कुतुब मीनार भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों में से एक हैं। अफगानिस्तान में स्थित ‘जाम की मीनार’से प्रेरित होकर दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक कुतुबुदीन ऐबक ने कुतुब मीनार का निर्माण कार्य 1192 ई. में शुरू करवाया। कुतुबुदीन ऐबक की मृत्यु के बाद दिल्ली के सुलतान बने इल्तुतमिश ने 1220 ई. में इसकी तीन मंजिलों का निर्माण करवाया। इसके बाद 1368 में फिरोजशाह तुगलक ने पांचवी और आखिरी मंजिल बनवाई। इस मीनार के निर्माण के उद्देश्य के बारे में कहा जाता है कि यह कुव्वत-उल-इस्लाममस्जिद से अजान देने, निरीक्षण करने या इस्लाम की दिल्ली पर विजय के प्रतीक रूप में बनी। कुतुब मीनार का इतिहास लगभग 800 साल पुराना है। यह भारत के दक्षिण दिल्ली शहर के महरौली में स्थित है। यह ईंटों से बनी विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। कुतुबमीनार के आधार का व्यास 14.3 मीटर, शीर्ष का व्यास 2.7 मीटर और ऊँचाई 72.5 मीटर है। इसमें 379 सीढ़ियाँ हैं। इस मीनार को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है, जिस पर कुरान की आयतों और फूल बेलों की महीन नक्काशी की गई है। कुतुब मीनार ढिल्लिका के प्राचीन किले तालकोट के अवशेषों पर बनी है। ढिल्लिका अन्तिम हिन्दू राजाओं तोमर और चैहान की राजधानी थी। कुतुब मीनार परिसर में भारत की पहली कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, अलई दरवाजा, इल्तुतमिश का मकबरा और लौह स्तंभ भी बना हुआ है। कुतुब मीनार को UNESCO ने सन् 1993 में World Heritage Site घोषित किया है।