PM मोदी ने जापान में भारतवंशियों से कहा- ‘हर कोने-कोने में देश का नाम करें रोशन’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जापान दौरे के दौरान वहां बसे भारतीयों से भी मुलाकात की। PM मोदी टोक्यों में भारतवंशियों के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारत की उपलब्धियों के बारे में सभी को बताया। PM मोदी ने कहा- ‘जिस तरह दिवाली में दीपक जहां रहता है, वहां उजाला फैलाता है। उसी तरह आप भी जापान और दुनिया के हर कोने में अपना और आपने देश का नाम रौशन करें, मेरी आप सबके लिए मेरी यही शुभकामना है।’ उन्होंने आगे कहा ‘जापान में बसे भारतीयों ने जापानी दोस्तों के साथ मिलकर हमेशा से ही देश के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। स्वामी विवेकानंद जी को, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को, भारत की आजादी के आंदोलन को जो सहयोग जापान से मिला है, वो करोड़ों भारतीयों के दिल में हमेशा रहेगा।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में चल रही डिजिटल ट्रांजेक्‍शन की हमारी आधुनिक व्यवस्था, जैसे- ‘भीम एप’ और ‘रुपे कार्ड’ को लेकर भी दुनिया के अनेक देशों में उत्सुकता है। ‘मेक इन इंडिया’ आज ग्‍लोबल ब्रांड बनकर उभरा है। आज हम ना सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए बेहतरीन उत्‍पाद बना रहे हैं। विशेषतौर पर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और ऑटोमोबाइल मैन्‍युफैक्‍चरिंग में भारत ग्‍लोबल हब बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि हमने बहुत ही कम खर्च में ‘चंद्रयान’ और ‘मंगलयान’ अंतरिक्ष में भेजा। अब 2022 तक भारत ‘गगनयान’ भेजने की तैयारी में जुटा है। ये गगनयान पूरी तरह से भारतीय होगा और इसमें अंतरिक्ष जाने वाला भी भारतीय होगा। ‘बुलेट ट्रेन’ से लेकर स्‍मार्ट सिटी तक आज जो न्‍यू इंडिया का नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है, उसमें जापान की भागीदारी है। भारत की मैन पावर, भारत की युवा शक्ति को भी जापान की स्किल का लाभ मिल रहा है।

PM मोदी ने कहा- ‘भारत में नीतियों का निर्माण हो रहा है। जनसेवा के क्षेत्र में काम किए जा रहे हैं। उसकी दुनिया भर में तारीफ और चर्चा की जा रही है। ‘चैम्पियंस ऑफ अर्थ एंड सियोल पीस प्राइज’ के तौर पर भारत को सम्मानित किया गया। भले ही मोदी को सम्मानित किया गया हो, लेकिन मेरा योगदान माला के उस धागे की तरह है, जो मनके को पिरोता है और संगठित होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्‍होंने कहा कि हमारा देश आप जैसे मोतियों से भरा पड़ा है, सिर्फ एक संगठित प्रयास की आवश्यक्ता थी, जो पिछले 4 सालों से हम कर रहे हैं।‘