सोन नदी | Son River in Hindi

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सोन नदी (सोनभद्र नदी) भारत के मध्य प्रदेश राज्य से निकलकर उत्तर प्रदेश और झारखंड राज्य की पहाड़ियों से गुजरते हुए बिहार की राजधानी पटना (पाटलिपुत्र) के समीप जाकर गंगा नदी में शामिल हो जाती है। यह बिहार की एक प्रमुख नदी है। इस नदी का नाम ‘सोन’ इसलिए पड़ा’ क्योंकि इसकी बालू (रेत) पीले रंग की है’ जो सोने कि तरह चमकीली है। सोन नदी की रेत मकान बनाने आदि कार्यों के लिए बहुत उपयोगी हैं। यह रेत पूरे बिहार में भवन निर्माण के लिए उपयोग में लायी जाती है और इस रेत को उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में भी भेजा जाता है। सोन नदी का वर्णन शास्त्रों में भी आता है।

गंगा नदी की सहायक नदियों में सोन नदी का प्रमुख स्थान है। इसका पुराना नाम ‘सोहन’ था। यह नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक नामक पहाड़ से निकलकर 350 मील का चक्कर काटती हुई पटना से पश्चिम गंगा नदी में मिलती है।

सोन नदी का पानी मीठा, पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक है। इसके तटों पर अनेक प्राकृतिक दृश्य बहुत ही सुन्दर हैं। फारसी, उर्दू और हिंदी कवियों ने सोन नदी के जल का वर्णन किया है। इस नदी में डिहरी-आन-सोन पर बाँध बाँधकर 296 मील लंबी नहर निकाली गई है, जिसके जल से शाहाबाद, गया और पटना जिलों के लगभग 7 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई होती है। यह बाँध 1874 ई. में तैयार हो गया था। सोन नदी पर एक लंबा पुल, लगभग 3 मील लंबा, डिहरी-ऑन-सोन पर बना हुआ है।

दूसरा पुल पटना और आरा के बीच कोइलवर नामक स्थान पर है। कोइलवर पुल रेल-सह-सड़क पुल है। ऊपर रेलगाड़ियाँ और नीचे बस, मोटर और बैलगाड़ियाँ आदि चलती हैं। सोन नदी पर एक तीसरा पुल ग्रैंड ट्रंक रोड पर बनाया गया है। यह पुल 1965 ई. में तैयार हो गया था। सोन नदी का तल अपेक्षया छिछला है और पानी कम ही रहता है, पर बरसात में इसका रूप विकराल हो जाता है, पानी मटियाले रंग का, झाग से भरी लहरें भयंकर हो जाती हैं। इसकी धारा तेज गति से बड़े जोर-शोर के साथ बहती हैं।

जल विवाद

सोन नदी के बँटवारे को लेकर इसके संबंधित राज्यों में लंबे समय से विवाद रहा है। सरयु राय द्वारा दायर जनहित याचिका पर पटना उच्च न्यायालय ने सोन नदी के विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार को सितंबर 2011 में न्यायाधिकरण गठित करने का आदेश दिया।