1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग | Somnath Jyotirlinga in Hindi

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परिचय

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रथम ज्योतिर्लिंग है। यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के (सौराष्ट्र) प्रभास क्षेत्र के वेरावल में स्थित है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग एक प्राचीन ज्योतिर्लिंग है, जिसकी गिनती 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में की जाती है। पुराणों की कथाओं के अनुसार चन्द्रदेव ने सर्वप्रथम सोमनाथ महादेव का स्वर्ण मंदिर बनाया था, जिससे इसका नाम सोमनाथ मंदिर रखा गया। सोमनाथ मंदिर का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान और खुबसूरत स्थल है। सोमनाथ मंदिर को अब तक 17 बार नष्ट किया गया और हर बार इसका पुननिर्माण किया गया।

मंदिर के बारे में जानकारी

सोमनाथ मंदिर एक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल है। मंदिर प्रांगण में रात 7:30 बजे से 8:30 बजे तक एक घंटे का साउंड और लाइट शो भी चलता है, जिसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बहुत ही सुन्दर चित्र सहित चित्रण किया जाता है। यह मंदिर दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। लोक कथाओं के अनुसार यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी देह का त्याग किया था। इसी कारण इस क्षेत्र का महत्व और भी बढ़ गया। ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे। तब “जरा” नामक शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पद्दचिन्ह को हिरन की आँख जानकर धोखे में तीर मारा था, जिसके कारण श्री कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुण्ठ गमन किया। सोमनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग को भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है, इस शिवलिंग के यहाँ स्थापित होने की बहुत सी पौराणिक कथाएँ है। इन पवित्र ज्योतिर्लिंगों की स्थापना वहीं की गयी है, जहाँ भगवान शिव ने अपने दर्शन दिए थे।

सोमनाथ मंदिर में पार्वती देवी, सरस्वती देवी, लक्ष्मी देवी, गंगा देवी और नंदी की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। भूमि के उपरी भाग में शिवलिंग से उपर अह्ल्येश्वर की मूर्ति है। मंदिर के परिसर में गणेश जी का मंदिर है और उत्तरी द्वार के बाहर अघोरलिंग की मूर्ति स्थापित है। प्रभावनगर में अहल्याबाई मंदिर के पास ही महाकाली का मंदिर है। नगर के द्वार के पास गौरीकुण्ड नामक सरोवर है, जिसके पास एक प्राचीन शिवलिंग है। सोमनाथ भगवान की पूजा और उपासना करने से भक्तों के तपेदिक तथा कोढ़ की बीमारी नष्ट हो जाते हैं। प्रभास क्षेत्र में सभी देवताओं ने मिलकर एक सोमकुण्ड की स्थापना की थी। लोगों का मानना है कि इस कुण्ड में शिव तथा ब्रह्मा जी निवास करते हैं। इस पृथ्वी पर यह चन्द्रकुण्ड मनुष्यों के पापों का नाश करने वाले के रूप में प्रसिद्ध है। इसे “पापनाशक” तीर्थ भी कहते हैं। जो मनुष्य चन्द्रकुण्ड में स्नान करता हैं वह सब प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास

अत्यंत धनवान होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोडा गया और इसका पुननिर्माण किया गया। वर्तमान भवन के पुननिर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के बाद “लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल” ने करवाया था। भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने 1 दिसंबर सन. 1995 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया।

सर्वप्रथम एक मंदिर ईसा के पूर्व में अस्तित्व में था। इस जगह पर दूसरी बार मंदिर का पुननिर्माण 7वीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने किया। 8वीं सदी में सिंध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी। प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका तीसरी बार पुननिर्माण किया। अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा, जिससे प्रभावित हो महमूद गजनवी ने सन. 1024 में 5000 सैनिकों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला कर उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। सन. 1024 में महमूद गजनवी ने मंदिर नष्ट कर दिया था। मूर्तियों को तोड़ने तथा सोने-चाँदी की लूट करने के लिए उसने मंदिर में तोड़फोड़ की थी। मंदिर के हीरे-जवाहरातों को लूटकर महमूद गजनवी अपने देश गजनी चला गया था। उक्त सोमनाथ मंदिर का भग्नावशेष आज भी समुद्र के किनारे विद्यमान है। इतिहास के अनुसार बताया जाता है कि जब महमूद गजनवी जब उस शिवलिंग को तोड़ नहीं पाया, तब उसने शिवलिंग के आस-पास में भीषण आग लगवा दी थी। सोमनाथ मंदिर में नीलमणि के 56 स्तम्भ लगे हुए थे।

इसके पश्चात गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने मंदिर का पुननिर्माण कराया था। सन. 1297 में जब दिल्ली की सल्तनत ने गुजरात पर कब्ज़ा किया तब इसे पांचवी बार गिराया गया। मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः सन. 1706 में गिरा दिया। इस समय जो मंदिर खड़ा है, उसे भारत के गृह मंत्री “लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल” ने बनवाया और भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने 1 दिसंबर सन. 1995 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया।

सोमनाथ मंदिर का बार-बार खंडन और निर्माण होता रहा पर शिवलिंग यथावत वहीँ पर रहा। मंदिर के दक्षिण में समुद्र के किनारे एक स्तम्भ है। उस स्तम्भ के ऊपर तीर का संकेत किया गया है कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच में पृथ्वी का कोई भू-भाग नहीं है। इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली हुई है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा

शिव पुराण में वर्णित कथानुसार सोम अर्थात चन्द्र ने राजा दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से विवाह किया था। चन्द्रमा की 27 पत्नियों में से रोहिणी उन्हें अति प्रिय थी, रोहिणी को चन्द्रमा विशेष आदर तथा प्रेम करते थे। दक्ष ने इस अन्याय को देखकर क्रोध में आकर चंद्रदेव को श्राप दे दिया कि अब से हर दिन तुम्हारा तेज क्षीण होता रहेगा, जिसके फलस्वरूप चन्द्र का तेज हर दूसरे दिन घटने लगा। श्राप से विचलित और दु:खी होकर चन्द्र ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। अंततः शिव प्रसन्न हुए और चन्द्र के श्राप का निवारण किया। सोम के कष्टों को दूर करने वाले प्रभु शिव का यहाँ स्थापन करवाकर उनका नामकरण “सोमनाथ” हुआ।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हे। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार हर रोज प्रातःकाल और संध्या के समय इन 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम जपने से या दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप या कष्ट दूर हो जाते हैं।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के संबंध में श्लोक निम्नलिखित है-

श्लोक-
सौराष्ट्र देशे विशवेऽतिरम्ये, ज्योतिर्मय चंद्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृतावतारम् तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये।।

यहां दिए गए निम्नलिखित श्लोकों को पढ़ते हुए जो व्यक्ति सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का मन से ध्यान करता है, उसके सातों जन्म के पाप या कष्ट नष्ट हो जाते हैं। वास्तव में 64 ज्योतिर्लिंगों को माना जाता है, लेकिन इनमें से 12 ज्योतिर्लिंगों को ही सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है।

 ज्योतिर्लिंगों की तालिका

क्रम. संख्या ज्योतिर्लिंग का नाम ज्योतिर्लिंग का स्थान ज्योतिर्लिंग का संक्षिप्त वर्णन
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रभास पाटन, सौराष्ट्र, गुजरात विदेशी आक्रमणकारियों ने इसे 17 बार नष्ट किया। सबसे अधिक नुकसान महमूद गजनवी के हमले से हुआ था। हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया है।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर, कुर्नूल, आन्ध्र प्रदेश मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है।
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षिप्रा नदी के तट पर, महाकाल, उज्जैन, मध्य प्रदेश महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर, मध्य प्रदेश ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का आकार औंकार अर्थात ऊं जैसा है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर के नाम से जाना जाता है।
5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर, केदारनाथ, उत्तराखंड केदारनाथ ज्योतिर्लिंग समुद्र तल से लगभग 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है।
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मुंबई से पूर्व दिशा में और पुणे से उत्तर दिशा में भीमा नदी के किनारे सह्याद्रि पर्वत पर, भीमाशंकर, महाराष्ट्र भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को ‘मोटेश्वर महादेव’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर भगवान शिव ने भीमासुर राक्षस का वध किया था।
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग गंगा तट पर, काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ में भगवान शिव का वास है, जो व्‍यक्ति इस पवित्र स्‍थान पर मृत्‍यु को प्राप्‍त होता है, वह इस संसार के क्लेश से मुक्त हो जाता है।
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे, नासिक, महाराष्ट्र ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में रहना पड़ा।
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग देवघर, झारखंड लंकापति रावण ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर एक शिवलिंग प्राप्त किया, जिसे वह लंका में स्थापित करना चाहता था, परंतु ईश्वर की लीला से वह शिवलिंग वैद्यनाथ धाम में ‍ही स्थापित हो गया।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दारुकावन, द्वारका, गुजरात भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। धार्मिक शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता माने गए हैं, नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है।
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम, रामनाड, तमिलनाडु इस ज्योतिर्लिंग के विषय में मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। यहां पर श्रीराम ने बालू का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की और रावण पर विजय हेतु भगवान शिव से वरदान मांगा।
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग एल्लोरा के पास, औरंगाबाद, महाराष्ट्र ऐसी मान्यता है कि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से वंशवृद्धि होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसका निर्माण अहिल्‍याबाई होल्‍कर के द्वारा करवाया गया था।