पी. वी. नरसिम्हा राव की जीवनी | P. V. Narasimha Rao Biography in Hindi

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जीवन व परिवार

श्री पी.वी. नरसिम्हा राव का पूरा नाम ‘पमुलपर्ति वेंकट नरसिम्हा राव’ था। श्री पी.वी. नरसिम्हा राव का जन्म 28 जून 1921 में वरंगल जिले के नारासंपेट गाँव में हुआ था। बाद में वो तेलंगना के करीमनगर जिले के भीमदेवारापल्ली मंडल के वनग्र गाँव में रहने लगे थे। उस समय तेलंगना हैदराबाद का ही एक भाग था। उनके पिता का नाम श्री पी.सीतारामराव और माता का नाम रुक्मिनि अम्मा था। शुरुआती शिक्षा उन्होंने करीमनगर जिले के भीमदेवारापल्ली मंडल के कटकुरु गाँव से ली थी। वहाँ वह अपने रिश्तेदार गब्बेता राधाकिशन राव के यह रहते थे और बाद में आगे की पढ़ाई के लिए वह हिस्लोप कॉलेज गए, जो अब नागपुर यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आता है। वहां से श्री पी.वी. नरसिम्हाराव ने कानून की पढ़ाई की और लॉ में मास्टर्स डिग्री हासिल की।

श्री पी.वी. नरसिम्हा राव की मातृभाषा तेलुगू थी। इसके साथ-साथ श्री पी.वी. नरसिम्हाराव को भारत के अलग-अलग प्रान्त की और भी भाषाएं आती थी, जैसे- मराठी, हिंदी, ओरिया, बंगाली, गुजरती, कन्नड़, संस्कृत, तमिल और उर्दू भाषा। इतना ही नहीं, इन्हें इंग्लिश, फ्रेंच, अरेबिक, स्पेनिश, जर्मन और पर्शियन भाषाएं भी आती थी। श्री पी.वी. नरसिम्हाराव के भाई श्री पामुल्पर्थी सदाशिव राव थे। नरसिम्हा और सदाशिव राव दोनों ही साथ में अपने उपनाम जय-विजय के नाम से आर्टिकल लिखते थे। श्री पी.वी. नरसिम्हा राव को तीन बेटे और पाँच बेटियाँ हैं।

राजनीतिक जीवन

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के चलते श्री पी.वी. नरसिम्हा राव एक सक्रिय राजनेता और राष्ट्रीय कांग्रेस के एक सदस्य भी थे, वो आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री भी रह चुके थे। आज भी उनके कार्यों को याद किया जाता है, क्योंकि श्री पी.वी. नरसिम्हाराव ने तेलंगना क्षेत्र में जमीनी अधिकारों में बहुत सारे अहम बदलाव किए थे। यह बदलाव बहुत प्रभावशाली साबित हुए और जब उनका कार्यकाल चल रहा था, तब आंध्र आंदोलन के समय राज्य में राष्ट्रपति शासन भी लागू किया गया था।

1972 में श्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की कैबिनेट में  गृह, सुरक्षा और विदेशी मुद्दों जैसी कई अहम जिम्मेदारियां ग्रहण की थीं। 1982 में ज्ञानी जैल सिंह के साथ श्री पी.वी. नरसिम्हाराव भी राष्ट्रपति पद के उम्मेदवार  थे। 1991 में श्री पी.वी. नरसिम्हाराव ने राजनीति से सन्यास ले लिया था, मगर कांग्रेस के अध्यक्ष  राजीव गाँधी की हत्या के बाद इन्हें मजबूरन राजनीति में वापस आना पड़ा। श्री पी.वी. नरसिम्हाराव की वजह से 1991 के चुनाव में कांग्रेस जीती और यह पहले प्रधानमंत्री थे, जो नेहरु परिवार से ना होने के बाद भी पूरे 5 साल तक प्रधानमंत्री बनकर देश की सेवा करते रहे और इतना ही नहीं वे दक्षिण भारत से पहले व्यक्ति थे, जो भारत के प्रधानमंत्री बने थे।

इसके बाद श्री पी.वी. नरसिम्हाराव चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाए, नंदयाल के चुनाव में इन्होंने हिस्सा लिया और करीब 5 लाख वोटों से जीते, यह रिकॉर्ड ‘गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड’  में भी दर्ज है। श्री पी.वी. नरसिम्हाराव ने भविष्य के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारत का फाइनेंस मिनिस्टर बनाकर सभी को चौंका दिया। यह श्री पी.वी. नरसिम्हाराव ने तब किया, जब श्री मनमोहन सिंह राजनीति से दूर थे।

मृत्यु

श्री पी.वी. नरसिम्हा राव को 9 दिसम्बर 2004 को हार्ट अटैक आया था और इसके बाद उन्हें ‘ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस’ (AIIMS) में भर्ती किया गया, जिसके 14 दिनों बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। जब उनकी मृत्यु हुई, तब उनकी उम्र 83 साल थी। पी.वी. नरसिम्हा राव के परिवार वाले चाहते थे कि उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में हो, क्योंकि दिल्ली उनकी कर्मभूमि थी, लेकिन सोनिया गाँधी के आदेश पर उनके शव को हैदराबाद भेजा गया था। उसके बाद उनके शव को  हैदराबाद के ‘जुबिली हॉल’ में रखा गया। उनके अंतिम संस्कार में श्री मनमोहन सिंह भी आए थे, जो उस समय भारत के प्रधानमंत्री थे, उनके सम्मान में और भी मंत्री उपस्थित थे। उन्हें सम्मान देते हुए तेलंगना सरकार ने भी उनके जन्मदिन पर 2014 में तेलंगना राज्य उत्सव घोषित किया था।