सत्येन्द्रनाथ बोस की जीवनी | Satyendra Nath Bose Biography in Hindi

363

परिचय

सत्येन्द्रनाथ बोस  भारत के एक मशहूर गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री थे। भौतिक शास्त्र में 2 प्रकार के अणु (Molecules) पाए जाते हैं- पहला बोसान और दूसरा फर्मियान, बोसान का नाम सत्येन्द्रनाथ बोस के नाम पर ही रखा हुआ है।

जीवन

सत्येन्द्रनाथ बोस कलकत्ता मे 1 जनवरी 1894 को जन्में थे। उनकी शुरुआती शिक्षा अपने घर के पास के एक साधारण से स्कूल में हुई। इसके बाद इन्होंने ‘न्यू इंडियन स्कूल’ और फिर ‘हिंदू स्कूल’ में भी दाखिला लिया। स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद सत्येन्द्रनाथ बोस कोलकाता के एक मशहूर कॉलेज ‘प्रेसीडेंसी कॉलेज’ में दाखिला लिया। वे अपने कॉलेज की सभी परीक्षाओं में सबसे ज्यादा नंबर पाते रहे और अपनी कक्षा के टॉपर बने रहे। उनको देखकर लोग कहते थे कि वे एक दिन ‘पियरे साइमन’, ‘लेप्लास’ और ‘आगस्टीन लुई काउथी’ जैसे बड़े गणितज्ञ बनेंगे।

सन् 1915  में सत्येन्द्रनाथ बोस ने  गणित में एम.एस.सी. परीक्षा प्रथम स्थान ग्रहण करते हुए पास की। आशुतोष मुखर्जी ने सत्येन्द्रनाथ बोस को उनकी काबिलियत और ज्ञान से खुश होकर उन्हें प्राध्यापक के पद पर नियुक्त कर दिया। उन सालों के दौरान भौतिकी के क्षेत्र में कई नई-नई खोजें हो रही थीं।

1900 में  जर्मनी के एक भौतिकशास्त्री ‘मैक्स प्लांक’ ने ‘क्वांटम सिद्धांत’ का प्रतिपादन किया। उन्होंने कहा था कि उर्जा को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जा सकता है। जर्मनी में ही अल्बर्ट आइंस्टीन ने ‘थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी’ का प्रतिपादित किया था। सत्येन्द्रनाथ बोस ने इन सभी खोजों का अध्ययन किया था। ‘बोस-आइंस्टीन स्टैटिस्टिक्’ की खोज भी सत्येन्द्रनाथ बोस और आइंस्टीन ने साथ मिलकर की थी।

“प्लांक्स लॉ एण्ड लाइट क्वांटम” नामक लेख सत्येन्द्रनाथ बोस द्वारा लिखा गया, जिसे सब पत्रिकाओं ने छापने से मनाकर दिया तो सत्येन्द्रनाथ बोस ने उसे आइंस्टीन को भेज दिया। आइंस्टीन ने उस लेख का जर्मन में अनुवाद किया और प्रकाशित करा दिया। उस लेख की वजह से सत्येन्द्रनाथ बोस बहुत मशहूर हो गए। सत्येन्द्रनाथ बोस जब यूरोप यात्रा कर रहे थे, तब वे अल्बर्ट आइंस्टीन से भी मिले। साल 1926 में सत्येन्द्रनाथ बोस भारत वापस आ गए और ढाका विश्वविद्यालय में काम करने लगे, सत्येन्द्रनाथ बोस ने वहाँ साल 1950 तक काम किया और उसके बाद वे  शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति बन गए।

पुरस्कार व सम्मान

सत्येन्द्रनाथ बोस को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए के. बनर्जी ने सन् 1956 में, डी.एस. कोठारी ने सन् 1959 में और एस.एन. बागची ने सन् 1962 में ‘बोस-आइंस्टीन’ के आंकड़ों और एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत में उनके योगदान के लिए नामांकित किया था। हालांकि नोबेल पुरस्कार की समिति के एक विशेषज्ञ ने सत्येन्द्रनाथ बोस के कार्यों पर एक नजर डाली। सत्येन्द्रनाथ बोस के कार्य काफी महत्वपूर्ण थे, मगर उन्हें यह पुरस्कार के लायक नहीं लगे। सन् 1954 में इन्हें भारत सरकार की तरफ से पद्म विभूषण मिला था। 1958 में, वह रॉयल सोसाइटी के सदस्य बन गए।

जीवन घटनाचक्र

  • 1894: कोलकाता में जन्म हुआ।
  • 1915: गणित में एम.एस.सी. परीक्षा प्रथम श्रेणी में सर्वप्रथम आकर उत्तीर्ण की।
  • 1916: कोलकाता विश्वविद्यालय में फिजिक्स के प्राध्यापक के पद पर नियुक्त हुए।
  • 1921: ढाका विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में रीडर पद पर कार्य किया।
  • 1924: “प्लैंकस लॉ एण्ड लाइट क्वांटम” शोधपत्र लिखा और आइंस्टीन को भेजा।
  • 1924-1926: यूरोप दौरे पर रहे जहाँ उन्होंने क्यूरी, पौली, हाइज़ेन्बर्ग और प्लैंक जैसे वैज्ञानिकों के साथ कार्य किया।
  • 1926-1945: ढाका विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर पद पर कार्यरत हुए।
  • 1945-1956: विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर पद पर कार्यरत हुए।
  • 1956-1958: शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति रहे।
  • 1958: रॉयल सोसायटी का फैलो और राष्ट्रीय प्रोफेसर नियुक्त किया गया।
  • 1974: 4 फ़रवरी 1974 को कोलकाता में उनका निधन हो गया।

मृत्यु

4 फ़रवरी 1974 को सत्येन्द्रनाथ बोस का देहांत हो गया था। सत्येन्द्रनाथ बोस को आज भी विज्ञान के प्रति उनके योगदान के लिए याद किया जाता है।