सोने का खेत

547

शहंशाह अकबर के घर एक सफाईवाला सफाई कर रहा था, तो सफाई वाले से शहंशाह अकबर का पसंदीदा फूलदान टूट जाता है और सफाई वाला टूटे हुये फूलदान को घर से बहार ले जाता है। शहंशाह अकबर अपने घर आये, तो पसंदीदा फूलदान पर नजर गई तो बोले……!

शहंशाह अकबर बोले – सिपाही….!

सिपाही बोला अकबर से – जी जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – हमारा पसंदीदा फूलदान कहाँ गया….? कहीं वो फिर से तो नहीं खो गया।

सिपाही बोला अकबर से – जब मैंने नौकर को सफाई करने के लिए अंदर आने दिया, तब तो यही था। मैं अभी उससे पूछता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – हाँ…. उसे फौरन यहां बुलाओ।

सिपाही, सफाई वाले नौकर को शहंशाह अकबर के पास बुलाकर ले आता है।

शहंशाह अकबर बोले सफाई वाले नौकर से – हमारा फूलदान कहाँ गया ? आखिर में, तो तुम्ही यहाँ थे। बताओ वो कहाँ है ?

सफाई वाला नौकर बोलने लगा अकबर से – मैं उसे साफ़ करने ले गया था।

शहंशाह अकबर बोले सफाई वाले नौकर से – सफाई…..! उसके लिए यहाँ से ले जाने की, क्या जरूरत थी ? जाओ उसे फ़ौरन वापस लाओ।

सफाई वाला नौकर बोलने लगा अकबर से – हुजूर…..! मुझे माफ़ कर दीजिये। हुजूर…. पर दरअसल सफाई करते वक्त गिरकर टूट गया।

शहंशाह अकबर बोले सफाई वाले नौकर से – टूट गया…! मगर अभी तो कहा था, उसे साफ़ करने ले गए हो। गलती से गिराने के लिए हम तुम्हेँ माफ़ कर देते हैं, मगर हम तुम्हें झूठ बोलने की सजा देंगे। हमें झूठ से सख्त नफरत है, दफा हो जाओ हमारी सल्तनत से…..!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – सिपाहियों ….! ले जाओ, इसे यहाँ से…..!

सफाई वाला नौकर बोला अकबर से – हुजूर….! मुझे माफ़ कर दीजिये। हुजूर……! मुझसे गलती हो गई। हुजूर…..! मैं डर गया था। हुजूर….! मुझे माफ़ कर दीजिये।

इस तरह कहता हुआ नौकर जा रहा था। शहंशाह अकबर का एक सिपाही उसे देश बहार निकाल देते हैं।

शहंशाह अकबर और बीरबल दरबार में बैठे अपने अन्य मंत्रियों के साथ और शहंशाह अकबर अपने सफाई वाले नौकर की बात बताने लगे।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल और अन्य मंत्रियों से – इस तरह हमनें उसे देश निकाला की सजा दी। किसी भी झूठे को कतई हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमेशा सच बोलना चाहिए।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – आपने बहुत अच्छा किया। हुजूर…..! कभी-भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। सच्चाई सबसे बेहतर है….!

शहंशाह अकबर बोले अपने मंत्री से – हाँ…. यक़ीनन।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल और अन्य मंत्रियों से – क्या आप में से कभी किसी ने झूठ बोला है ?

शहंशाह अकबर से अन्य मंत्री बोले – नहीं जहाँपनाह……! झूठ कभी नहीं…..! झूठ तो कभी-भी नहीं हो सकता। मुझे तो कभी झूठ बोलनी भी नहीं आती है। हुजूर……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! तुम क्या कहते हो ? तुमनें कभी झूठ बोला है।

बीरबल बोला अकबर से – मैंने कभी न कभी तो झूठ बोला है। जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तुम्हारा मतलब है, कि हमारे दरबार के नौ रत्नों में से एक रतन झूठा है।

बीरबल बोला अकबर से – लेकिन हुजूर……! हमें कभी न कभी तो झूठ बोलना ही पड़ता है न…. मुझे ये यकीन है हर कोई झूठ बोलता है। किसी को नुकसान या ठेस पहुंचाने के लिए नहीं…. पर किसी को ठेस न पहुंचे, इसलिए हुजूर……।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – नहीं….! हमें नहीं लगता कि किसी को भी किसी भी हालत में झूठ बोलने की जरुरत है और हम ये कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमारे दरबार का खास मंत्री एक झूठा शख्स हो।

बीरबल बोला अकबर से – लेकिन हुजूर…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – नहीं….. नहीं…. नहीं……! अब हम कुछ नहीं सुनना चाहते। हमारे उसूल…. सबके लिए बराबर हैं। इसलिए अब तुम हमारे दरबार में मंत्री नहीं रह सकते। बीरबल……! हमें झूठ और झूठों से सख्त नफरत है। हम अपने दरबार से निकालते हैं, चले जाओ यहाँ से और अपनी सूरत कभी-भी मत दिखाना।

बीरबल बोला अकबर से – मैं…..! जैसी आपकी मर्जी हुजूर……!

और बीरबल… शहंशाह अकबर के दरबार से चले आते हैं। अपने घर….

बीरबल अपने सेवक से बोले – सेवक राम….!

सेवक राम बोला बीरबल से – जी हुजूर……! कहिए…. मैं क्या कर सकता हूँ ?

बीरबल बोले अपने सेवक राम से – बाजार जाकर, मेरे लिए शहर में सबसे अच्छा सुनार ढूँढ़ो। उससे कहना कि, एक गेंहू की डाली सोने की बनाये। पूरी डाल से लेकर गेहूं के दानों तक एक डाल जैसी होनी चाहिए। सेवक…..! बताओ और जाकर, एक बढ़िया सुनार ढूंढकर उससे यह काम करवाओ।

कुछ दिनों के बाद बीरबल शहंशाह अकबर के दरबार में जाता है। तो शहंशाह अकबर ने बीरबल को दरबार में आते देखा तो बोले बीरबल से……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! हमने तुम्हें अपने दरबार से निकालकर कहा था कि कभी अपनी सूरत मत दिखाना, तो तुमने हमारे हुकुम की तामील क्यों नहीं की ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…….! मुझे माफ़ करें। मैं आपके हुकुम की नाफ़रमानी नहीं करना चाहता था।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तो यहाँ….. क्यों आये हो ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! आपने मुझे दरबार में आने से माना किया हो, फिर भी में इस राज्य का वफादार नागरिक हूँ। मुझे एक ऐसी चीज मिली हैं, जो एक इस सल्तनत को दुनिया में सबसे अमीर बना देगी। इसलिए सोचा आपको आकर दिखा दूँ।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – सुचमुच…..! ऐसी क्या चीज है ? जो हमारी दुनिया में सबसे अमीर बना देगी। दिखाओ हमें…..!

बीरबल ने शहंशाह अकबर को सुनार से बनवाई एक गेंहू की बाल को दिखाया।

शहंशाह अकबर गेंहू की बाल को लेकर बोले – ये….. ये तो असली सोना है।

बीरबल बोला अकबर से – जी हुजूर…..! ये बिल्कुल असली सोना है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – मगर इसका क्या मतलब है। और इसका करना क्या चाहिये ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! ये सोने की डाली मुझे एक ज्योतिषी ने दी थी, जो वर्षों की तपस्या के बाद हिमालय पर्वत से लोटे थे। ये उन्हें भगवान से वरदान में मिला था। उन्होंने कहा अगर, हम इसे सबसे उपजाऊ जमीन पर बोयेंगे, तो सोने की खेती कर सकते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल.….! क्या तुम्हे यकीन है ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! ये ज्योतिषी कोई आम आदमी नहीं थे, मुझे तालाब के पास ये डाली देकर तालाब के उस पार पानी पर चलकर गये।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – पानी पर चलकर गए।

बीरबल बोला अकबर से – जी हुजूर…….! मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसने ऐसा ही किया। जैसे हम जमीन पर चलते हैं वैसे वे पानी पर चलकर तालाब पार कर गए। हुजूर……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – खैर  बीरबल……! अब वक्त गायब मत करो और जल्दी से सबसे उपजाऊ जमीन ढूंढकर उस बाली को वहां बो दो।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…….! मैंने पहले ही ये काम कर दिया है, और ऐसी एक जमीन भी ढूंढ ली है। मैं आपको अभी वहां ले जा सकता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ठीक है, तो फिर हम कल ही इस बाली को बोयेंगे। कल सवेरे यहां आना। हम साथ चलेंगे। दूसरों को भी तुम बता देना। वो जमीन कहाँ है… ? ताकि वो भी वहां आकर, इस सोने की बाली की बुवाई को देख सकें।

शहंशाह अकबर सभा को संबोधित करते हुए, मंत्री बोले शहंशाह अकबर …जिंदाबाद……!  शहंशाह अकबर …जिंदाबाद……!

अगले दिन सुबह शहंशाह अकबर और बीरबल उपजाऊ वाली जमीन के पास गए अन्य मंत्रियो के साथ

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…….! यही वो जगह है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ओ…. फिर देरी किस बात की है, जाओ….. बीरबल…… और बाली को बो दो।

बीरबल बोला अकबर से – नहीं हुजूर……! मैं ये डाली नहीं बो सकता।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – नहीं बो सकते। क्या मतलब तुम नहीं बो सकते ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर……! सिर्फ, वही इसकी बुवाई कर सकता है, जिसने कभी झूठ नहीं बोला हो। अगर कोई झूठा, इसे बोयेगा। तो ये सोने की डाली नहीं उगेगी। और जैसा मैंने आप से कहा है, मैंने जीवन में झूठ बोला है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ठीक है….!

शहंशाह अकबर बोले अपने अन्य मंत्रियो से – तो फिर आप में से कोई आगे आकर, इस बाली को बोइये।

और शहंशाह अकबर अपने अन्य मंत्रियो से बाली को बोने के लिए बोला…… तो अकबर के मंत्रियो में से कोई भी आगे नहीं आया…..।

 शहंशाह अकबर बोले – हमें यकीन नहीं होता, हमारे पास एक भी ऐसा आदमी नहीं…. जिसने कभी झूठ नहीं बोला हो।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर……! मुझे लगता है, कि सिर्फ आप ही इसकी बुवाई कर सकते हैं।  सिर्फ आप…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – आ…. बो…..!  …. इस तरह करने लगे। शहंशाह अकबर

बीरबल बोला अकबर से – अब सिर्फ, आप ही हैं, जिसने कभी झूठ नहीं बोला है। फिर क्यों न आप इस गेंहू कि डाली को बो दें ?

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हमने भी कभी बचपन में कभी कुछ झूठ बोले होंगे। इसलिए अब हमें नहीं लगता हम…….।

और शहंशाह अकबर इस तरह बोलने लगे तो बीरबल ने कहा।  

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर……! मैं झूठ बोल रहा था। वो सोने की डाली जादुई नहीं है, ना ही मुझे ज्योतिषी ने दी थी। इसे मैंने शहर के सुनार से बन बनवाया था।

शहंशाह अकबर और सारे मंत्री बीरबल की तरफ देखने लगे।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! आप समझ गये होंगे, हर किसी को कभी न कभी झूठ बोलना पड़ता है। और सच्चाई छुपाने के लिए या धोखा देने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए किसी का दिल न दु:खे या शर्मिंदा न होने पड़े या किसी कारण…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हम समझ गए। बीरबल…….! और सच बोलने पर सजा देने के लिए एक माफ़ी चाहते हैं। और बिना डरे हमें अपनी गलती का अहसास करवाने के लिए, हम तुम्हारे शुक्रगुजार हैं। तुम हमारे एक सच्चे दोस्त हो।  बीरबल…….! शुक्रिया……! बहुत….. बहुत…… शुक्रिया……!

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया…..! हुजूर…….! इस इज्जत अफजाई का ….. शुक्रिया…..!

सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए