शरद पवार की जीवनी | Sharad Pawar Biography in Hindi

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परिचय

शरद पवार वरिष्ठ भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो ‘नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी’ के संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं। वे महाराष्ट्र राज्य के 3 बार मुख्यमंत्री पद पर भी रह चुके हैं। एक प्रभावशाली नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले शरद पवार केंद्र सरकार में ‘रक्षा मंत्री’ और ‘कृषि मंत्री’ भी रह चुके हैं। वे पहले कांग्रेस पार्टी में थे, लेकिन उन्होंने सन 1999 में अपने राजनीतिक दल ‘नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी’ की स्थापना की। वर्तमान में वे राज्यसभा से सांसद हैं और अपनी पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजनीति और महाराष्ट्र के क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ है।

राजनीति के साथ-साथ शरद पवार क्रिकेट प्रबंधन से भी जुड़े हुए हैं। सन 2005 से 2008 तक भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड (BCCI- Bhartiya Cricket Control Board) के अध्यक्ष और सन 2010 से 2012 तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कौंसिल के भी अध्यक्ष थे। सन 2001 से 2010 तक वे मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA- Mumbai Cricket Association) के अध्यक्ष रह चुके हैं और फिर उन्हें एक बार जून 2015 में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष नियुक्त किया।

शुरूआती जीवन

शरद पवार का जन्म महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर में 12 दिसम्बर 1940 में हुआ था। इनके पिता का नाम ‘गोविंदराव पवार’ तथा माता का नाम ‘शारदाबाई पवार’ था। इनके पिता बारामती शहर के ‘कृषक सहकारी संघ’ में कार्य करते थे और उनकी माता बारामती शहर से 10 किलोमीटर दूर कातेवाड़ी गाँव में परिवार के फार्म की देख-भाल करती थीं। शरद पवार ने पुणे विश्वविद्यालय से BMCC (Brihan Maharashtra College of Commerce) से पढ़ाई की।

राजनितिक जीवन

शरद पवार ने अपना राजनीतिक गुरु महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ‘यशवंत राव चौहान’ को माना। शरद पवार सन 1967 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर बारामती विधान सभा क्षेत्र से चुनकर पहली बार महाराष्ट्र विधान सभा में पहुंचे। उन्होंने सन 1978 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी तथा जनता पार्टी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनायी और पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।

सन 1980 में सत्ता में वापसी के बाद ‘इंदिरा गाँधी’ सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त कर दिया। सन 1980 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत मिली और ‘ए.आर अंतुले’ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी।

सन 1983 में शरद पवार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (सोशलिस्ट) के अध्यक्ष बने और अपने जीवन में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोक सभा चुनाव जीता। उन्होंने सन 1985 में हुए विधान सभा चुनाव में जीत हासिल की और राज्य की राजनीति में ध्यान रखने के लिए लोक सभा सीट से इस्तीफा दे दिया। विधान सभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (सोशलिस्ट) को 288 में से 54 सीटें मिली और शरद पवार विपक्ष के नेता चुने गए।

सन 1987 में शरद पवार कांग्रेस पार्टी में वापस आ गए। जून 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ‘राजीव गाँधी’ ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री ‘शंकर राव चौहान’ को केन्द्रीय वित्त मंत्री बना दिया, जिसके बाद शरद पवार राज्य के मुख्यमंत्री बनाये गए। सन 1989 के लोक सभा चुनाव में महाराष्ट्र के कुल 48 सीटों में से कांग्रेस ने 28 सीटों पर विजय हासिल की।

फरवरी 1990 में हुए विधानसभा चुनाव में शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी और कांग्रेस पार्टी ने कुल 288 सीटों में से 141 सीटों पर विजय प्राप्त की पर बहुमत से चुक गयी। शरद पवार ने 12 निर्दलीय विधायकों से समर्थन लेकर सरकार बनायी और मुख्यमंत्री बने।

सन 1991 लोक सभा चुनाव प्रचार के समय प्रधानमंत्री ‘राजीव गाँधी’ की हत्या कर दी गयी, जिसके बाद अगले प्रधानमंत्री के तौर पर ‘नरसिंह राव’ और ‘एन. डी. तिवारी’ के साथ-साथ शरद पवार का नाम भी आने लगा। लेकिन कांग्रेस संसदीय दल ने नरसिंह राव को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया और शरद पवार रक्षा मंत्री बनाया गया।

मार्च 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ‘सुधाकर राव नायक’ के पद छोड़ने के बाद शरद पवार एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। वे 6 मार्च 1993 में मुख्यमंत्री बने, पर उसके कुछ दिनों बाद ही महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई 12 मार्च को बम धमाकों से दहल गई और सैकड़ों लोग मारे गए।

सन 1993 के बाद शरद पवार पर भ्रष्टाचार और अपराधियों से मेल-जोल के आरोप लगे। बृहन्मुंबई नगर निगम के उपयुक्त ‘जी.आर खैरनार’ ने उन पर भ्रष्टाचार और अपराधियों को बचाने के आरोप लगाये। समाजसेवी ‘अन्ना हजारे’ ने भी महाराष्ट्र वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से निकलने की मांग की और अनशन किया। विपक्ष ने भी शरद पवार पर इन मुद्दों को लेकर निशाना साधा। इन सब बातों से शरद पवार की राजनीतिक साख भी गिरी।

सन 1995 के विधान सभा चुनाव में शिव-सेना BJP गठबंधन ने कुल 138 सीटों पर विजय प्राप्त की, जबकि कांग्रेस पार्टी केवल 80 सीटें ही जीत सकी। शरद पवार को त्यागपत्र देना पड़ा और ‘मनोहर जोशी’ प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। सन 1996 के लोक सभा चुनाव तक शरद पवार राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता रहे और लोक सभा चुनाव में जीत के बाद उन्होंने विधान सभा से इस्तीफा दे दिया।

सन 1998 के मध्यावधि चुनाव में शरद पवार के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने महाराष्ट्र में 48 सीटों में से 37 सीटों पर कब्ज़ा जमाया। शरद पवार 12वीं लोक सभा में विपक्ष के नेता नियुक्त किए गए।

सन 1999 में जब 12वीं लोकसभा समाप्त कर दी गयी और चुनाव का ऐलान हुआ, तब शरद पवार, तारिक अनवर और पी.ए संगमा ने कांग्रेस के अन्दर ये आवाज़ उठाई कि कांग्रेस पार्टी का प्रधानमंत्री उम्मीदवार भारत में जन्म लेने वाला ही होना चाहिये, न कि किसी अन्य देश में। जून 1999 में ये तीनों कांग्रेस से अलग हो गए और ‘नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी’ की स्थापना की। जब सन 1999 के विधान सभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तब कांग्रेस और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने मिलकर सरकार बनायी।

सन 2004 लोक सभा चुनाव के बाद शरद पवार यू.पी.ए गठबंधन सरकार में शामिल हुए और उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया। सन 2012 में उन्होंने सन 2014 का चुनाव न लड़ने का ऐलान किया, ताकि युवा चेहरों को अवसर मिल सके।

व्यक्तिगत जीवन

शरद पवार का विवाह ‘प्रतिभा पमार’ के साथ हुआ और दंपत्ति की एक पुत्री है, जो बारामती संसदीय क्षेत्र से सांसद है। शरद पवार के भतीजे ‘अजित पवार’ भी महाराष्ट्र की राजनीति में प्रमुख स्थान रखते हैं और पूर्व में महाराष्ट्र राज्य के उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। शरद पवार के छोटे भाई ‘प्रताप पवार’ मराठी दैनिक ‘सकल’ का संचालन करते हैं।

विवादों में

शरद पवार का समय-समय पर विभिन्न विवादों में नाम आया। जमीन आवंटन विवाद, स्टाम्प पेपर घोटाले, भ्रष्टाचार और दोषियों को बचाने जैसे मामलों में शामिल होने का आरोप लगा।

खेल-कूद

  • अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के उपाध्यक्ष
  • अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष
  • महाराष्ट्र कबड्डी एसोसिएशन
  • महाराष्ट्र खो-खो एसोसिएशन
  • मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन
  • महाराष्ट्र कुश्ती एसोसिएशन
  • महाराष्ट्र ओलंपिक्स एसोसिएशन
  • भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड