वन रैंक वन पेंशन (OROP)

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वन रैंक वन पेंशन से तात्पर्य अलग-अलग समय पर रिटायर हुए एक ही रैंक के दो फौजियों को समान पेंशन देना है। रिटायर्ड सैन्य कर्मियों को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से वन रैंक वन पेंशन स्कीम लागू की गयी। 25 सितम्बर 2012 में मंत्रिमंडल ने रिटायर्ड सैन्य कर्मियों के लिए वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करने को मंजूरी दीथी। वन रैंक वन पेंशन पर सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। रक्षा मंत्री श्री मनोहर पार्रिकर ने प्रेस कान्फ्रेन्स द्वारा सारी बातें सबके सामने रखी हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार के पास वन रैंक वन पेंशन को लेकर कोई ठोस दिशा-निर्देश नहीं था। वन रैंक वन पेंशन में सरकार का आकलन 10 हजार करोड़ का होगा जो बाद में बढ़ता रहेगा। सरकार की तरफ से वन रैंक वन पेंशन को लेकर कुछ महत्त्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं-

  • वन रैंक वन पेंशन जुलाई 2014 से लागू की जायेगी और एरियर 4 किश्तों में देने का निर्णय लिया गया है।
  • पेंशन रिविजन की अवधि सरकार द्वारा 5 वर्ष रखी गई है।
  • VRS अर्थात पहले रिटायरमेंट लेने वाले सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन के अन्तर्गत लाभ नहीं मिलेगा।
  • VRS के मुद्दे को लेकर सरकार अभी भी विचार में है, इसलिए इसके लिए एक कमेटी बनाई जायेगी जो 6 महीने में फैसला सुनाएगी।
  • सैनिकों की विधवाओं को एक मुश्त पैसा दिया जायेगा।

वन रैंक वन पेंशन को लागू करवाने के लिए सैन्य कर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके लिए कई रिटायर्ड सैन्य कर्मियों ने अपने पदक वापस लौटाए तथा रैलियां निकाली। उसी वक्त सरकार ने एक फैसला लिया और कहा कि-

  • वन रैंक वन पेंशन योजना के अनुसार सैन्य कर्मियों के मध्य पेंशन की असमानता को खत्म कर दिया जाएगा।
  • वन रैंक वन पेंशन योजना के अन्तर्गत सेना में पेंशन के लिए सिपाही स्तर, नायक स्तर और हवलदार स्तर पर जनवरी 2006 से 2 वर्ष पहले या फिर 2 वर्ष बाद रिटायर हुए लोगों को इसका पात्र बनाया गया और 2006 से पहले या बाद में रिटायर हुए अधिकारियों की जगह परिवर्तन कर इन्हें अधिक फायदा पहुँचाया गया। जैसे कमीशन आॅफिसर को न्यूनतम पे-बैंड की जगह न्यूनतम पेन्शन में डाला गया तथा कमिश्नर, जूनियर कमिश्नर तथा अधिकारियों फौजियों को न्यूनतम पे-बैंड की जगह न्यूनतम फिटमेंट में डाला गया तथा इन्हें अधिक लाभ दिया गया।
  • वन रैंक वन पेंशन योजना में यह फैसला भी लिया गया है कि अगर किसी अधिकारी की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिजन को 30 प्रतिशत की जगह 60 प्रतिशत पेन्शन दी जाएगी।
  • वन रैंक वन पेंशन योजना के अनुसार जो लोग सिविल सर्विसेज में हैं, वे भी इस योजना का लाभ लेते हुए दोनों ओर से पेन्शन ले सकते हैं।
  • इस योजना के तहत अगर किसी सैन्य कर्मचारी की संतान मानसिक रूप से कमजोर है, तो वह शादी के बाद भी इस योजना का लाभ उठाते हुए पेन्शन ले सकती है।
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