ओड़िया भाषा | Odia language

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ओडिया भाषा भारत के ओडिशा प्रान्त में बोली जाती है। इस भाषा को लोग ओड़िआ और उड़िया भी कहते हैं। अगर भाषाई परिवार के हिसाब से बोला जाए, तो ओड़िया एक आर्य भाषा है। ओड़िया भाषा का  नेपाली, बांग्ला, असमिया और मैथिली भाषाओं से काफी करीब का संबंध है। ओड़िया की भाषा और ओड़िसा की जाति दोनों में उड़िया  शब्द का प्रयोग किया जाता है, मगर असल में इसका सही रूप ओड़िया होना चाहिए। इस शब्द का विकास क्रम कई विद्वान् इस प्रकार मानते है- ओड्रविषय, ओड्रविष, ओडिष, आड़िषा या ओड़िशा।

भाषाओं के  हिसाब से देखा जाए, तो ओड़िया भाषा में आर्य, द्राविड़ और मुंडारी भाषाओं का मिला-जुला रूप देखने मिलता है, मगर आज के समय की उड़िया भाषा मुख्य रूप से आर्य भाषा परिवार के आधार पर है। इतना ही नहीं इसमें संथाली, मुंडारी, शबरी, आदि मुंडारी वर्ग की भाषाओं के और औराँव, कुई (कंधी) तेलुगु आदि द्राविड़ वर्ग की भाषाओं के कुछ लक्षण भी पाए जाते हैं।

लिपि

ओड़िया भाषा की लिपि का विकास भी नागरी लिपि की ही तरह ब्राह्मी लिपि से हुआ है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि नागरी लिपि की ऊपर की सीधी रेखा उड़िया लिपि में वर्तुल हो जाती है। इस विषय में विद्वानों की बात माने तो, उड़िया में पहले ‘तालपत्र’ पर ‘लौह लेखनी’ से लिखने की रीति मशहूर थी, मगर सीधी रेखा खींचने में तालपत्र के कट जाने का डर बना रहता था। इसलिए ‘ताल पत्र’ पर सीधी रेखा के बदले वर्तुल रेखा दी जाने लगी और उड़िया लिपि का क्रमश: आधुनिक रूप आने लगा।

साहित्य

ओड़िया भाषा के पहले महान कवि झंकड़ नामक स्थान से थे, उनका नाम  ‘सारला दास’ था। सरला दास ही वे कवि थे, जिन्होंने देवी दुर्गा की स्तुति में ‘चंडी पुराण’ और ‘विलंका रामायण’ की रचना की थी। राम-विवाह कविता ओड़िया भाषा की सबसे पहली दीर्घ कविता है, जिसकी रचना ‘अर्जुन दास’ नामक एक मशहूर कवि ने की थी। प्रारम्भिक काल के बाद से लगभग 1700 ई. तक के समय को ओड़िआ साहित्य में ‘पंचसखा युग’ के नाम से भी जाना जाता है। इस युग की शुरुआत श्री चैतन्य के वैष्णव धर्म के प्रचार से हुआ थी। बलराम दास, जगन्नाथ दास, यशोवंत दास, अनंत दास एवं अच्युतानंद दास- इन पांचों को ‘पंचसखा’ के नाम से जाना जाता है। इस युग के बाकी साहित्यिकों की तरह ही इनकी की गई रचनाएँ भी धर्म पर ही आधारित थी। इस काल की रचनाएँ आमतौर पर संस्कृत अनुवादित की हुई होती थीं, नहीं तो उन्हीं पर आधारित करके बनाई जाती थी।

इतिहास

ओड़िया भाषा के इतिहास को निम्न भागों में बांटा गया है-

  • प्राचीन ओड़िआ (10वीं शताब्दी-1300)
  • प्रारम्भिक मध्य ओड़िआ (1300-1500)
  • मध्य ओड़िआ (1500-1700)
  • नूतन मध्य ओड़िआ (1700-1850)
  • आधुनिक ओड़िआ (1850-वर्तमान)

ओड़िया एक पुरानी भारत-आर्य भाषा है, इसी वजह से यह भारत-आर्य परिवार में आती है। माना जाता है कि यह भाषा पूर्व मागधी नामक प्राकृत भाषा से बनी है, जिसका इस्तेमाल 1500 साल पहले पूर्व भारत में किया जाता था। ओड़िया भाषा का आधुनिक बांग्ला, मैथिली, नेपाली एवं असमिया भाषाओं से करीब का संबंध है। बाकी उत्तर भारतीय भाषाओं के हिसाब से पारसी भाषा का सबसे कम असर अगर किसी भाषा पर हुआ है, तो वह ओड़िया है। लिखी हुई ओड़िया भाषा का सबसे पुराना उदाहरण ‘मादला पांजि’ से प्राप्त हुआ था, जो ‘ताड’ के पत्तों पर लिखा हुआ था।