नीतीश से मुलाकात करने पटना पहुंचे अमित शाह

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इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश का दौरा कर रहे हैं। इसी सिलसिले के रास्ते पर चलते हुए अमित शाह आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करने पटना
(बिहार) पहुंचेंगे। जानकारी से पता चला है कि पटना पहुंचकर वे सबसे पहले पार्टी ऑफिस जाएंगे और फिर नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे।

2019 में जेडीयू-बीजेपी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसी सिलसिले में बात करने के लिए अमित शाह पटना गए हुए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अमित शाह आज नाश्ता से डिनर तक सीटों के सिलसिले में बातचीत कर यह तय कर लेंगे कि जेडीयू-बीजेपी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जिस दौरान मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह राजनीति की बातें कर रहे होंगे, उस दिन उनके लिए बिहार का स्पेशल खाना परोसा जाएगा। नाश्ते में पोहा, उपमा, सत्तू के पराठे, चना, तोरई की सब्जी तैयार की गई है। इसके अलावा भी आलू की सब्जी, मट्ठा, फल का भी बंदोबस्त किया गया है। लोकसभा चुनाव होने में अभी करीब 8 महीने बचे हुए हैं, लेकिन बीजेपी के रणनीतिकार चाहते हैं कि सीटों का बंटवारा 2014 लोकसभा चुनाव के अनुसार हो, जिसमें बीजेपी के हिस्से बिहार से 22 सीटों पर जीत मिली थी।

एनडीए के सभी घटक दलों ने बीजेपी पर सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव बनाना अभी से शुरू कर दिया है। उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और रामविलास पासवान की लोजपा के साथ मिलकर गठबंधन में बीजेपी ने 30 सीटें लड़ी थी, लेकिन इस बार बीजेपी करीब 22 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दूसरी तरफ जेडीयू 2015 लोकसभा चुनावों का हवाला देकर बड़े भाई की भूमिका चाहती है।

लोकसभा की बिहार में कुल 40 सीटें हैं। अगर पिछले साल के चुनाव की बात करें, तो लोकसभा चुनाव में 40 सीटों में से एनडीए को कुल 31 सीटों पर जीत हासिल हुई। एनडीए की 31 सीटों में 3 सीटों पर रालोसपा ने 6 सीटों पर लोजपा ने और बीजेपी ने 22 सीटों पर कब्जा जमाया था। तब जेडीयू अकेले चुनावी समर में उतरी थी, तो चालीस सीटों में से दो सीटों पर ही जीत मिली थी। जेडीयू का मानना है कि बुरे हालात में भी 16-17 फीसदी वोट हासिल हुए, सूत्रों की मानें तो जेडीयू चाहती है कि दोनो पार्टियां 17-17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ी हैं। बाक़ी की सीटें एलजेपी और आरएलएसपी को दे दी जाएं, जेडीयू इसके अलावा यूपी और झारखंड में 4 सीटें चाहती है। सियासी गलियारों में जेडीयू के आरजेडी और कांग्रेस नेताओं के साथ अंदरखाने बातचीत की खबरें भी सुर्खियों में हैं।  सियासत के जानकार इसे जेडीयू की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा मान रहे हैं।

2014 से 2018 तक देश की सियासत में काफी बदलाव आ चुके हैं। विपक्षी दलों को बीजेपी के विधानसभा चुनावों में बढ़ते प्रभाव से अपने वजूद बचाने की चिंता सताने लगी है, तो एनडीए के सहयोगी दलों के साथ पिछले 4 सालों में बीजेपी के साथ खट्टे-मीठे अनुभवों के मद्देनजर अब अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने में लगे हुए हैं। लोकसभा चुनावों से पहले एनडीए में शामिल बीजेपी के कई सहयोगी एक-एक कर साथ छोड़ने लगे हैं। टीडीपी, जीतन राम मांझी की हम और पीडीपी एनडीए से बाहर निकल चुकी हैं। वहीं, शिवसेना ने 2019 में अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर एनडीए की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इतना ही नहीं बल्कि अकाली दल ने भी राज्य सभा के उप सभापति पद पर दावेदारी ठोक कर बीजेपी की मुश्किलों को बढ़ाने का काम किया है।

आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अभी से बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों के तालमेल और राज्य में कौन बड़ा भाई है, इन सब को लेकर पिछले एक महीने से जमकर बयानबाजी हो रही है। हालांकि जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने यह साफ कहा था कि लोकसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे, इसके लिए उन्होंने सीटों का फॉर्मूला भी दिया है।