प्रणब मुखर्जी की जीवनी | Pranab Mukherjee Biography in Hindi

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परिचय

प्रणब मुखर्जी भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं, तथा राष्ट्रपति बनने से पहले 6 दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। प्रणब मुखर्जी अपने जीवन में कई पदों पर रह चुके हैं, जिनमें से कुछ पद विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वाणिज्य मंत्री और वित्त मंत्री के रूप में हैं।

प्रणब मुखर्जी 1969 से 5 बार राज्य सभा के लिए चुने गए थे और 2004 से 2 बार  लोक सभा के लिए भी चुने गए थे। वे ‘कांग्रेस वर्किंग समिति’ के सदस्य भी रहे, जो 23 वर्षों से सबसे ज्यादा नीति बनाने वाली पार्टी रही है।

2004 से 2012 के बीच सरकार के कई बड़े फैसलों में प्रणब मुखर्जी का भी हाथ था, जैसे प्रशासनिक सुधारों, राईट टू इनफार्मेशन, राईट टु एम्प्लॉयमेंट, खाद्य सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार, UIDAI को शुरू करने में, मेट्रो रेल आदि। प्रणब मुखर्जी ने 70 से 80 के दशक में रीजनल रूलर बैंक और EXIM बैंक की स्थापना की। EXIM बैंक एक इंटरनेशनल बैंक है। श्री प्रणब मुखर्जी एक शक्तिशाली वक्ता, विद्वान और बौद्धिक व्यक्ति हैं।

जीवन व शिक्षा

11 दिसम्बर 1935 को ‘मिरती’ पश्चिम बंगाल में श्री प्रणब मुखर्जी का जन्म हुआ। उनके माता-पिता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी और कमादा किंकर मुखर्जी था। प्रणब मुखर्जी के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी तथा कांग्रेसी  सदस्य थे, वे कई बार जेल जा चुके थे। प्रणब मुखर्जी ने कोलकाता विश्वविद्यालय से पढाई की और  इतिहास, राजनीति विज्ञान, वकालत की मास्टर डिग्री हासिल की थी।

करियर

प्रणब मुखर्जी ने अपना करियर कॉलेज के प्रोफ़ेसर के रूप से शुरू किया था। इन्होंने पत्रकारिता भी की, बाद में राजनीति में आए और 1969 में वे राज्य सभा संसद बने थे। जल्द ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में प्रणब मुखर्जी ने अपना राजनीतिक पद बढ़ाने की शुरुआत कर दी।

प्रणब मुखर्जी 1973 से 1974 तक उद्योग मंत्री, वाहन और नववाहन मंत्री, इस्पात उद्योग मंत्री के कार्य भी कर चुके हैं। प्रणब मुखर्जी पहली बार 1982 में वित्त मंत्री  बने थे। 1980 से 1985 तक वे राज्य सभा  के सदस्य रहे। प्रणब मुखर्जी ने 1993 से 1995 के बीच वाणिज्य विभाग में काम किया और 1991 से 1996 के बीच विदेशी मंत्री के पद पर भी रहे। वे 2004 से 2006 के बीच रक्षा मंत्री, 2006 से 2009 तक दोबारा विदेश मंत्री, 2009 से 2012 तक फिर वित्त मंत्री और 2004 से 2012 तक लोक सभा के सदस्य बने रहे थे।

अन्तर्राष्ट्रीय भूमिका

प्रणब मुखर्जी और अमेरिकी विदेश सचिव कोंडोलीजा राइस ने 10 अक्टूबर 2008 को धारा 123 समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रणब मुखर्जी आइ.एम.एफ (imf), वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक के प्रशासक बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं। 1984 में वे आईएमएफ (imf) और वर्ल्ड बैंक से जुड़े ग्रुप-24 (g-24) की बैठक के अध्यक्ष रहे थे।

भ्रष्टाचार पर विचार

प्रणब मुखर्जी पर कोई भी भ्रष्टाचार या घोटाले का दाग नहीं लगा हुआ। मगर 1998 में जब रीडिफ.कॉम (rediff.com) के एक इंटरव्यू में प्रणब मुखर्जी से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने कहा “भ्रष्टाचार एक सामाजिक मुद्दा है, हमने इससे निपटने की बात घोषणा पत्र में कही है, मगर मैं यह कहते हुए माफी चाहता हूं कि ये घोटाले केवल कांग्रेस या कांग्रेस सरकार तक ही सीमित नहीं हैं, बहुत सारे घोटाले हैं, विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता उनमें शामिल हैं। इसलिए आप आसानी से यह कह सकते हैं कि कांग्रेस सरकार भी इन घोटालों में शामिल थी।”