रबीन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी | Rabindranath Tagore Biography in Hindi

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जन्म व परिवार

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। उनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ ठाकुर और उनकी माता का नाम शारदा देवी था। 1883 में उनकी शादी मृणालिनी देवी से हुई। रबीन्द्रनाथ टैगोर की माता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। उनके पिता व्यापक रूप से यात्रा करने वाले व्यक्ति थे, इसी वजह से उनका ज्यादातर लालन-पालन नौकरों ने था किया। रबीन्द्रनाथ टैगोर ने साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रकाशित किया। रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिता ने बहुत सारे अच्छे संगीतकारों को अपने घर में रहने और बच्चों को भारतीय शास्त्रीय संगीत पढ़ने के लिए आमंत्रित किया था।

रबीन्द्रनाथ टैगोर के सबसे बड़े भाई का नाम द्विजेंद्रनाथ टैगोर था जो एक कवि थे, दूसरे भाई का नाम सत्येंद्रनाथ टैगोर था जो यूरोपीय सिविल सेवा के लिए नियुक्त किये गए पहले भारतीय व्यक्ति थे, एक भाई ज्योतिरिंद्रनाथ टैगोर एक  संगीतकार व नाटककार थे और इनकी एक बहिन भी थी जिनका नाम  स्वर्णकुमारी था, वह एक उपन्यासकार थी। ज्योतिरिंद्रनाथ टैगोर की पत्नी का नाम कादंबरी देवी था। वह टैगोर से थोड़ी ही बड़ी थी और उनकी अच्छी मित्र थी, साथ ही शक्तिशाली स्वभाव वाली महिला थी। 1884 में उन्होंने अचानक से आत्महत्या कर ली, इस वजह से रबीन्द्रनाथ टैगोर और उनका परिवार कुछ समय तक काफ़ी समस्याओं में फंसा रहा।

शिक्षा

रबीन्द्रनाथ टैगोर की शुरुआती शिक्षा सेंट जेवियर स्कूल में हुई थी। उन्हें बैरिस्टर बनने की इच्छा थी, इसलिए उन्होंने 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजटोन में एक पब्लिक स्कूल में अपना दाखिला लिया था। बाद में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने  लन्दन विश्वविद्यालय में कानून की पढाई की, मगर 1880 में किसी कारण की वजह से उन्हें बिना डिग्री लिए ही वापस आना पड़ा। रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कला (ड्राइंग), विज्ञान, भूगोल, इतिहास, साहित्य, गणित, संस्कृत और अंग्रेजी को अपना सबसे पसंदीदा विषय बनाया और इनका अध्ययन किया था।

कार्य

रबीन्द्रनाथ टैगोर ज्यादातर अपनी कविताओं के लिए जाने जाते हैं। रबीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने जीवन में बहुत सारे उपन्यास, निबंध, नाटक और हजारों गाने लिखने के साथ-साथ भारत का राष्ट्रगान (बंगाली में) भी लिखा है। रबीन्द्रनाथ टैगोर की लिखी छोटी कहानियों को सबसे लोकप्रिय माना जाता है। रबीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने जीवनकाल में इतिहास, भाषा विज्ञान और आध्यात्मिकता से जुडी हुई कई किताबें लिखी थी। वह अल्बर्ट आइंस्टीन से भी मिले थे। अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ रबीन्द्रनाथ टैगोर की गहरी बातचीत “वास्तविकता की प्रकृति पर नोट” को बाद के उत्तरार्धों के एक परिशिष्ट के रूप में शामिल किया गया है। रबीन्द्रनाथ टैगोर के 150वें जन्मदिन पर उनके कार्यों का “कालनुक्रोमिक रबीन्द्र रचनावली” नाम का एक संकलन बंगाली भाषा में प्रकाशित हुआ। इसमें सभी कार्यों के संस्करण शामिल हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने 2011 में विश्व-भारती विश्वविद्यालय के साथ मिलकर अंग्रेजी में उपलब्ध रबीन्द्रनाथ टैगोर के कार्यों का सबसे बड़ा संकलन “द एसेंशियल रबीन्द्रनाथ टैगोर” को प्रकाशित करने के लिए सहयोग किया था।

शान्ति निकेतन

रबीन्द्रनाथ टैगोर को बचपन से ही प्रकृति के बीच में रहना बहुत अच्छा लगता था। वह हमेशा सोचा करते थे कि प्रकृति के बीच में रहकर ही विद्यार्थियों को अध्ययन करना चाहिए। इसी सोच को मूर्तरूप देने के लिए वह 1901 में सियालदह छोड़कर आश्रम की स्थापना करने के लिए शान्ति निकेतन आ गए। प्रकृति की गोद में पेड़ों, बगीचों और एक पुस्तकालय के साथ रबीन्द्रनाथ टैगोर ने “शान्ति निकेतन” की स्थापना की।

सम्मान

1913 में रबीन्द्रनाथ टैगोर को उनकी काव्य रचना “गीतांजलि” के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। 1915 में रबीन्द्रनाथ टैगोर को राजा जॉर्ज पंचम ने “नाइट” की पदवी देकर सम्मानित किया, उस पदवी को उन्होंने 1919 में जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध करने के लिए वापस कर दिया।

मृत्यु

रबीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु 7 अगस्त 1941 को हुई। जब उनकी मृत्यु हुई, तब उनकी उम्र 80 वर्ष थी। रबीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु गुर्दे में संक्रमण के कारण हुई थी।