पद्म श्री | Padma Shri

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‘पद्म श्री’  भारत सरकार द्वारा आमतौर पर सिर्फ भारतीय नागरिकों को दिया जाने वाला सम्मान है। पद्म श्री पुरस्कार नागरिकों को उनके विभिन्न क्षेत्रों जैसे- कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में उनके खास योगदान का सम्मान करने के लिए दिया जाता है।

भारत के नागरिक पुरस्कारों में यह पुरस्कार चौथे नंबर पर आता है।  इससे पहले क्रमशः भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण का स्थान है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा हर साल भारत के गणतन्त्र दिवस के दिन दिया जाता है।

इतिहास

इस पुरस्कार की शुरुआत 1954 में हुई, यह पुरस्कार भारत के उन नागरिकों के लिए था, जिन्होंने भारत के लिए कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, सामाजिक सेवा और लोक मामलों के क्षेत्र में कोई बड़ा योगदान किया हो। हालांकि, इस पुरस्कार से कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया है, जो भारत के नागरिक नहीं थे, मगर उन्होंने भारत के लिए विभिन्न तरीकों से योगदान दिया है।

ऐसा कहा जाता है कि कई लोग, जो इस पुरस्कार के लायक हैं, उनको यह पुरस्कार नहीं मिल पाता। इसलिए सरकार ने आम नागरिकों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफार्म बनाया है, जिसमें सब अपनी राय दे सकते हैं कि अगला पद्म श्री पुरस्कार किसको मिलना चाहिए?

संस्कृत में ‘पद्म’ का मतलब ‘कमल’ और श्री एक सम्मानित शब्द है, जिसे किसी व्यक्ति का सम्मान करने के लिए उसके नाम के साथ लगाया जाता है, जिस तरह अंग्रजी में ‘मिस्टर’ और ‘मिसेज’ लगाया जाता है। 2017 तक, 2840 लोगों को ‘पद्म श्री’ पुरस्कार मिल चुका है।

पुरस्कार का निलंबन

2 जनवरी 1954 को एक प्रेस कोंफ्रेंस बुलाई गई, जिसमें भारत के राष्ट्रपति ने दो नागरिक पुरस्कारों की रचना की घोषणा की थी। पहला ‘भारत रत्न’ जो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है और दूसरा पद्म विभूषण। 15 जनवरी 1955 को, ‘पद्म विभूषण’ को तीन अलग-अलग पुरस्कारों में बांटा गया। पहला पुरस्कार पद्म विभूषण, जो तीनों में से सबसे ज्यादा मान्यता वाला पुरस्कार है, दूसरा पद्म भूषण और तीसरा पद्म श्री है।

यह पुरस्कार अपने इतिहास में 2 बार निलंबित किया गया है। 1977 में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद पहला निलंबन हुआ। मोरारजी देसाई सरकार ने 13 जुलाई 1977 को सभी व्यक्तिगत नागरिक सम्मान वापस ले लिए थे। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 25 जनवरी 1980 को निलंबन रद्द कर दिया गया था। 1992 के मध्य में नागरिक पुरस्कार फिर से निलंबित किए गए, जब भारत के उच्च न्यायालयों में दो पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर किए गए।

पहला पी.आई.एल (PIL) केरल उच्च न्यायालय में 13 फरवरी 1992 को बालाजी राघवन द्वारा डाली गई और दूसरी पी.आई.एल (PIL) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर बेंच) में सत्यपाल आनंद द्वारा 24 अगस्त 1992 को डाली गई। 25 अगस्त 1992 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सभी नागरिक पुरस्कारों को कुछ समय के लिए निलंबित करने का नोटिस जारी किया। भारत के सुप्रीम कोर्ट का एक विशेष डिवीजन बेंच बनाया गया, जिसमें पांच न्यायाधीश शामिल थे। 15 दिसंबर 1995 को, विशेष डिवीजन बेंच ने पुरस्कार बहाल किए और एक निर्णय दिया- “भारत रत्न और पद्म पुरस्कार भारत के संविधान के आर्टिकल 18 के तहत नहीं आते।”

इनकार और विवाद

सितार बजाने वाले बड़े संगीतकार विलायत खान, लेखक मामोनी रायसोम गोस्वामी, पत्रकार कनक सेन देका और बॉलीवुड पटकथा लेखक सलीम खान समेत कई इच्छित प्राप्तकर्ताओं ने विभिन्न कारणों से पद्म श्री को अस्वीकार कर दिया है।

कुछ प्राप्तकर्ताओं ने जैसे- पर्यावरण कार्यकर्ता सुंदरलाल बहुगुणा और अंग्रेजी बिलियर्ड्स चैंपियन माइकल फेरेरा ने सम्मान लेने से इनकार कर दिया है, लेकिन बाद में पद्म भूषण या पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार को स्वीकार कर लिया है।

अन्य व्यक्तियों जैसे- लेखक फनिश्वर नाथ ‘रेणु’, पंजाबी लेखक दलित कौर तिवाना और प्रसिद्ध कवि जयंत महापात्रा ने पद्म श्री को स्वीकार करने के बाद वापस कर दिया है।