मौखिक या लिखित भाषा में अर्थ अभिव्यक्ति के लिए प्रयोग किए जाने वाले विशिष्ट चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं।

प्रमुख विराम चिह्न निम्नलिखित हैं-

1) अल्प-विराम ( , )

इसका प्रयोग वाक्य के बीच में समान शब्दों, वाक्यों और उपवाक्यों को अलग करने के लिए किया जाता है।

जैसे-

(i) मुझे दूध, दही और पनीर चाहिए। (शब्द)
(ii) पढ़ाई करो, फल अवश्य मिलेगा। (उपवाक्य)

2) अर्द्ध-विराम ( ; )

जहाँ अल्पविराम से कुछ अधिक रूकना पड़े, वहाँ इसका प्रयोग किया जाता है।

जैसे-

(i) डट कर परिश्रम करोय परीक्षा निकट है।
(ii) आलस्य मनुष्य का शत्रु हैय इससे दूर रहो।

3) पूर्ण-विराम ( | )

इसका प्रयोग किसी कथन के पूर्ण होने पर वाक्य के अन्त में किया जाता है।

जैसे-

(i) सदा सत्य बोलो।
(ii) मेरा दोस्त परिश्रमी है।

4) प्रश्नवाचक ( ? )

जब वाक्य में कब, कहाँ, कैसे, क्या आदि का प्रयोग करते हुए प्रश्न पूछे जाते हैं, तब वाक्य के अन्त में इसका प्रयोग किया जाता है।

जैसे-

(i) आपको क्या चाहिए?
(ii) आप क्या पढ़ रहे हैं?

5) विस्मयादिबोधक ( ! )

विस्मयादिबोधक का प्रयोग हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य आदि मनोभावों को प्रकट करने के लिए किया जाता है।

जैसे-

(i) काश! मैं उसे देख पाता!
(ii) अहा! कितना सुन्दर मौसम है!

6) समासक या योजक ( – )

इसका प्रयोग समान शब्दों, शब्द युग्मों और द्वन्द्व समास के दोनों पदो ंके बीच किया जाता है।

जैसे-

(i) माता-पिता को राम-राम करो।
(ii) मयंक हमेशा खाने-पीने के बारे में बात करता है।

7) संक्षेपक या लाघव ( o)

शब्दों का संक्षिप्त रूप लिखने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

जैसे-

(i) क॰ प॰ उ॰ (कृपया पन्ना उलटिए)
(ii) मेरा जन्म उ॰ प्र॰ (उत्तर प्रदेश) में हुआ।

8) त्रुटिपूरक या हंसपद ( ^ )

जब लिखने में कुछ छूट जाता है, तो वहाँ (^) चिह्न लगाकर छूटे हुए शब्द को ऊपर लिख दिया जाता है।

जैसे-

व्यक्ति

(i) परिश्रमी ^ सदा सफल होते हैं।

हित

(ii) दूसरों का ^ चिन्तन करने वाले महापुरूष कहलाते है।

9) विवरण चिह्न ( :- )

विवरण चिह्न का प्रयोग सूचना, निर्देश आदि देने के लिए किया जाता है।

जैसे-

(i) विवरण के लिए नीचे देखेंरू:-
(ii) क्रियाविशेषण चार प्रकार के होते हैंरू:-

10) कोष्ठक (( ))

कोष्ठक में ऐसी जानकारियाँ रखी जाती हैं, जो मुख्य वाक्य का अंग होते हुए भी उनसे अलग की जा सकती हैं।

जैसे-

(i) वाल्मीकि (रामायण के रचियता) को सभी जानते हैं।
(ii) राजा (उदास होकर)- अब क्या होगा?