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सामाजिक मुद्दे

सामाजिक मुद्दे यानी “सामाजिक समस्यासामाजिक बुराईऔर सामाजिक संघर्ष” जिसका संपूर्ण समाज या समाज के एक हिस्से द्वारा विरोध किया जाता है। यह एक अनचाही सामाजिक स्थिति हैइसका होना अक्सर समाज के लिए हानिकारक है। 

गरीबी वह अवस्था है, जिसमें कोई इन्सान अपने जीवन की जरुरत को पूरा नहीं कर पाताहै, जैसे- खाना, पानी, कपड़े और घर का न होना गरीबी कहलाता है। जिन लोगों की आय गरीबी रेखा से नीचे होती है, वो गरीब होते हैं और उनका जीवन बहुत कठिनाई से गुजरता...
हमारे समाज में महिलाओं को कम दर्जा दिया जाता है। पुरुषों के मुकाबले इससे हमारी पिछड़ी सोच का पता चलता है। यह लगभग पूरे देश में देखा जा सकता है, मगर खासतौर पर पिछड़े हुए इलाकों में यह ज्यादा देखने को मिलता है। समाज को महिलाओं के प्रति अपना...
शराब का अगर नियमित रूप से सीमित मात्रा में सेवन किया जाए, तो वह शरीर को लाभ देती है। मगर इसकी लत लोगों को आसानी से लग जाती है,जो उन्हें को बर्बाद कर देती है। अधिक शराब की लत से व्यक्ति काबू से बहार हो जाए, तो वो केवल...
यह एक बहुत जरुरी मुद्दा है। लोगों को अपने आस-पास का इलाके के साथ-साथ खुद को भी साफ-सुथरा रखना चाहिए, ताकि लोग स्वस्थ रहें और दूसरों को भी कोई तकलीफ ना हो। लोगों को अपने खाना रखने की जगह को साफ़ रखना चाहिए। साफ-सफाई एक अच्छी आदत है, जो स्वच्छ...
यह एक ऐसी धार्मिक प्रथा है, जो भारत में बहुत सालों से चलती आरही है। सती प्रथा के हिसाब से अगर किसी महिला के पति का देहांत हो जाए, तो उसकी पत्नी अपने पति के अंतिम संस्कार के समय उसकी चिता में आत्मत्याग (आत्महत्या) कर लेती है। 1987 में ‘रूप...
जाति व्यवस्था जन्म के समय से व्यक्तियों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटने की एक प्रणाली है। भारत में जाति व्यवस्था मुख्य रूप से काम पर आधारित है। भारत काफी समय से जाति व्यवस्था का शिकार रहा है। भारत की इस जाति व्यवस्था ने जीवन को काफी हद तक प्रभावित किया...
भिखारी वह होता है, जो कोई काम नहीं करता और दूसरे लोगों से पैसे या खाना मांगता है। भिखारी ज्यादातर पार्क के पास, बाजार के पास या किसी आने-जाने के साधन जैसे- मेट्रो या बस अड्डे के पास मिल सकते हैं।भीख मांगना हमारे देश की एक बहुत बड़ी समस्या...
जब दो धर्मों या दो धर्मों को मानने वाले लोगों के बीच में कुछ संघर्ष होने लगता है, तो वह धार्मिक संघर्ष कहलाता है। आज के समय में यह संघर्ष खास-तौर पर हिन्दू धर्म और मुस्लिम धर्म के लोगों के बीच में होते हैं। आज के समय में धार्मिक...
किसी भी चीज़ पर बिना सोचे-समझे, उसे बिना जाँचे और परखे, जरुरत से ज्यादा यकीन करना ‘अंधविश्वास’ कहलाता है। चाहे वह भगवान की भक्ति हो या किसी इंसान की भक्ति, कई बार लोग भगवान की भक्ति में इतना खो जाते हैं, कि उन्हें सही और गलत में कोई अंतर...
असल में, किशोर अपराध नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों को कहते हैं। कानूनी दृष्टिकोण के अनुसार  बाल अपराध 8 वर्ष से लेकर 16 वर्ष  तक के बालक द्वारा किया गया कानून विरोधी कार्य है। किशोर लड़कों या लड़कियों द्वारा किए गए अपराध आमतौर पर किशोर अपराध कहलाते हैं। इसके...

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