संत या बदमाश

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शहंशाह अकबर रात के समय अपने कमरे में सोने के लिये जा रहे थे। तो सिपाही बोला……!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – ज…. ज…. जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – कहो…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – आपको इस वक्त तकलीफ देने की माफ़ी चाहता हूँ। हुजूर…..! लेकिन आप से एक जरुरी बात करनी थी।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – तो कहो… क्या बात है ?

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – हुजूर…..! मेरी भतीजी के बारे में है, उसके माता-पिता को एक डाकु ने कुछ महीने पहले मार दिया।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – हूँ…. बहुत बुरा हुआ। आगे बताओं…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – वो कहती है कि एक डाकू एक साधू के वेश में रह रहा है। वो सिर्फ 10 साल की है। हुजूर…..! पर मुझे लगता है कि वो सच बोल रही है।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – हूँ….! खैर अभी हमारे सोने का वक्त हो गया है। लेकिन कल सुबह दरबार में ले आना। हम इस पर गौर करेंगे।

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह……! आपको तकलीफ देने के लिये एक बार फिर माफ़ी चाहता हूँ।

शहंशाह अकबर दरबार में अन्य मंत्रियो एवम् बीरबल के साथ सभा में बैठे हुये थे। और बीरबल से बोले……!

शहंशाह अकबर बोले दरबार में बीरबल….. सुखदेव सिंह जी कल रात हमारे भरोसेमंद और वफादार सिपाही ने हमें अपनी एक समस्या बताई है।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – हुजूर…..! हमें बतायें, हम कैसे मदद कर सकते हैं ? और समस्या क्या है ? हुजूर…..!

शहंशाह अकबर बोले सुखदेव सिंह से – सुखदेव सिंह जी……! हमने अपनी राजधानी और इसके चारों ओर आस-पास के इलाकों के सारे डाकुओं का काम सौंपा था। उस सिपाही ने हमें बताया कि एक डाकू ने कुछ महीने पहले उसके भाई को मार डाला। बताईये, क्या आपने सारे डाकुओं को गिरफ्तार कर लिया है ?

सुखदेव सिंह बोला शहंशाह अकबर से –  हुजूर……! हम तकरीबन सबको पकड़ने में कामयाब हो गए थे। सिवाय एक डाकू के, जिसको हम नहीं पकड़ पाए। उसकी तलाश अब तक जारी है। वो शायद छुपा बैठा है, मुझे यकीन है कि हम उसे जल्द ही पकड़ लेंगे। वैसे भी पिछले तीन महीने में कोई वारदात नहीं हुई है।

शहंशाह अकबर बोले सुखदेव सिंह से – आपका मतलब है एक डाकू अभी आजाद है। हूँ.. लेकिन….!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – हुजूर….! आप समस्या बताइये, शायद् हम मदद कर सकें।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – उस सिपाही ने हमें बताया कि उसकी भतीजी ने उस डाकू को पहचान लिया है। मगर वो एक अन्धे साधू के वेश में रह रहा है। हम एक छोटी सी बच्ची का यकीन भला कैसे करें ? और फिर काफी लोग उस साधू की शक्ति में विश्वास करते हैं।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – हुजूर….! कोई भी जादूगर अपने मायाजाल से गरीब भोले-भाले लोगों को अपने चमत्कारों से लुभाता है। थोड़ी सी जानकारी मिलने पर हम सच्चाई का पता लगा सकते हैं। क्यों न हम उस सिपाही और उसकी भतीजी से मिलकर उनकी कहानी सुनें?

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हाँ…..! हम भी यही सोच रहे थे।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – सिपाही, बिलाबर सिंह और उसकी भतीजी को दरबार में पेश किया जाये।

बिलाबर सिंह और उसकी भतीजी दरबार में पेश हो जाते हैं और बोले…..!

बिलाबर सिंह और उसकी भतीजी बोले अकबर से – आदाब जहाँपनाह आदाब…..!

शहंशाह अकबर बोले बिलाबर सिंह और उसकी भतीजी से – हूँ…. अब हमें पूरी कहानी बताओ….!

बिलाबर सिंह बोले अकबर से – जहाँपनाह…..! करीब तीन महीने पहले एक डाकू मेरे भाई के घर में घुस आया। मेरे भाई और उसकी पत्नी को मार डाला। ये छोटी बच्ची उनकी बेटी है और उस हादसे की गवाह भी है। उस हादसे के बाद से भारी सदमा लगने के कारण, इसने अपनी बोलने की शक्ति खो दी।

शहंशाह अकबर बोले बिलाबर सिंह से – हूँ…. फिर क्या हुआ ?

बिलाबर सिंह बोले अकबर से – कुछ हफ्ते पहले मैंने एक अंधे साधू के बारे में सुना, जो जंगल में रहते हैं। जो लोगों में ठीक करने की शक्ति रखते हैं। काफी रोगी उनसे मिलने के बाद ठीक हो जाते और सुकून पाते। मैंने सोचा, अगर वो सचमुच अंतर्यामी हैं, तो शायद मेरी भतीजी की बोलने की शक्ति भी वापस लायेंगे। इसलिए मैं उन अन्धे साधू से मिलने गया। जैसे ही हम उनके पास पहुचे मेरी भतीजी जोर-जोर से चिल्लाने लगी। खूनी, कातिल, इसी ने मेरे माता पिता का खून किया है, कातिल, खूनी…..!

बिलाबर सिंह अपनी भतीजी को एक अन्धे साधू के पास ले जाता है। लड़की उस अन्धे साधू को देखकर उसे अपने मातापिता का खूनी और कातिल बताने लगी। उस अन्धे साधू के पास तमाम भक्त बैठे हुए थे।

और बोले….. ये लड़की क्या बोल रही है ? इसे चुप कराओ……?

 बिलाबर सिंह बोला अन्धे साधू के भक्तों से – ये तो चमत्कार हो गया। अपने माँ-बाप के मरने के बाद तो इन्होंने महीनों तक एक शब्द भी नहीं कहा- साधू महाराज की कृपा से इसकी आवाज वापस आ गई है।

बिलाबर सिंह की भतीजी बोली साधू और उनके भक्तों से – नहीं…. नहीं….. ये कातिल है, मैं ये चेहरा कभी नहीं भूल सकती। ये कोई साधू नहीं है, ये खूनी है।

अन्धे साधू के भक्त बोले बिलाबर सिंह से – तुम इसका मुंह बंद करवाओ….! ये हमारे साधू महाराज की बेज्जती कर रही है। जिससे इसकी आवाज लौट आई है।

अन्धे साधू महाराज बोले अपने भक्तों से – नहीं… नहीं… रहने दीजिये। ये एक छोटी बच्ची है, काफी सदमे में है।

बिलाबर सिंह बोले अपनी भतीजी से – तुम्हें साधू महाराज के बारे में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिये। उन्होंने तुम्हारी आवाज वापस लौटाई है।

बिलाबर सिंह की भतीजी बोली बिलाबर सिंह से – ये साधू नहीं, खूनी है।

साधू महाराज बोले बिलाबर सिंह से – तुम इसे यहाँ से ले जाओ…..! वर्ना में इसकी बोलने की शक्ति वापस ले लुंगा।

बिलाबर सिंह बोले साधू महाराज से – इसे माफ़ कर दीजिये साधू महाराज…..! ये नहीं जानती, ये क्या बोल रही है ?

बिलाबर सिंह बोले अपनी भतीजी से – चलो यहाँ से…..! इससे पहले तुम अपनी आवाज फिर से खो दो….!

इसी तरह बिलाबर सिंह ने दरबार में शहंशाह अकबर और बीरबल को अपनी बात बताई और बिलाबर सिंह बोले…..!

बिलाबर सिंह बोले अकबर से – जहाँपनाह…..! मैं इसे घर ले गया। पर ये अभी ज़िद कर रही है कि वो वही चेहरा था और ये सच बोल रही है। मुझे भी यकीन हो गया है हुजूर…..! पर हमारे पास कोई साबूत ही नहीं है।

शहंशाह अकबर बोले बिलाबर सिंह से – हूँ…..! लेकिन ये कैसे साबित होगा ? कि ये अन्धा साधू एक ढोंगी है।

बीरबल बोले अकबर से – हुजूर…..! हम पता लगा सकते हैं कि ये आदमी सही में एक साधू है या फिर एक ढोंगी है। क्या मैं आपसे एक बात कर सकता हूँ ?

बीरबल ने शहंशाह अकबर को एक सलाह दी और शहंशाह बोले……!

शहंशाह अकबर बोले बिलाबर सिंह से – हूँ…..! ठीक है, हम कल खुद जाकर उस साधू से मिलेंगे।

शहंशाह अकबर अपनी सभा बंद करके चले जाते हैं और दरबार में अन्य मंत्री बोले शहंशाह अकबर जिंदाबाद…..! के नारे लगाने लगे।

अगले दिन सुबह शहंशाह अकबर अन्य मंत्रियों के साथ खुद जाकर उस अन्धे साधू से मिलने पहुंचे। उस अन्धे साधू के पास बैठे भक्त शहंशाह अकबर को देखकर बोले…..! शहंशाह अकबर जिंदाबाद…..! के नारे लगाने लगे।

शहंशाह अकबर बोले अन्धे साधू महाराज से – प्रणाम साधू महाराज……!

अन्धा साधू बोला शहंशाह अकबर से – आओ बेटा……..!

शहंशाह अकबर बोले अन्धे साधू महाराज से – हमने आपकी शक्ति और चमत्कारों के बारे में इतना कुछ सुना है, कि हमें आना पड़ा ?

अन्धा साधू बोला शहंशाह अकबर से – ओ… ये तो विश्वास की बात है। ऊपर वाले की शक्तियों में विश्वास रखो और कुछ भी हो सकता है।

शहंशाह अकबर बोले अन्धे साधू महाराज से – ये आपका बड़प्पन है साधू महाराज……! हम कुछ प्रसाद चढ़ाने आये हैं और आपका आशीर्वाद चाहते हैं।

अन्धा साधू बोला शहंशाह अकबर से – हमारा आशीर्वाद तो तुम्हारे साथ है।

तभी बीरबल तलवार लेकर बिलाबर सिंह और उसकी भतीजी के साथ उस अन्धे साधू महाराज के पास गये और बीरबल बोले……!

बीरबल बोले अन्धे साधू को देखकर ओ यही है वो बेईमान, खूनी, मैं अभी इसका सर काट दुंगा। कातिल दरिंदा कहीं का……!

ढोंगी अन्धा साधू बीरबल के हाथ में तलवार देखकर घबराने लगा और बीरबल ने उसे मारने के लिये तलवार चलाई, तो अन्धे साधू ने अपने बेंत से बीरबल की तलवार को रोका…..!

शहंशाह अकबर बोले अन्धे साधू का गले बान पकड़कर – तो तुम अन्धे हो….!

शहंशाह अकबर बोले सिपाहियों से – सिपाहियों….! इस नकली साधू को गिरफ्तार कर लो।

शहंशाह अकबर बोले नकली अन्धे साधू से – तुमने इस मासूम बच्ची को अनाथ कर दिया और लोगों के विश्वास और भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। इसके लिये हम तुम्हें मौत की सजा सुनाते हैं।

शहंशाह अकबर बोले सिपाहियों से – ले जाओ…..! इस आदमी को…..!

शहंशाह अकबर के दो सिपाही ढोंगी अन्धे साधू को बंदी बनाकर ले गये मौत की सजा देने…..!

शहंशाह अकबर बोले बिलाबर सिंह की भतीजी से – तुमने निर्भय होकर बहादुरी से सच्चाई का साथ दिया है मेरी बच्ची…..! इसके लिये तुम्हें इनाम दिया जायेगा।

सिपाही बिलाबर सिंह की भतीजी बोली शहंशाह अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह……!

सिपाही बिलाबर सिंह बोले शहंशाह अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही बिलाबर सिंह से – शुक्रिया अदा करो बीरबल का….! उसी के कारण इस ढोंगी साधू की असलियत सामने आई।

बीरबल बोले अकबर से – ओ… ये आसान था हुजूर….! कोई भी स्वाभाविक रूप से खतरे में अपनी सुरक्षा अवश्य करेगा। अगर वो सच में अन्धा नहीं हो तो, इसलिये पकड़ा गया।

सिपाही बिलाबर सिंह की भतीजी बोली बीरबल से – शुक्रिया राजा बीरबल……!