प्रदूषण क्या है ?

प्रदूषण से हमारा आशय है, वायु , जल , भूमि , तथा मृदा के भौतिक , रासायनिक और जैविक लक्षणों के कारण होने वाले अवांच्छित लक्षणों से जो कि बहुत ही हानिकारक होते हैं । पर्यावरण प्रदूषण आधुनिक युग  की सबसे गम्भीर समस्या है तथा विकसित और विकासशील देशों के लिए तो बहुत ही चिंता का विषय है । सबसे पहले भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए एक स्वतंत्र केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की स्थापना की गई थी ।‌तभी से सरकारी और गैर सरकारी स्तर अनेकों विचार गोष्ठियों की समस्या के समाधान हेतु उपाय ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है । इसके लिए की पर्यावरण की रक्षा हेतु कानून भी बनाते गए हैं । और जब तक आम इंसान को पर्यावरण प्रदूषण से होने वाले खतरों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होगी तब तक इसका समाधान करना भी मुश्किल है । इसके लिए आम जनता को यह जानना आवश्यक है कि आखिर पर्यावरण प्रदूषण है क्या ? आइए जानते हैं पर्यावरण प्रदूषण के बारे में –

Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण –

आसान शब्दों में समझाया  जाए तो जिस स्थान पर हम रहते हैं या निवास करते हैं उसके आस पास के सभी प्राकृतिक संसाधन जैसे कि – जल, मिट्टी, वायु, वनस्पति, धूप वन, और वन्य प्राणी ये सब हमारा पर्यावरण या प्राकृतिक वातावरण कहलाता है , और इन साधनों का ही हमारे रचना, स्वास्थ्य और मन पर सीधा असर पड़ता है । इसलिए हमारे आस पास का प्राकृतिक वातावरण के जो भी साधन है वह स्वच्छ और सुन्दर होंगे उतना ही अच्छा हमारा शरीर, स्वास्थ्य और मन भी रहेगा । हमारे औषधि विज्ञान के आदिगुरु चरक ने यह बताया है कि जीवन के लिए जल, वायु और मिट्टी सबसे आवश्यक कारकों में से ही है ।

प्रदूषण की परिभाषा क्या है ?

सभी प्राणी जन्म से लेकर अपनी मृत्यु तक अपना पूरा जीवन अपने पर्यावरण में उपस्थित सभी प्राकृतिक  साधनों का मुक्त रूप से भरपूर उपयोग करता है और अपनी सभी सम्पादित क्रियाओं को करता है । ” कोई भी ऐसी  क्रिया जो प्राकृतिक साधनों के उपयोग में किसी भी तरीके से बांधा उत्पन्न करें उसे प्रदुषण कहते हैं या जो प्राकृतिक साधनों की शुद्धता को खत्म करके उनकी सभी जीवन उपयोगिता को नष्ट करें तथा कम करें ऐसी प्रक्रिया प्रदूषण कहलाती है ।

प्रदूषण के प्रकार –

पर्यावरण प्रदूषण चार प्रकार के होते हैं । आइए जानते हैं कि ये चारों प्रकार के प्रदूषण हमारे पर्यावरण को किस प्रकार  से नुकसान पहुंचाते हैं ।

* वायु प्रदूषण

* जल प्रदूषण

* ध्वनि प्रदूषण

* मृदा प्रदूषण

1. वायु प्रदूषण –

वायु प्रदूषण भौतिक रासायनिक और जैविक लक्षणों में होने वाले अनुवांच्छित और हानिकारक परिवर्तनों को कहते हैं । आज कल बड़े बड़े शहरों में अलग अलग तरह भी बहुत सी फैक्ट्रीयों से निकलने वाला धुआं हमारे पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है । वायु प्रदूषण के कौन कौन से कारण हो सकते हैं आइए जानते हैं ।

वायु प्रदूषण के कारण –

* बड़े बड़े उद्योगों से निकलने वाले धुंए से

* रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के कारण

* ईंधन के अपूर्ण दहन होने से

* जनरेटर और पटाखों के कारण

* परमाणवीय परीक्षणों और दुर्घटना के कारण

* स्वचालित वाहनों से

वायु प्रदूषण का मानव  जीवन पर प्रभाव –

* वायु प्रदूषण के कारण मनुष्य के श्वसन तंत्र में संबंधित रोग उत्पन्न होते हैं जैसे कि फेफड़ों का कैंसर, एलर्जी या दमा, सिसिकोसित, ऐस्वोस्टोसिस आदि ।

* वायु प्रदूषण का प्रभाव पशुओं के श्वसन‌तंत्र पर भी पड़ता है जिसकी वजह से जलीय जीवों जैसे की मछलियों की मृत्यु हो जाती है ।

* वायु प्रदूषण के कारण पशुओं की वृद्धि रूक जाती है और उनके उत्पादन‌ भी कम होता है ।

* वायु प्रदूषण के कारण ऐतिहासिक इमारतों और पुलों, रेल की पटरियों आदि को भी बहुत नुक्सान होता है ।

वायु प्रदूषण को कम करने के लिए की जाने वाली रोकथाम –

* औद्योगिक प्रदूषण पर की जाने वाली रोकथाम –

बड़े बड़े शहरों में अलग अलग तरह के औद्योगिक होते हैं जिनकी फैक्ट्रीयों से निकलने वाली गैस और धुआं पूरे वातावरण को बहुत नुक्सान पहुंचाते हैं इसलिए उन उद्योगों में  वैद्युय अवक्षेपित का उपयोग करना चाहिए जिसके कारण लगभग 90% से अधिक अशुद्धियों को दूर किया जा सकता है ।

* स्वचालित वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण की रोकथाम –

– सबसे जरूरी है कि सभी स्वचलित वाहनों की उचित देखभाल और रखरखाव सही तरीके से समय समय पर किया जाना आवश्यक होता है ।

– पुराने वाहनों की मरम्मत करना ।

– सीसा रक्षित पेट्रोल और डीजल का उपयोग किया जाए ।

– सभी वाहनो में CNG का उपयोग किया जाए ।

       * CNG गैस पेट्रोल से सस्ता ही होता है ।

       * यह प्रदूषण रहित होती है ।

       * इसमें मिलावट की कोई सम्भावना नहीं होती है ।

       * और यह सुरक्षित भी होती है ।

2. जल प्रदूषण –

जल पर्यावरण का एक ऐसा अभिन्न अंग है जिसके बिना जीवन संभव नहीं है । जल की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है, इसलिए स्वास्थ्य रहने के लिए स्वच्छ जल का होना भी बहुत आवश्यक है । जल के बिना मनुष्य कुछ ही दिनों तक जीवित रह सकता है क्योंकि मनुष्य के शरीर में जल की मात्रा 80% तक होती है । और ये सब जानकारी मनुष्य को पता है फिर भी वो ना जाने क्यों जल को प्रदूषित करने में लगा हुआ है । मनुष्य के लिए जल के स्रोत नदी, झीलें, तालाब, कुएं, आदि है जैसे जैसे जनसंख्या वृद्धि दर बढ़ रही है वैसे वैसे ही लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हो रहा है । इनकी वजह से हमारी नदियां, कुएं, तालाब, झील का जल भी प्रदूषित हो रहा है । और तो और इन नदियों, झीलों और तालाबों का पानी जानवर भी पीते हैं और प्रदूषित जल को पीने से जानवरों की भी मौत हो रही है । इसलिए प्राकृतिक संसाधनों को प्रदूषित हो से रोकना बहुत आवश्यक हो गया है वर्ना अगर यही हाल रहा तो इससे मानव सभ्यता को बहुत नुक्सान हो सकता है ।

Pollution in Hindi

जल प्रदूषण के कारण –

* जनसंख्या वृद्धि एक बड़ा कारण है । क्योंकि जनसंख्या वृद्धि के कारण मल मूत्र आदि की साफ सफाई तो की जाती है पर ये सब साफ़ करके नदियों तालाबों और झीलों में डाल दिया जाता है जिससे जल स्रोत प्रदूषित होते हैं ।

* जब भी जल के माध्यम से परमाणु परीक्षण किए जाते हैं तो जल में इनके नाभिकीय कम मिल जाते हैं और ये जल प्रदूषित हो जाता है ।

* गांवों में लोगों नदियों, तालाबों, नहरों में नहाने कपड़े धोने और पशुओं को नहलाने, और बर्तन साफ करने जाते हैं जिसकी वजह से सभी जल स्त्रोत प्रदूषित हो जाते हैं ।

* जो नगर नदियों के किनारे बसे हैं उन जगहों पर घर की पूरी गंदगी इन्हीं नदियों में बहा दी जाती है । इसके साथ साथ अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो उसके शव को भी नदी में बहा दिया जाता है जिससे जल स्रोत प्रदूषित होता है ।

जल प्रदूषित के प्रभाव –

* जल परीक्षणों के कारण जो जल में नाभिकीय कम मिल जाते हैं उनकी वजह से समूद्री जीवों, और वनस्पतियों को नुक्सान होता है ।

* प्रदूषित जल को पीने से मनुष्य के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है तथा कई पेट सम्बन्धी बीमारियां मनुष्य के शरीर में उत्पन्न हो जाती है जैसे हैजा , पेचिस , क्षय , उदर , आदि ।

जल प्रदूषण को रोकने के उपाय –

* कारखानों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले सभी अवशिष्ट पदार्थों को निष्पादित करने की उचित व्यवस्था की जाना चाहिए ।

* नदियों या फिर किसी भी जल स्त्रोतों में अविशिष्ट पदार्थों को बहाने पर रोक लगाई जाए ।

* अंतराष्ट्रीय स्तर पर जो भी जल परीक्षण होते उन सभी पर रोक लगाई जाना चाहिए ।

3. मृदा प्रदूषण –

जिस प्रकार जल और वायु प्रदूषण होता है उसी प्रकार से मृदा प्रदूषण भी होता है । ये भी हमारे पर्यावरण का एक अभिन्न हिस्सा है। मृदा प्रदूषण की प्रकार के हो सकते हैं जैसे ऐसा कचड़ा जो कभी सड़ता नहीं है जैसे कि प्लास्टिक बैग, पोलिथिन आदि को गड्ढा करके जमीन में दबा दिया जाए तो यह एक प्रकार का मृदा प्रदूषण भी है । या फिर किसी चीज को जलाकर जमीन में दबा दिया जाए तो वह भी प्रदूषण के अंतर्गत ही आयेगा । जनसंख्या वृद्धि के कारण जैसे जैसे लोगों की जरूरतें बढ़ रही है मनुष्य उनको पूरा करने का प्रयास कर रहा है । जैसे कि मनुष्य लगातार ही जंगलों की कटाई करता जा रहा है जिसके कारण मृदा का क्षय हो रहा है और मृदा के यक्ष होने से की परेशानियां भी आ रही है । जब पेड़ पौधों ही नहीं होंगे तो मनुष्य को सांस लेने में दिक्कत होगी ‌। बारिश कम होने की वजह से पृथ्वी पर जल स्तर कम होगा । अगर इन सब परेशानियों से बचना है तो ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने अपने आस पास क्योंकि आपके आस पास का वातावरण जितना अच्छा होगा आप भी स्वास्थ्य रहेंगे ।

4. ध्वनि प्रदूषण -‌

ध्वनि प्रदूषण भी हमारे पर्यावरण का हिस्सा ही है । पर जनसंख्या वृद्धि के कारण सभी जगहों पर चाहे वो छोटा शहर हो या बड़ा  हर जगह ध्वनि प्रदूषण नजर आएगा ही । आप ज्यादा शोरगुल मनुष्य ‌के लिए लाभदायक नहीं होता है । और जैसे जैसे जनसंख्या वृद्धि हो रही है मनुष्य की जरूरतें भी बढ़ रही है । बड़े ‌शहरो में की प्रकार के ध्वनि प्रदूषण होता है जैसे – वाहनों से निकलने वाले धुंआ और आवाज , बड़े बड़े उद्योगों की आवाजें , Loudspeaker की आवाजें ये सब मानव शरीर को बहुत नुक्सान पहुंचाती है और इन सब को जल्द से जल्द कम करने का प्रयास किया जाना बहुत आवश्यक है ।