प्रेमचंद की जीवनी | Premchand Biography in Hindi

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परिचय

प्रेमचंद को लोग ‘मुंशी प्रेमचंद’ के नाम से भी जानते हैं। प्रेमचंद भारत के हिंदी साहित्य के लेखक थे। उनका नाम पूरे भारत में विख्यात है। 20वी शताब्दी के आस-पास भारत के सभी रचनाकारों में प्रेमचंद्र सबसे ऊपर माने जाते थे। मुंशी प्रेमचंद का असली नाम ‘धनपत राय श्रीवास्तव’ था। जब उन्होंने लेखन की शुरुआत की तब अपना नाम ‘नवाब राय’ रखा और बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर प्रेमचंद कर दिया।

मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन में कई तरह की रचनाएं लिखीं, जिनमें से कुछ कहानियां, उपन्यास और नाटक थे। उनके द्वारा लिखे हुए उपन्यास इतने मशहूर हुए थे कि कई लोग उन्हें “उपन्यास सम्राट” भी कहते थे। मुंशी प्रेमचंद ने अपने पूरे जीवनकाल में लगभग एक दर्जन उपन्यास, लगभग 300 लघु कथाएं, बहुत सारे निबंध और कुछ विदेशी साहित्यों का हिंदी अनुवाद भी किया है।

जीवन

मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी, बनारस के पास बसे ‘लामही’ नाम के गाँव में हुआ था। मुंशी प्रेमचंद्र के दादा का नाम ‘गुर सहाई राय’ था, वे एक पटवारी थे, मुंशी प्रेमचंद के पिता का नाम ‘अजीब राय’ था, वे एक पोस्ट ऑफिस कर्मचारी थे और उनकी माता का नाम ‘आनंदी देवी’ था, वे ‘करुनी’ नामक गाँव से थी। अपनी माता आनंदी देवी से प्रेरित होकर ही मुंशी प्रेमचंद ने ‘बड़े घर की बेटी’ कहानी में ‘आनंदी’ का पात्र बनाया।

‘धनपत राय’ नाम प्रेमचंद के माता-पिता द्वारा उन्हें उनके जन्म पर दिया गया था, जबकि प्रेमचंद के एक चाचा जी अमीर थे, उन्होंने प्रेमचंद का उपनाम ‘नवाब’ रखा, इन दोनों नामों को ध्यान में रखकर जब प्रेमचंद ने लेखन शुरू किया तो अपना नाम ‘नवाब राय’ रखा।

मुंशी प्रेमचंद ने 7 साल की आयु में मदरसा में शिक्षा ग्रहण करना शुरू कर दिया था। वहाँ उन्होंने मौलवी से पारसी और उर्दू भाषा सीखी। 8 साल की छोटी आयु में ही मुंशी प्रेमचंद की माँ का देहान्त हो गया था। बाद में प्रेमचंद को बड़ा करने के जिम्मेदारी उनकी दादी ने ली, मगर वे भी कुछ समय बाद चल बसी। अब वह समय आ गया था, जब प्रेमचंद को अकेलेपन का अहसास होने लगा था, क्योंकि उस समय तक उनकी बहन की भी शादी हो चुकी थी और उनके पिता अपने काम में व्यस्त रहते थे।

कुछ समय बाद मुंशी प्रेमचंद के पिता ने दूसरी शादी कर ली, मगर प्रेमचंद को अपनी सौतेली माँ से वह प्यार नहीं मिला, जिसकी उन्हें तलाश थी। प्रेमचंद की कामयाबी में उनकी सौतेली माँ का बहुत बड़ा हाथ है।

प्रेमचंद की माँ के देहांत के बाद प्रेमचंद ने अपने मन ही मन में अलग-अलग काल्पनिक कहानियां बनाना शुरू कर दिया और इसी बीच किताबों के प्रति उनकी रूचि भी बढने लगी। किताबों में अच्छी रूचि होने की वजह से प्रेमचंद को किताबों के थोक व्यापारी के पास किताबें बेचने का काम मिल गया। प्रेमचंद ने वहाँ किताबें बेचते-बेचते कई किताबें भी पढ़ी। उसी दौरान प्रेमचंद ने मिशनरी स्कूल से अंग्रजी भाषा सीखी।

विवाह

1895 में प्रेमचंद का विवाह हो गया, विवाह के समय वे केवल 15 वर्ष के ही थे  तथा 9वी कक्षा की पढ़ाई कर रहे थे। प्रेमचंद की शादी करने का फैसला उनके नाना जी ने किया था। जिनसे प्रेमचंद की शादी हुई वे काफी बड़े खानदान से थी और प्रेमचंद से उम्र में भी बड़ी थी।

1897 में प्रेमचंद के पिता का देहांत हो गया, मगर इसके बाद भी उन्होंने अपनी पढाई पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ने दिया और किसी तरह दूसरी श्रेणी में मेट्रिक की परीक्षा पास की। प्रेमचंद  को ‘क्वीन कॉलेज’ में दाखिला चाहते थे, मगर उस काँलेज में फीस में छूट उन्हीं बच्चों को मिलती थी, जो पहली श्रेणी में पास होते थे। इसी वजह से उन्होंने बाद में ‘सेंट्रल हिंदु कॉलेज’ में दाखिला लेने के बारे में सोचा, मगर उन्हें वहाँ भी दाखिला नहीं मिला, क्योंकि वे गणित में कमजोर थे, इसलिए अंत में उन्होंने पढाई छोड़ने का फैसला किया।

बाद में मुंशी प्रेमचंद को बनारस में ही वकील के बेटे को पढ़ाने का काम मिल गया। इस काम के प्रेमचंद को हर महीने 5 रूपये मिलते थे, जिसमें वे किसी तरह अपना गुजरा करते और कुछ पैसे अपने घर भेज देते थे।

इसी दौरान प्रेमचंद ने कई किताबें इकट्ठी कर ली और वे कई किताबें पढ़ते रहते थे। एक बार जब प्रेमचंद अपनी जमा की गई किताबें बेचने गए, तब उनकी  मुलाकात मिशनरी स्कूल, चुनार के हेडमास्टर से हुई और हेडमास्टर ने प्रेमचंद को एक शिक्षक की नौकरी, हर महीने 18 रूपये तनख्वाह के तौर पर देने की बात की। प्रेमचंद ने वह नौकरी कर ली और उस नौकरी के साथ प्रेमचंद ने बच्चों को घर पर 5 रूपये लेकर पढ़ाना भी शुरू कर दिया।

प्रेमचंद की रचनाएँ

उपन्यास- प्रेमचंद द्वारा लिखे गए उपन्यास  निम्न हैं-

  • सेवासदन- 1918
  • प्रेमाश्रम- 1922
  • रंगभूमि- 1925
  • निर्मला- 1925
  • कायाकल्प- 1927
  • गबन- 1928
  • कर्मभूमि- 1932
  • गोदान- 1936
  • मंगलसूत्र- (पूरा नहीं हुआ)

नाटक- प्रेमचंद द्वारा लिखे गए नाटक निम्न हैं-

  • संग्राम- 1923
  • कर्बला- 1924
  • प्रेम की वेदी- 1933

कहानियाँ-

प्रेमचंद ने अन्धेर, अनाथ लड़की, अपनी करनी, अमृत, अलग्योझा, आख़िरी तोहफ़ा आदि कई कहानियां लिखीं हैं।

मृत्यु

प्रेमचंद का निधन  8 अक्टूबर 1936 को वाराणसी में हुआ था।