फलों का सेवन करें जिनमे विटामिन C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जैसे कि संतरा, मौसंबी, और आंवला।
  • अरंडी का तेल: पिताशय के ऊपर पेट पर अरंडी के तेल से मालिश करें। यह दर्द कम करता है और पथरी को रोकने में भी सहायक होता है।