शब्द-विचार | Shabd Vichaar | Word-Idea in Hindi

594

शब्द – अक्षरों के मेल से बने सार्थक समूह को शब्द कहते हैं।

जैसे – आदमी, घर, दुकान, मकान, पुस्तक, कपड़े आदि।

शब्दों के प्रकार – शब्दों को कई दृष्टिकोण से विभाजित किया गया है।

hindi Morphology 1

1) उत्पत्ति के आधार पर – ये चार प्रकार के होते हैं।

hindi Morphology 2

(क) तत्सम (संस्कृत शब्द) – संस्कृत भाषा के वे शब्द, जो बिना किसी परिवर्तन के हिन्दी में इस्तेमाल किये जाते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं।

जैसे – ग्राम, कर्म, नव, क्षेत्र, कार्य, मुख आदि।

(ख) तद्भव (बदला हुआ रूप) – समय के साथ-साथ संस्कृत भाषा के वे शब्द, जो थोड़े-बहुत बदलकर हिन्दी भाषा में प्रयोग में लाए गए, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।

जैसे – गाँव, काम, नया, आग, कान, आदि।

(ग) देशज – वे शब्द, जो देश में प्रचलित लोकभाषाओं और बोलियों के हैं, पर समय के साथ-साथ हिन्दी भाषा में घुल-मिल गए हैं, देशज शब्द कहलाते हैं।

जैसे – पगड़ी, लकड़ी, थैला, सौंठ, भात आदि।

(घ) विदेशज – वे शब्द, जो विदेशी भाषाओं जैसे अरबी, फारसी, तुर्की, पुर्तगाली, अंग्रेजी, फ्रेंच, चीनी आदि से हैं, पर हिन्दी भाषा में भी उनका प्रयोग हो रहा है, विदेशज शब्द कहलाते हैं।

जैसे – डाॅक्टर, काॅलेज, स्टेशन, टिकट आदि।

2) बनावट के आधार पर – ये तीन प्रकार के होते हैं।

hindi Morphology 3

(क) रूढ़ – वे शब्द जो अपने मूल रूप में वर्षों से एक ही अर्थ देते आ रहे हैं, रूढ़ कहलाते हैं। इन शब्दों के टुकड़े नहीं हो सकते और यदि टुकड़े किए जाएँ तो अर्थहीन हो जाते हैं।

जैसे – घर, फल, तारा, पानी आदि।

(ख) यौगिक – ऐसे शब्द जो दो सार्थक शब्दों को मिलाने से बनते हैं, यौगिक कहलाते हैं।

जैसे – पाठशाला, दीपावली, प्रधानमंत्री, महर्षि आदि।

(ग) योग रूढ़ – दो शब्दों के योग से बने वे शब्द, जो साधारण अर्थ के अलावा किसी विशेष अर्थ के लिए प्रसिद्ध हों, उन्हें योग रूढ़ शब्द कहते हैं।

जैसे – चारपाई, पंकज, दशानन, हिमालय आदि।

3) रूपान्तर के आधार पर – ये दो प्रकार के होते हैं।

hindi Morphology 4

(क) विकारी – ऐसे शब्द जिनका रूप काल, लिंग, वचन, और कारक के बदलने पर बदल जाता है, विकारी कहे जाते हैं।

(ख) अविकारी – जिन शब्दों का रूप किसी भी स्थिति में नहीं बदलता है, उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं।