परिचय

नरेन्द्र मोदी को राजनीति में आने के लिए काफी उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ा। उनका बचपन गरीबी में गुज़रा, पढ़ाने के लिए भी उनके परिवार के पास पर्याप्त धन नहीं था। मोदी ने कठिन परिश्रम से राजनीति विज्ञान की डिग्री प्राप्त की और गुजरात के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनते ही गुजरात में उन्होंने तेजी से बदलाव किए। अपनी कार्यशीलता व सेवा भाव से मोदी ने सबका दिल जीत लिया और उनके कार्यों की पूरे भारत में चर्चा होने लगी। जब प्रधानमंत्री चुनाव का समय आया तब अधिकतम भारतवासी मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे, जिससे बी.जे.पी ने उन्हें प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाया और आज नरेन्द्र मोदी भारतवर्ष के प्रधानमंत्री हैं।

जन्म तिथि व बचपन

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का जन्म 17 दिसम्बर 1950 में गुजरात के वड़नगर में हुआ था। नरेन्द्र मोदी के पिता का नाम दामोदर मूलचंद मोदी था। उनकी माँ का नाम हीराबेन मोदी है। नरेन्द्र मोदी के चार भाई और एक बहन है, जिसमें नरेन्द्र मोदी दामोदर मूलचंद मोदी के तीसरे बेटे हैं। नरेन्द्र मोदी के पिता गुजरात के वड़नगर स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे। नरेन्द्र मोदी भी बचपन में अपने पिता की मदद करते। कुछ समय बाद नरेन्द्र मोदी ने अपने भाई के साथ बस अड्डे के पास अपनी चाय की दूकान खोली।

सन. 1967 में नरेन्द्र मोदी ने अपनी उच्च वर्ग की शिक्षा वड़नगर से उत्तीर्ण की।

प्रारंभिक जीवन

स्कूल के दिनों नाट्य प्रस्तुतियों में नरेन्द्र मोदी के मुख्य किरदार अपने जीवन से बड़े किरदारों के होते थे, जो राजनीतिक छवि से प्रभावित होते थे। आठ साल की उम्र में नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पता चला और उनहोंने अपने स्थानीय शाखाओं में जाना शुरू किया। वहाँ पर नरेन्द्र मोदी की मुलाकात लक्ष्मण राव इनामदार से हुई जो वकील साहब के नाम से लोकप्रिय थे। वकील साहब ने नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए बाल स्वयंसेवक से प्रारंभ करवाया और उनके राजनीतिक गुरु बन गए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ तैयारी के दौरान वह वसंत गजेन्द्रगाढ़कर, नाथालाल जघदा और भारतीय जनसंघ के नेताओं से भी मिले, जो सन. 1980 में भाजपा के गुजरात के संस्थापक सदस्य रहे थे।

सगाई और विवाह

नरेन्द्र मोदी की सगाई बाल्य उम्र में एक स्थानीय लड़की जशोदाबेन से हुई। माध्यामिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद नरेन्द्र मोदी ने विवाह करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण परिवार में काफी तनाव आया और परिणामस्वरूप उन्हें सन. 1967 में घर त्यागने जैसा कठोर फैसला करना पड़ा। घर छोड़ने के बाद उन्होंने उत्तरी भारत में स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित किए गए आश्रमों और अन्य आश्रमों में भ्रमण किया। इसी दौरान उन्होंने अध्यात्म ज्ञान लिया और जीवन को जाना। लगभग दो साल के बाद वह घर वापस आए।

जीवन कार्य

कठिन परिश्रम के बाद मोदी सन. 1972 में आर.एस.एस. के प्रचारक बन गए। वह आर.एस.एस. के प्रचारक बनने के बाद सुबह से देर रात तक काम करते थे। कठिन दिनचर्या व व्यस्त होने के बाद भी मोदी ने अपनी शिक्षा पूर्ण की और राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल की। भाजपा के आर.एस.एस. के प्रचार के लिए उन्होंने पूरा गुजरात घूमा और लोगों की बड़ी व सामान्य समस्यों को करीब से जाना। सन. 1975 में राजनितिक झगड़ों के चलते उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कई राज्यों में आपातकाल घोषित किया और आर.एस.एस. को बंद करने को कहा, ऐसी परिस्थिति के चलते भी मोदी ने गुप्त रूप से लोगों की सेवा की और आर.एस.एस. का प्रचार करते रहे। उनके इस कार्य से प्रभावित होकर उनको भाजपा में शामिल किया गया।

सन. 2001 को गुजरात में भूकंप आया जिसके कारण चारों तरफ भीषण माहौल था। उस समय की सरकार के कार्य से ना खुश होकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने नरेन्द्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री (C.M) बना दिया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने गुजरात को भूकंप में होने वाले नुकसान से उबारने के लिए बहुत परिश्रम किया, परिणामस्वारूप वह सफल भी हुए और गुजरात को एक नया रूप देकर खड़ा किया। उनके इस लोक कार्य समपर्ण से जनता बहुत प्रभावित हुई और उन्हें चार बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनाकर भारत के बेहतरीन मुख्यमंत्रियों में शामिल किया।

नरेन्द्र मोदी के गुजरात के प्रभावशाली कार्य से पूरा देश प्रभावित था, इसलिए भाजपा ने देश के हित में नरेन्द्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में उतारा। भाजपा ने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा और वह 282 सीटों से जीते। 26 मई सन. 2014 को राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी ने उन्हें शपथ दिलाई, मोदी भारत देश के 14वें प्रधानमंत्री बने और वह उसी कठिन परिश्रम से आज भी देश के लिए समर्पित हैं।