परिचय

रणथंभोर का किला राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। रणथंभोर का किला सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से 13 किलोमीटर दूर रन और थंभ नाम की पहाडियों के बीच समुद्रतल से लगभग 482 मीटर ऊँचाई पर 12 किलोमीटर की परिधि में बना एक दुर्ग है। किले के तीनों ओर पहाडों की प्राकृतिक खाई बनी है, जो इस किले की सुरक्षा को मजबूत कर अजेय बनाती है। अपनी प्राकृतिक बनावट के कारण यह काफी प्रसिद्ध है। इस किले का निर्माण कब हुआ कहा नहीं जा सकता, लेकिन ज्यादातर इतिहासकार इस किले का निर्माण चौहान राजा रणथंबन देव के द्वारा सन. 944 में निर्मित मानते हैं। रणथंभोर किले का अधिकांश निर्माण कार्य चौहान राजाओं के शासन काल में हुआ है। दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान के समय भी यह किला मौजूद था और चौहानों के ही नियंत्रण में था। यह एक दुर्जेय किला है, जो राजस्थान के केंद्र में स्थित है। रणथंभोर किला चौहान साम्राज्य के हम्मीर देव की बहादुरी और वर्चस्व के लिये जाना जाता है।

रणथंभोर किला | Ranthambore Qila | Ranthambore Fort in Hindi

निर्माण कार्य

राजस्थान के इतिहास में कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा रणथंभोर क़िले के निर्माण का समय एवं निर्माता के बारे में निश्चित जानकारी नहीं है। इतिहास में सर्वप्रथम इस क़िले पर चौहानों के आधिपत्य का ही उल्लेख मिलता है। यह सम्भव है कि चौहान शासक रणथंबन देव ने इसका निर्माण करवाया हो। चौहान शासकों ने इस किले में अनेक देवालय, सरोवर तथा भवन का निर्माण करवाया था। चित्तौड़ के गुहिल शासकों ने भी इसमें कई भवन बनवाये। मुस्लिम शासकों ने कई भव्य देवालयों को नष्ट कर दिया। वर्तमान में क़िले में मौजूद नौलखा दरवाजा, दिल्ली दरवाज़ा, तोरणद्वार, हम्मीर के पिता जेतसिंह की छतरी, पुष्पवाटिका, गणेश मन्दिर, गुप्त गंगा, बादल महल, हम्मीर कचहरी, जैन मन्दिर आदि का ऐतिहासिक महत्त्व है। किले में आकर्षित करने वाले कलात्मक भवन अब नही हैं, फिर भी शेष बचे हुए भवनों की सुद्रढ़ता, विशालता तथा उनकी घाटियों की सुन्दरता दर्शकों को अपनी ओर आकृष्ट करती है।

इतिहास

इसका प्राचीन नाम रणस्तंभ और रणस्तंभपुर था। प्राचीन समय में 12वीं शताब्दी में यह चौहान साम्राज्य के पृथ्वीराज प्रथम के साम्राज्य के जैन धर्म से जुड़ा हुआ था। 12वीं शताब्दी में रहने वाली सिद्धसेन सुरी ने इसे जैन धर्म के पवित्र और प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक बताया था। मुग़ल समय में किले में मल्लिनाथ का मंदिर बनवाया गया था। 12वीं शताब्दी में पृथ्वीराज चौहान के शासन करने से पहले यादव इस किले पर शासन करते थे। भारतीय आर्कियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार ऐसा दर्शाया जाता है कि रणथंभोर किले में प्रवेश द्वारा पर पहले हरजाना लिया जाता था।

दिल्ली के सुल्तान इल्तुमिश ने सन. 1226 में रणथंभोर किले पर कब्ज़ा कर लिया था। सन. 1236 में इल्तुमिश की मृत्यु के बाद चौहान ने इसे पुनः हासिल कर लिया था। इसके बाद सुल्तान नासिर उद्दीन महमूद की सेना को बाद में सुल्तान बलबन ने सँभाला, लेकिन सन. 1248 और सन. 1253 में उन्हें कई किले मुहासिर करने पड़े थे। सन. 1259 में उन्होंने जैतसिंह चौहान से उन्हें दोबारा हासिल कर लिया था।

सन. 1283 में शक्तिदेव ही जैतसिंह का उत्तराधिकारी बना और उसने रणथंभोर और अपना विशाल साम्राज्य दोबारा हासिल किया। इसके बाद सुल्तान जलाल उद्दीन फिरोज खिलजी ने सन. 1290 से 91 तक सभी किलों को मुहासिर करा दिया था। सन. 1299 में हम्मीर देव चौहान, अलाउद्दीन खिलजी के रिबेल जनरल मुहम्मद शाह के पास आश्रय के लिये रुका था। और अपने साम्राज्य को सुल्तान को देने से मना कर दिया।

मेवाड़ के तहत किलों को राणा हम्मीर सिंह और राणा कुम्भ ने हासिल किया था। राणा कुम्भ के शासनकाल के बाद उनका उत्तराधिकारी राणा उदय सिंह बना। जिसके बाद गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने सन. 1532 से सन. 1535 तक किलों को हथिया लिया था। इसके बाद सन. 1569 में मुग़ल सम्राट अकबर ने किले पर अपना अधिकार जमा लिया था।

इसके बाद रणथंभोर किला 17वीं शताब्दी में जयपुर के महाराजा कचवाह के हाथ में गया और यह भारतीय स्वतंत्रता तक जयपुर का ही एक हिस्सा बना रहा। रणथंभोर किला जिस स्थान पर बना है, वहाँ पर पहले शाही लोग शिकार करते थे। सन. 1949 में जयपुर को भारत के राजस्थान राज्य का हिस्सा बनाया गया था।

रणथंभोर किले के अंदर तीन हिन्दू मंदिर हैं, जिनमें गणेश, शिव और रामलालजी के मंदिर है, जिनका निर्माण 12वीं और 13वीं शताब्दी में लाल करौली पत्थर से किया गया था। किले में जैन भगवान सुमतिनाथ और भगवान संभवनाथ का मंदिर है।

समय

रणथंभोर किले को देखने का समय सुबह 9 बजे से शाम को 6 बजे तक है। रणथंभोर किले में भारतीय नागरिकों के लिए 30 रुपये व छात्रों के लिए 15 रुपये का टिकट है। विदेशी नागरिकों के लिए 250 रुपये का टिकट है।

किलों की तालिका

क्र संकिले का नामनिर्माण वर्षनिर्माणकर्तास्थान
1लक्ष्मणगढ़ किलासन. 1862 राजा लक्ष्मण सिंहसीकर, राजस्थान
2गागरोन किला12वीं शताब्दीराजा बीजलदेवझालावाड, राजस्थान
3मदन महल किलासन. 1100राजा मदन सिंहजबलपुर, मध्य प्रदेश
4ग्वालियर किला14 वीं सदीराजा मानसिंह तोमरग्वालियर, मध्य प्रदेश
5रणथंभोर किलासन. 944चौहान राजा रणथंबन देवसवाई माधोपुर, राजस्थान
6जूनागढ़ किलासन. 1594राजा रायसिंहबीकानेर, राजस्थान
7मेहरानगढ़ किलासन. 1459राव जोधाजोधपुर, राजस्थान
8लोहागढ़ किलासन. 1733महाराजा सूरजमल भरतपुर, राजस्थान
9कुम्भलगढ़ किलासन. 1458राजा महाराणा कुम्भाराजसमन्द, राजस्थान
10भानगढ़ किलासन. 1573राजा भगवंत दासअलवर, राजस्थान
11आगरा किलासन. 1565अकबरआगरा, उत्तर प्रदेश
12लाल किलासन. 1648शाहजहाँदिल्ली
13पुराना किला16 वीं शताब्दीशेरशाह सूरीदिल्ली