प्यासी चींटी और कबूतर | Pyasi Chiti Aur Kabootar in Hindi

1952

एक समय की बात है, गर्मियों के दिनों में एक चींटी बहुत प्यासी थी और वो अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश कर रही थी। इधर-उधर  पानी तलाश करने के बाद वह एक नदी के पास पहुंची, लेकिन पानी पीने के लिए वह सीधे नदी में नहीं जा सकती थी। वह एक छोटे से पत्थर के ऊपर चढ़ गई लेकिन जैसे ही उसने पानी पीने की कोशिश की, वह नदी में जा गिरी। उसी नदी के किनारे एक पेड़ था, जिसकी टहनी पर एक कबूतर बैठा था, उसने चींटी को पानी में गिरते हुए देख लिया।

कबूतर को चींटी पर रहम आया और उसने चींटी को बचाने की कोशिश की। कबूतर ने तेजी से एक पत्ता तोड़कर नदी में संघर्ष कर रही चींटी के पास फेंक दिया। चींटी उस पत्ते के पास पहुंची और उस पत्ते पर चढ़ गयी। थोड़ी देर बाद पत्ता तैरता हुआ नदी के किनारे आ गया, चींटी पत्ते से उतर कर जमीन पर नीचे आ गई। चींटी ने पेड़ की तरफ देखा, उसे पेड़ पर एक कबूतर दिखाई दिया। चींटी ने कबूतर को जान बचाने के लिए धन्यवाद बोला।

इस घटना के कुछ दिनों बाद एक शिकारी उस नदी किनारे पहुंचा। उस कबूतर के घोंसले के पास ही उसने जाल बिछा दिया और उसमें दाना डाल दिया। शिकारी थोड़ी दूर जाकर छुप गया और उम्मीद करने लगा कि वह कबूतर को पकड़ लेगा। कबूतर ने जैसे ही जमीन में दाना देखा, वह उसे खाने के लिए नीचे आया और शिकारी के जाल में फंस गया।

वो चींटी वहीं पास में थी और उसने कबूतर को जाल में फंसा हुआ देख लिया। कबूतर उस जाल में से निकलने में असमर्थ था। शिकारी ने कबूतर का जाल पकड़ा और चलने लगा। तभी चींटी ने कबूतर की जान बचाने की सोची और उसने तेजी से जाकर शिकारी के पैर में जोर से काट लिया। तेज दर्द के कारण शिकारी ने उस जाल को छोड़ दिया और अपने पैर को देखने लगा। कबूतर को जाल से निकलने का मौका मिल गया और वह जल्दी से जाल से निकल कर उड़ गया।

कहानी से सीख

हम जब भी दूसरों का भला करते हैं, तो उसका फल हमें जरुर मिलता है। कबूतर ने चींटी की मदद की थी और उसी मदद के फलस्वरूप मुश्किल समय में चींटी ने कबूतर की जान बचाई। इसलिए कभी भी किसी की सहायता करने या अच्छा करने से पीछे न हटें। जब भी मौका मिले दूसरों की बिना किसी स्वार्थ के मदद करें।