राजेश खन्ना की जीवनी | Rajesh Khanna Biography in Hindi

365

परिचय

राजेश खन्ना भारतीय बॉलीवुड के एक्टर, प्रोडयूसर और डायरेक्टर थे। राजेश खन्ना का वास्तविक नाम जतिन खन्ना था। फ़िल्मी इंडस्ट्री में राजेश को प्यार से “काका” कहकर पुकारा जाता था। राजेश खन्ना वह स्टार हैं, जिनको भारतीय सिनेमा के प्रथम सुपरस्टार के रूप में जाना जाता है। राजेश खन्ना ने सन. 1969-1971 के समयांतराल में अलग-अलग निरंतर 15 हिट फिल्मों में अभिनय किया और एक कभी ना टूटने वाला रिकॉर्ड बनाया।

जन्म

भारतीय बॉलीवुड के प्रथम सुपरस्टार राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसम्बर सन. 1942 को पंजाब राज्य के अमृतसर जिले में हुआ था। इनका पालन-पोषण लीलावती चुन्नीलाल खन्ना ने किया था। लीलावती खन्ना,जो राजेश खन्ना के जैविक माता-पिता के रिश्तेदार थे, उन्होंने राजेश खन्ना को गोद ले लिया। राजेश खन्ना के जैविक माता-पिता लाला हीरानन्द और चन्द्राणी खन्ना थे, जो पूर्व विभाजन वाले पाकिस्तान से आकर अमृतसर में रहने लगे।

शिक्षा

राजेश खन्ना ने मुंबई में स्थित गिरगाँव के सेंट सेबेस्टियन हाई स्कूल में एडमिशन लिया। जहाँ राजेश के क्लासफेलो रवि कपूर थे, जो आगे चलकर हिन्दी फिल्मों में जीतेन्द्र के नाम से प्रसिद्ध हुए। शिक्षा के साथ-साथ राजेश खन्ना को नाटकों में अभिनय करना पसन्द था। राजेश ने कॉलेज के समय पर नाटकों में अभिनय किया तथा कई पुरस्कार भी जीते।

विवाह

राजेश खन्ना का विवाह सन. 1973 में बॉलीवुड अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया के साथ हुआ था। राजेश की उम्र अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से लगभग दोगुनी थी। इनके ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना नाम की दो पुत्री हैं।

फ़िल्मी कैरियर

राजेश खन्ना के फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत सन. 1966 में फिल्म “आखिरी खत” के साथ हुई, जिसे चेतन आनन्द ने निर्देशित किया था। राजेश की दूसरी फिल्म “राज” थी, जिसे रविन्द्र दावे ने निर्देशित किया था। सन. 1969 से सन. 1971 के मध्य राजेश खन्ना ने लगातार 15 हिट फिल्मों में अभिनय किया था। राजेश खन्ना की कुछ सुपरहिट फ़िल्में इस प्रकार हैं

साल फिल्म
1967 बहारो के सपने
1969 आरधना
1969 दो रास्ते
1969 बन्धन
1970 सफर
1970 सच्चा झूठा
1971 कटी पतंग
1971 आन मिलो सजना
1971 अंदाज
1971 आन्नद
1971 हाथी मेरा साथी
1972 दुश्मन
1972 अमर प्रेम
1972 दिल दौलत दुनिया
1972 जोरू का गुलाम
1972 मालिक
1972 शहजादा
1972 बाबर्ची
1972 अपना देश
1972 मेरा जीवन साथी
1973 अनुराग
1973 दाग
1973 नमक हराम
1974 अविष्कार
1974 अजनबी
1974 प्रेम नगर
1974 हम शक्ल
1974 रोटी
1974 आपकी कसम
1975 प्रेम कहानी
1976 महाचोर
1976 महबूबा
1977 त्याग
1977 पलकों की छाँव में
1977 आशिक हूँ बहारों का
1977 छलिया बाबू
1977 कर्म
1977 अनुरोध
1978 नौकरी
1978 भोला भाला
1979 जनता हवलदार
1979 मुकाबला
1979 अमर दीप
1979 प्रेम बन्धन
1980 थोड़ी सी बेबफाई
1980 आँचल
1980 फिर वही रात
1980 बंदिश
1981 कुदरत
1981 दर्द
1981 धनवान
1982 अशान्ति
1982 जानवर
1982 धर्म कांटा
1982 सुराग
1982 राजपूत
1982 नादान
1983 सौतन
1983 अगर तुम न होते
1983 अवतार
1984 नया कदम
1984 आज एम एल ए राम अवतार
1984 मकसद
1984 धर्म और कानून
1984 आवाज
1984 आशा ज्योति
1985 ऊँचे लोग
1985 नया बकरा
1985 मास्टर जी
1985 दुर्गा
1985 बेबफाई
1985 बाबू
1985 हम दोनों
1985 अलग अलग
1985 जमाना
1985 आखिर क्यों
1985 निशान
1986 शत्रु
1986 नसीहत
1986 अंगारे
1986 अनोखा रिश्ता
1986 अमृत
1987 गोरा
1987 अबारा बाप
1987 अबाम
1987 नजराना
1988 विजय
1989 पाप का अंत
1989 मैं तेरा दुश्मन
1990 स्वर्ग
1991 रुपये दस करोड़
1999 आ अब लौट चलें
2001 प्यार जिंदगी है
2002 क्या दिल ने कहा

अवार्ड्स

राजेश खन्ना को तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड और चार बार बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट अवार्ड मिले थे। राजेश खन्ना को सन. 2005 में फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड तथा सन. 2013 में मरणोपरांत पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

मृत्यु

जुलाई सन. 2011 से राजेश खन्ना का स्वास्थ बिगड़ गया था, क्योकि राजेश खन्ना को कैंसर की बिमारी थी, जिसके कारण इनको 23 जून सन. 2012 को मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। राजेश खन्ना को 8 जुलाई को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया तथा 14 जुलाई को पुनः हॉस्पिटल में भर्ती किया और 16 जुलाई को डिस्चार्ज कर दिया गया। मुंबई में अपने बंगले आशीर्वाद में 18 जुलाई सन. 2012 को राजेश खन्ना का निधन हो गया।

विले पार्ले स्थित शवदाह गृह पवन हंस में राजेश खन्ना का अंतिम संस्कार 19 जुलाई सन. 2012 को हुआ था। उनके अंतिम संस्कार में लगभग दस लाख लोग शरीक हुए थे, जिसमें देश अथवा विदेशों से भी उनके प्रशंसक शामिल हुए थे। उन लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज का सहारा का लिया था। अक्षय कुमार के सहयोग से उनके पोते आरव के द्वारा उनकी चिता को मुखाग्नि दी गयी। खन्ना के आखिरी शब्द “टाइम अप”,”पैक अप” थे।