2 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को मंजूरी दी। भारतीय अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। देश की बढ़ती आबादी के कारण हर साल देश में अनाज की मांग बढ़ती ही जा रही है। देश की खाद्य आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अच्छी किस्म की खेती बहुत जरूरी है। देश के प्रधानमंत्री ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरूआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसानों को पानी की उपयोगिता के बारे मे जागरूक कर सकें, और उन्हें सिंचाई के नये साधन के बारे में बताया जा सके।

इस योजना के अंतर्गत 5 वर्षों (2015-2016 से 2019-2020) के लिए 50 हजार करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2015-16 के दौरान लघु सिंचाई के अंतर्गत 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दिसंबर 2019 तक 99 मुख्य और माध्यम सिंचाई को मिशन मोड़ में पूरा किये जाने का भी निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त 76.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के तहत लाया जा सकेगा। देश के सभी राज्यों को इस योजना में जितना खर्च होगा उसका 75 प्रतिशत दिया जायेगा, बाकी का 25 प्रतिशत का खर्च राज्य सरकार को खुद ही उठाना पड़ेगा। राज्य सरकार को केन्द्रीय सरकार द्वारा दी गई राशि के अलावा अतिरिक्त खर्च करना जरूरी होगा, जिससे विकास कार्य अच्छी तरह से हो सके।

देश के ऊँचाई वाले स्थान, उत्तरी पूर्व के राज्यों में केन्द्रीय सरकार इस योजना के अंतर्गत 90 प्रतिशत खर्च देगी, उस राज्य को सिर्फ 10 प्रतिशत का भार उठाना होगा। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 5300 करोड़ रूपये आबंटित किये गये हैं। जाहिर है कि देश में कुल 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 65 प्रतिशत भूमि में सिंचाई की सुविधा नहीं है। बताया जा रहा है कि इस योजना से बहुत से किसानों को लाभ मिलेगा। देश में ऐसे बहुत से किसान हैं जो खेती करना छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है, लेकिन इस योजना के द्वारा केन्द्रीय एवं राज्य सरकार खेती के नये रास्ते खोलने के साथ-साथ बेहतर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराएगी।