परिचय

भारत के धनी मंदिरों में साईं बाबा मंदिर का नाम शामिल है। इस मंदिर की संपत्ति और आय दोनों ही करोड़ों में है। साईं बाबा मंदिर के पास लगभग 32 करोड़ की चाँदी के जवाहरात और 6 लाख के चादीं के सिक्के हैं। हर साल लगभग 350 करोड़ का चढ़ावा मंदिर में आता है।

साईं बाबा मंदिर | Sai Baba Mandir | Sai Baba Temple in Hindi

साईं बाबा एक प्रसिद्ध भारतीय धार्मिक गुरु थे, जिन्हें उनके भक्तों द्वारा संत फ़कीरऔर सतगुरु भी कहा जाता है। हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के भक्त उनकी पूजा करते हैं। साईं बाबा का लगाव किसी एक समाज से नहीं था, बल्कि उन्होंने एक सच्चे सद्गुरु को अपने आप में समर्पित माना था। भक्त उन्हें भगवान का रूप ही मानते थे और दूर-दूर तक लोग उन्हें जानते थे। उनका खास उद्देश्य स्वंय को खुद का अनुभव दिलाना था। साईं बाबा अपने भक्तों को भगवान की भक्ति और शिक्षा का पाठ पढ़ाते थे। उन्होंने लोगों को भेदभाव करने से भी माना किया। साईं बाबा दोनों समूहों के लोगों को धर्म का ज्ञान बांटते थे। साईं बाबा ने मस्जिद को हिन्दू नाम ‘द्वारकामाई’ दिया था। जिस मस्जिद में पहले डेरा बाबा ने डाला था, उसी मस्जिद को अब ‘द्वारकामाई’ के नाम से जाना जाता है।

जन्म

शिर्डी के साईं बाबा का जन्म 28 सितम्बर सन. 1835 में हुआ था। इनका असली नाम आज तक कोई भी नही जान सका। जब इनके बारे में पूछा जाता तो ये हमेशा गलत जबाब देते थे। भारत के पश्चिमी भाग में स्थित महाराष्ट्र राज्य में शिर्डी नामक एक ग्राम है, जहां “साईं” नाम साईं बाबा को शिर्डी में आने पर दिया था। “साईं” शब्द धर्म सम्बंधी भिक्षु से जुड़ा हुआ है। भारतीय और मध्य पूर्व भाषाओं में ‘बाबा’ शब्द से भी सम्बोदित किया गया था। साईं बाबा को लोग एक स्वच्छ और धर्मशील पिता मानते थे।

प्रांभिक जीवन

साईं बाबा जब 16 वर्ष के थे, तभी ब्रिटिश भारत के महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर जिले के शिर्डी गाँव में आए थे। उस समय बाबा एक सन्यासी के भेष बनाकर जीवन व्यतीत कर रहे थे। वे नीम के पेड़ के नीचे आसन लगाकर भगवान की भक्ति में समाये हुए थे। गाँव के लोगों ने उस लड़के को लगातार भजन ध्यान में देखा तो वे आश्चयर्यचकित हुए, क्योंकि सर्दी हो या गर्मी इस से उनके शरीर पर कोई फर्क नही पढ़ता था। चाहे दिन हो या रात उन्हें किसी से भय नहीं था। उनसे अनेक धर्म के व्यक्ति मिलने आते थे। कुछ लोग उन्हें पागल मानते थे, तो कुछ लोग उनके ऊपर ईट-पत्थर फेंकते थे, कुछ समय के बाद बाबा ने गाँव छोड़ दिया।

शिर्डी में वापसी

साईं बाबा सन. 1858 में वापस शिर्डी आए थे। उन्होंने अलग प्रकार के वस्त्र पहन रखे थे, घुटनों तक सफेद रंग का गमछा और सिर पर कपड़े से बनी हुई टोपी पहन रखी थी। कपड़ों के साथ-साथ बाल भी बहुत धने और लम्बे थे। साईं बाबा बहुत लम्बे समय के बाद शिर्डी वापस आए थे, तो लोगों को उनका एक नया रूप देखने को मिला। साईं बाबा के पहनावे के अनुसार वे एक मुस्लिम फ़क़ीर लग रहे थे।

शिर्डी वापस आने के बाद चार या पांच साल तक एक नीम के पेड़ के नीचे ही रहते थे और शिर्डी के घने जंगलो में लम्बे समय के लिए निकल जाते थे। अपने ध्यान में व्यस्त होते हुए वे किसी की बात नहीं सुनते थे। कुछ दिनों पश्चात शिर्डी के लोगों ने उन्हें एक पुरानी मस्जिद में रहने के लिए कहा और उस मस्जिद में लोग भीख मांगकर रहते थे। मस्जिद में साईं बाबा से मिलने के लिए लोग बहुत दूर-दूर से आया करते थे। मस्जिद में एक पवित्र आग भी जलती थी, उसे धुनी का नाम दिया गया है। उस धुनी के अंदर अद्भुत चमत्कारिक शक्ति थी, साईं बाबा अपने भक्तों को विभूति देते थे। साईं बाबा के द्वारा दी गई विभूति में शक्ति होती थी।

साईं बाबा संत होने के साथ-साथ एक हकीम भी माने जाते थे और बीमार लोगों को अपनी धुनी से निकली विभूति को दवा के रूप मे बीमार व्यक्तियों को देते थे। साईं बाबा अपने भक्तों को धर्म का पाठ सिखाते थे, हिन्दुओं को रामायण व भगवद गीता और मुस्लिम भक्तों को कुरान पढ़ाया करते थे। सन. 1910 के बाद साईं बाबा मंदिर मुंबई तक विख्यात हो गया, बहुत अधिक सख्या में लोग इनके दर्शन के लिए शिर्डी आते रहे, क्योंकि इन्हें लोग चमत्कारी बाबा मानने लगे, इसके बाद पहला मंदिर गाँव वालों ने भिवपुरी, कर्जत में बनवाया था।

मृत्यु

साईं बाबा की मृत्यु 15 अक्टूबर सन. 1918 को दशहरा के दिन हुई। अपनी मृत्यु के संकेत साईं बाबा ने पहले ही दे दिये थे। उन्होंने कहा था कि दशहरा का दिन ही धरती से विदा होने का सबसे अच्छा दिन होगा।

मंदिरों की तालिका-

क्र. सं.मंदिर का नाममंदिर का स्थानदेवी / देवता का नाम
1बांके बिहारी मंदिरमथुरा-वृन्दावन, उत्तर प्रदेशबांके बिहारी (श्री कृष्ण)
2भोजेश्वर मंदिरभोपाल, मध्यप्रदेशभगवान शिव
3दाऊजी मंदिरबलदेव, मथुरा, उत्तर प्रदेशभगवान बलराम
4द्वारकाधीश मंदिरमथुरा, उत्तर प्रदेशश्री कृष्ण
5गोवर्धन पर्वतगोवर्धन, मथुरा, उत्तर प्रदेशश्री कृष्ण
6इस्कॉन मंदिरमथुरा-वृन्दावन, उत्तर प्रदेशश्री कृष्ण, भगवान बलराम
7काल भैरव मंदिरभैरवगढ़, उज्जैन, मध्यप्रदेशभगवान काल भैरव
8केदारनाथ मंदिररुद्रप्रयाग, उत्तराखण्डभगवान शिव
9महाकालेश्वर मंदिरजयसिंहपुरा, उज्जैन, मध्यप्रदेशभगवान शिव
10नन्द जी मंदिरनन्दगाँव, मथुरानन्द बाबा
11निधिवन मंदिरमथुरा-वृन्दावन, उत्तर प्रदेशश्री कृष्ण, राधा रानी
12ओमकारेश्वर मंदिरखंडवा, मध्यप्रदेशभगवान शिव
13प्रेम मंदिरमथुरा-वृन्दावन, उत्तर प्रदेशश्री कृष्ण, राधा रानी
14राधा रानी मंदिरबरसाना, मथुरा, उत्तर प्रदेशश्री कृष्ण, राधा रानी
15श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिरमथुरा, उत्तर प्रदेशश्री कृष्ण, राधा रानी
16बृजेश्वरी देवी मंदिरनगरकोट, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेशमाँ ब्रजेश्वरी
17चामुंडा देवी मंदिरकांगड़ा, हिमाचल प्रदेशमाँ काली
18चिंतपूर्णी मंदिरऊना, हिमाचल प्रदेशचिंतपूर्णी देवी
19ज्वालामुखी मंदिरकांगड़ा, हिमाचल प्रदेशज्वाला देवी
20नैना देवी मंदिरबिलासपुर, हिमाचल प्रदेशनैना देवी
21बाबा बालकनाथ मंदिरहमीरपुर, हिमाचल प्रदेशबाबा बालकनाथ
22बिजली महादेव मंदिरकुल्लू, हिमाचल प्रदेशभगवान शिव
23साईं बाबा मंदिरशिर्डी, महाराष्ट्रसाईं बाबा
24कैला देवी मंदिरकरौली, राजस्थानकैला देवी (माँ दुर्गा की अवतार)
25ब्रह्माजी का मंदिरपुष्कर, राजस्थानब्रह्माजी
26बिरला मंदिरदिल्लीभगवान विष्णु, माता लक्ष्मी देवी
27वैष्णों देवी मंदिरकटरा, जम्मूमाता वैष्णो देवी
28तिरुपति बालाजी मंदिरतिरुपति, आंध्रप्रदेशभगवान विष्णु
29सोमनाथ मंदिरवेरावल, गुजरातभगवान शिव
30सिद्धिविनायक मंदिरमुंबई, महाराष्ट्रश्री गणेश
31पद्मनाभस्वामी मंदिर(त्रिवेन्द्रम) तिरुवनंतपुरम्, केरलभगवान विष्णु
32मीनाक्षी अम्मन मंदिरमदुरै या मदुरई, तमिलनाडुमाता पार्वती देवी
33काशी विश्वनाथ मंदिरवाराणसी, उत्तर प्रदेशभगवान शिव
34जगन्नाथ मंदिरपुरी, उड़ीसाश्री कृष्ण, बलराम और सुभद्रा
35गुरुवायुर मंदिरगुरुवायुर, त्रिशूर, केरलश्री कृष्ण
36कन्याकुमारी मंदिरकन्याकुमारी, तमिलनाडुमाँ भगवती
37अक्षरधाम मंदिरदिल्लीभगवान विष्णु