4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग | Omkareshwar Jyotirlinga in Hindi

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश राज्य के खंडवा जिले में सुप्रसिद्ध शहर इंदौर के पास स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच मंधाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का आकार औंकार अर्थात ऊं जैसा है, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग को ओंकारेश्वर के नाम से जाना जाता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा

शिव पुराण में वर्णित कथानुसार एक बार देवर्षि नारद गिरिराज विन्ध्य पर जा पहुँचे। विन्ध्य जी ने बड़े आदर-सत्कार के साथ उनकी पूजा की। विन्ध्य जी देवर्षि नारद के सामने इस प्रकार की मन में सोच लिए खड़े हो गये- ‘मैं सर्वगुण सम्पन्न हूँ, मेरे पास हर तरह की संपदा है, किसी वस्तु की कोई भी कमी नहीं है।’ अहंकारनाशक देवर्षि नारद विन्ध्य जी की अभिमान से भरी बातों को सुनकर लंबी साँस खींचते हुए चुपचाप खड़े रहे। बाद में विन्ध्य जी ने देवर्षि नारद से पूछा- ‘आपको मेरे पास ऐसी कौन सी कमी नजर आई, जिस कारण आपने लंबी साँस खींची?’ देवर्षि नारद ने विन्ध्य जी को बताया- ‘तुम्हारे पास सब कुछ है, लेकिन मेरू पर्वत तुमसे बहुत ऊँचा है। उस पर्वत का शिखर देवताओं के लोकों तक पहुँचा हुआ है। मुझे ऐसा लगता है कि तुम्हारे शिखर का भाग वहाँ तक कभी नहीं पहुँच पाएगा।’ इस बात को कहकर देवर्षि नारद वहाँ से चले गए। उनकी इस बात को सुनकर विन्ध्य जी बहुत पछताए और दुःखी होकर मन ही मन शोक करने लगे। उन्होंने निश्चय किया कि अब वे भगवान शिव की आराधना और तपस्या करेंगे। इस तरह सोच-विचार करने के बाद विन्ध्य जी भगवान शिव की सेवा में चले गए। उस जगह पर पहुँचकर उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक भगवान शिव का मिट्टी का शिवलिंग बनाया और लगातार 6 महीने तक उस शिवलिंग के पूजन-अर्चन में लीन रहे।

विन्ध्य जी की कठिन तपस्या को देखकर भगवान शिव उस पर अति प्रसन्न हो गए और उन्होंने विन्ध्य जी को अपना दिव्य स्वरूप प्रकट कर दिखाया, जिसके दर्शन बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों के लिए भी अत्यंत दुर्लभ होते हैं। भगवान शिव खुश होकर विन्ध्य जी से बोले- ‘विन्ध्य! मैं तुम से अति प्रसन्न हूँ, मैं अपने भक्तों को उनका अभीष्ट वर प्रदान करता हूँ, इसलिए तुम वर माँगो।’ विन्ध्य जी ने हाथ जोड़कर कहा- ‘हे देवेश्वर महेश! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो हमारे कार्य की सिद्धि करने वाली वह अभीष्ट बुद्धि हमें प्रदान करें!’ विन्ध्य जी की प्रार्थना को पूरा करते हुए भगवान शिव बोले- ‘पर्वतराज! मैं तुम्हें वह उत्तम बुद्धि (वर) देता हूँ। जिस तरह का काम तुम करना चाहो, वैसा कर सकते हो, मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है।’

जिस समय भगवान शिव ने विन्ध्य जी को वर दिया, उसी समय देवगण और कुछ ऋषिगण भी वहाँ जा पहुँचे। उन सभी ने भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की और स्तुति करने के बाद उनसे कहा- ‘भगवान, आप हमेशा के लिए यहाँ स्थिर होकर निवास करें।’ देवताओं और ऋषियों की बात सुनकर भगवान शिव अति प्रसन्न हुए और उनकी बात को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया।

वहाँ पर स्थित एक ही ओंकारलिंग दो स्वरूपों में विभाजित हो गया। प्रणव के अंतर्गत जो सदाशिव विद्यमान हुए उन्हें ‘ओंकार’ नाम से जाना जाता है। इसी तरह पार्थिव मूर्ति में जो ज्योति प्रतिष्ठित हुई, वह ‘परमेश्वर लिंग’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। परमेश्वर लिंग को ही ‘अमलेश्वर’ कहा जाता है। इस तरह ‘ओंकारेश्वर’ और ‘परमेश्वर’ नाम से भगवान शिव के ये ज्योतिर्लिंग इस धरती पर प्रसिद्ध हुए।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हे। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार हर रोज प्रातःकाल और संध्या के समय इन 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम जपने से या दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप या कष्ट दूर हो जाते हैं।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के संबंध में श्लोक निम्नलिखित है-

श्लोक-
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रसमागे सज्जनतारणाय।
सदैव मांधातृपुरे वसंतम्, ओंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

यहां दिए गए निम्नलिखित श्लोकों को पढ़ते हुए जो व्यक्ति सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का मन से ध्यान करता है, उसके सातों जन्म के पाप या कष्ट नष्ट हो जाते हैं। वास्तव में 64 ज्योतिर्लिंगों को माना जाता है, लेकिन इनमें से 12 ज्योतिर्लिंगों को ही सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है।

 ज्योतिर्लिंगों की तालिका

क्रम. संख्या ज्योतिर्लिंग का नाम ज्योतिर्लिंग का स्थान ज्योतिर्लिंग का संक्षिप्त वर्णन
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रभास पाटन, सौराष्ट्र, गुजरात विदेशी आक्रमणकारियों ने इसे 17 बार नष्ट किया। सबसे अधिक नुकसान महमूद गजनवी के हमले से हुआ था। हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया है।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर, कुर्नूल, आन्ध्र प्रदेश मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है।
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षिप्रा नदी के तट पर, महाकाल, उज्जैन, मध्य प्रदेश महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर, मध्य प्रदेश ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का आकार औंकार अर्थात ऊं जैसा है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर के नाम से जाना जाता है।
5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर, केदारनाथ, उत्तराखंड केदारनाथ ज्योतिर्लिंग समुद्र तल से लगभग 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है।
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मुंबई से पूर्व दिशा में और पुणे से उत्तर दिशा में भीमा नदी के किनारे सह्याद्रि पर्वत पर, भीमाशंकर, महाराष्ट्र भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को ‘मोटेश्वर महादेव’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर भगवान शिव ने भीमासुर राक्षस का वध किया था।
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग गंगा तट पर, काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ में भगवान शिव का वास है, जो व्‍यक्ति इस पवित्र स्‍थान पर मृत्‍यु को प्राप्‍त होता है, वह इस संसार के क्लेश से मुक्त हो जाता है।
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे, नासिक, महाराष्ट्र ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में रहना पड़ा।
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग देवघर, झारखंड लंकापति रावण ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर एक शिवलिंग प्राप्त किया, जिसे वह लंका में स्थापित करना चाहता था, परंतु ईश्वर की लीला से वह शिवलिंग वैद्यनाथ धाम में ‍ही स्थापित हो गया।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दारुकावन, द्वारका, गुजरात भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। धार्मिक शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता माने गए हैं, नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है।
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम, रामनाड, तमिलनाडु इस ज्योतिर्लिंग के विषय में मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। यहां पर श्रीराम ने बालू का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की और रावण पर विजय हेतु भगवान शिव से वरदान मांगा।
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग एल्लोरा के पास, औरंगाबाद, महाराष्ट्र ऐसी मान्यता है कि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से वंशवृद्धि होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसका निर्माण अहिल्‍याबाई होल्‍कर के द्वारा करवाया गया था।