एस.एल. किर्लोस्कर की जीवनी | S. L. Kirloskar Biography in Hindi

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परिचय

शंतनुराव लक्ष्मणराव किर्लोस्कर एक मशहूर भारतीय उद्योगपति थे। उनके पिता और चाचा ने साइकिल का एक छोटा-सा व्यापार प्रारम्भ किया था, परन्तु एस.एल. किर्लोस्कर ने अपनी मेहनत और बुद्धिमानी से समूह के व्यापार को बहुत आगे बढ़ाया। आज के समय में होटल और परामर्श सेवाओं से लेकर इंजन, मशीन उपकरण, बिजली की मोटर और ट्रैक्टर के व्यापार में भी किर्लोस्कर समूह स्थापित हो चुका है। एस.एल. किर्लोस्कर ने अपने कुशल नेतृत्व में ‘किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड’ का नाम पूरे देश में मशहूर कर दिया।

शुरूआती जीवन

एस.एल. किर्लोस्कर का जन्म महाराष्ट्र राज्य के शोलापुर शहर में 28 मई 1903 को हुआ था। उनका जन्म बंबई प्रेसीडेंसी के दक्षिणी भाग में बसे हुए, किर्लोस्कर के कर्हदे ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘लक्ष्मणराव किर्लोस्कर’ तथा माता का नाम ‘राधाबाई’ था। एस.एल. किर्लोस्कर अपने माता-पिता के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके बाद छोटे भाइयों राजाराम, प्रभाकर, रविन्द्र और बहन प्रभावती का जन्म हुआ। उनके पिता और उनके चाचा ‘रामचंद्रराव’ ने 10 मार्च 1910 को किर्लोस्कर समूह की स्थापना की। कंपनी ने कर्नाटक के बेलगाम से साइकिल का व्यापार प्रारम्भ किया। एस.एल. किर्लोस्कर की शुरूआती पढ़ाई औंध में हुई और उसके बाद की पढ़ाई पूना के न्यू इंग्लिश स्कूल से की। इसके बाद सन 1922 में वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए MIT (Massachusetts Institute of Technology) अमेरिका चले गए।

करियर

MIT (Massachusetts Institute of Technology) अमेरिका से पढ़ाई पूरी के बाद वो सन 1926 में भारत वापस आ गये। यहाँ किर्लोस्कर ब्रदर्स पहले से ही कंपनी को स्थापित करने में लगे हुए थे। एस.एल. किर्लोस्कर के भारत वापस आने के बाद अपनी कंपनी के कारोबार को बढ़ाने के लिए तेज़ी से लग गये। इसके बाद कंपनी डीजल इंजन, पंप, इलेक्ट्रिक मोटर और इंजीनियरिंग उपकरणों के निर्माण भी करने लगी। अपनी सोच और दूरदृष्टि से एस.एल. किर्लोस्कर ने पारिवारिक व्यापार को देश की बड़ी कंपनियों में से एक बना दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किर्लोस्कर समूह एस.एल. किर्लोस्कर के नेतृत्व में बहुत तेज़ी से विकसित हुआ और कंपनी का विस्तार पहले देश में और फिर विदेशों में हुआ। उन्होंने बैंगलोर में किर्लोस्कर इलेक्ट्रिक कंपनी और पुणे में किर्लोस्कर आयल एन्जींस लिमिटेड की सन 1946 में स्थापना की। आज़ादी के बाद देश में ही डीजल इंजन के विकास का श्रेय उन्ही को जाता है।

एस.एल. किर्लोस्कर ने एक ऐसा औद्योगिक साम्राज्य स्थापित कर दिया जिसके विकास की गति अविश्वसनीय रही। सन 1950 से लेकर 1991 तक समूह की संपत्ति में 32,401% की वृद्धि हुई, जो अविश्वसनीय है। वर्तमान समय में किर्लोस्कर समूह भारत का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग समूह है। एस.एल. किर्लोस्कर ने किर्लोस्कर ग्रुप के अन्दर कई कंपनियों की स्थापना की। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं- किर्लोस्कर आयल इंजन, किर्लोस्कर फेरस इंडस्ट्रीज, किर्लोस्कर नयूमेटिक कंपनी, किर्लोस्कर इबारा पम्पस लिमिटेड, किर्लोस्कर कंस्ट्रक्शन एंड इंजिनिअर्स लिमिटेड, एसपीपी पम्पस लिमिटेड एंड गोंडवाना इंजिनिअर्स लिमिटेड।

निजी जीवन

एस.एल. किर्लोस्कर की शादी ‘रंगनाथ पाठक’ की बेटी ‘यमुना’ के साथ हुई थी। शादी के बाद उनके दो पुत्र हुए– ‘चंद्रकांत किर्लोस्कर’ और ‘श्रीकांत किर्लोस्कर’। एस.एल. किर्लोस्कर का देहांत दिल का दौरा पड़ने के कारण पुणे के एक अस्पताल में 24 अप्रैल 1994 को हुआ। उस समय वो 90 वर्ष के थे।

अवार्ड एवं सम्मान

  • देश की अर्थव्यवस्था में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा सन 1965 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया।
  • 26 फरवरी 2003 में एस.एल. किर्लोस्कर की जन्म शताब्दी के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री ‘अटल बिहारी वाजपेयी’ द्वारा उनके नाम पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया।

जीवन घटनाक्रम

  • एस.एल. किर्लोस्कर का जन्म सन 1903 महाराष्ट्र के शोलापुर में हुआ।
  • सन 1922 मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) पढने के अमेरिका गए।
  • मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सन 1926 में भारत वापस लौटे।
  • सन 1946 में बंगलौर में किर्लोस्कर ऑयल इंजन लिमिटेड और पुणे में किर्लोस्कर इलेक्ट्रिक कंपनी लिमिटेड स्थापित की।
  • सन 1965 में भारत सरकार द्वारा ‘पद्म भूषण’ प्रदान किया गया।
  • सन 1988 में किर्लोस्कर समूह के 100 साल पूरे होने के अवसर पर स्मारक डाक टिकट जारी किया।
  • 24 अप्रैल 1994 को पुणे में इनका देहांत हो गया।