Computer Number systems:जो भाषा हम एक दूसरे के साथ संवाद करने के लिए इस्तेमाल करते है उसमें शब्द और अक्षर होते हैं। हम संख्याओं, अक्षरों और शब्दों को समझते है परंतु इस तरह का डेटा कंप्यूटर के लिए उपयुक्त नहीं है। कंप्यूटर सिर्फ संख्याओं को समझता हैं।

जब हम डेटा दर्ज करते हैं, तो डेटा इलेक्ट्रोनिक पल्स में बदल जाता है। प्रत्येक पल्स कोड के रूप में पहचानी जाती है और कोड ASCIL के द्वारा संख्यात्मक प्रारूप (numeric format) में बदल जाता है। यह प्रत्येक अंक, अक्षर और चिन्ह को एक संख्यात्मक मूल्य (संख्या) में बदल देता है जो कंप्यूटर समझता है। कंप्यूटर की भाषा समझने के लिए सभी को संख्या प्रणाली (नंबर सिस्टम) के साथ परिचित होना चाहिए।

कंप्यूटर में इस्तेमाल किये जाने वाले नंबर सिस्टम (संख्या पद्धति) इस प्रकार हैंः

  • Binary number system
  • Octal number system
  • Decimal number system
  • Hexadecimal number system

Binary number system (द्वयाधारी संख्या पद्धति)

इसमें केवल दो अंक ‘0’ और ‘1’ होते हैं, जिसका आधार (base) 2 होता है। इसीलिए इस अंक पद्धति में सिर्फ 2 प्रकार की इलेक्ट्रानिक पल्स होती हैं, पहला इलेक्ट्रानिक पल्स के आभाव में ‘0’ को पेश करता है और दूसरा इलेक्ट्रानिक पल्स की उपस्थिती में ‘1’ पेश करता है। प्रत्येक अंक (digit) को बिट कहा जाता है। चार बिट (1101) के समूह को निबल (nibble) और आठ बिट (11001010) के समूह को बाईट (byte) कहा जाता है। बाइनरी संख्या में प्रत्येक अंक की स्थान संख्या पद्धति के आधार (2) पर एक विशिष्ट पाॅवर को दर्शाता है।

Octal number system (अष्टाधारी संख्या पद्धति)

इसमें आठ अंक (0,1,2,3,4,5,6,7) होते हैं, इसीलिए इसका आधार (base) 8 है। आॅक्टल संख्या में प्रत्येक अंक इसके आधार (8) की एक विशिष्ट पाॅवर को दर्शाता है। जैसे यहाँ सिर्फ आठ अंक, बाइनरी संख्या पद्धति के तीन बिट, (23=8) किसी आॅक्टल संख्या को बाइनरी संख्या में परिवर्तित कर सकते हैं। यह संख्या पद्धति लम्बे बाइनरी नंबरों को छोटा करने में भी इस्तेमाल की जाती है। तीन बाइनरी अंको को एक आॅक्टल अंक में दर्शाया जा सकता है।

Decimal number system (दाशमिक संख्या पद्धति)

इस संख्या पद्धति में 10 अंक (0,1,2,3,4,5,6,7,8,9) होते हैं, इसीलिए इसका आधार (base)10 है। इस संख्या पद्धति में एक अंक का अधिकतक मान 9 और एक अंक का न्यूनतम मान 0 होता है। दाशमिक संख्या में प्रत्येक अंक की स्थिति (10) के आधार पर विशिष्ट पाॅवर को दर्शाता है। यह संख्या पद्धति व्यापक रूप से हमारे दैनिक जीवन में इस्तेमाल की जाती है। यह किसी भी अंक के मान को दर्शा सकता है।

Hexadecimal number system (षोडशाधारी संख्या पद्धति)

इस संख्या पद्धति में 16 अंक हैं, जो 0 से 9 और Aसे F तक हैं। इसीलिए इसका आधार (base) 16 है। A से F वर्ण (alphabets) 10 से 15 दाशमिक संख्या को दर्शाते हैं। एक षोडशाधारी संख्या में प्रत्येक अंक की स्थिति संख्या पद्धति के आधार (16) पर विशिष्ट पाॅवर को दर्शाते हैं। यहाँ पर केवल 16 अंक, बाइनरी संख्या पद्धति के 4 बिट (24=16) हैं, जो षोडशाधारी संख्या को बाइनरी संख्या में परिवर्तित कर सकते हैं। यह अल्फान्यूमेरिक संख्या पद्धति के रूप में भी जाना जाता है, यह दोनों संख्यात्मक अंक (numeric digits) और अक्षरों (alphabets) का उपयोग करता है।