एन.टी. रामा राव की जीवनी | N. T. Rama Rao Biography in Hindi

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परिचय

एन.टी. रामा राव का पूरा नाम ‘नन्दमूरि तारक रामाराव’ है, वे एक भारतीय अभिनेता, निर्देशक, फिल्म निर्माता और राजनेता थे। उन्होंने ‘तेलुगु देशम पार्टी’ की स्थापना की और सन 1983 से 1995 के बीच में वे 3 बार आंध्र प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री रहे। राजनीति में कदम रखने से पहले वे तेलुगु फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। उन्होंने 1950 के दशक में हिन्दू देवताओं के जीवन से सम्बंधित फिल्मों में अभिनय किया और 250 से अधिक तेलुगु फिल्मों में अभिनय किया इसलिए वे तेलुगु फिल्मों के इतिहास में मशहूर अभिनताओं में से एक माने जाते हैं। तेलुगु के अलावा उन्होंने तमिल और हिंदी भाषा की फिल्मों में भी अभिनय किया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सन 1968 में ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया।

शुरूआती जीवन

एन.टी. रामा राव का जन्म मद्रास प्रेसीडेंसी के कृष्ण जिले के गुड़िवाड़ा तालुक के एक छोटे से ग्राम निम्माकुरु में 28 मई 1923 को हुआ था। उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई गाँव के ही एक अध्यापक ‘सुब्बा राव’ से प्राप्त  की। एन.टी. रामा राव के माता-पिता ने बचपन में ही उन्हें उनके मामा को गोद दे दिया था। गांव में अच्छी पढ़ाई का वन्दोबस्त नहीं था इसलिए एन.टी. रामा राव अपने गांव में मात्र कक्षा 5 तक ही पढाई की। इसके बाद वे अपने मामा के यहाँ ‘विजयवाड़ा’ चले गए, जहाँ उन्होंने नगर निगम के विद्यालय में प्रवेश लिया।

एन.टी. रामा राव ने सन 1940 में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए विजयवाड़ा के SRR और CVR कॉलेज में दाखिला लिया। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपने परिवार की मदद करने के लिए विजयवाड़ा के स्थानीय होटलों में दूध वितरण का काम करते थे। सन 1945 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के लिए आन्ध्र-क्रिश्चियन कॉलेज में दाखिला लिया। सन 1942 में उन्होंने अपने मामा की बेटी के साथ विवाह किया।

एन.टी. रामा राव ने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरूआत ‘मना देसम’ (1949) नामक तेलुगु फिल्म में पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका के साथ की। इसके बाद उन्होंने एक अंग्रेजी नाटक पिजारो पर आधारित और बी.ए. सुब्बाराव द्वारा निर्देशित फिल्म ‘पल्लेतुरी पिल्ला’ में अभिनय किया। इस फिल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की और एन.टी. रामा राव एक लोकप्रिय अभिनेता बन गए। अपनी पहली पौराणिक फिल्म ‘माया बाज़ार’ में उन्होंने हिन्दू देवता कृष्ण का चरित्र निभाया था। यह फिल्म भी बहुत कामयाब हुई, जिसके बाद एन.टी. रामा राव ने अधिकांशतर, हिंदू देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्में की। उन्होंने भगवान राम, कृष्ण, विष्णु, शिव, भीष्म, अर्जुन, दुर्योधन, कर्ण आदि के किरदार निभाए। उन्होंने 17 फिल्मों में कृष्ण का चरित्र निभाया था, जिनमें प्रमुख हैं ‘श्री कृष्णार्जुन युधम’, ‘कर्णं’, और ‘दानवीर सूर कर्ण’।

एन.टी. रामा राव ने सन 1982 में तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना कर राजनीति में प्रवेश किया। राजनीति में प्रवेश का मुख्य कारण था आंध्र प्रदेश को कांग्रेस के राज और आधिपत्य से मुक्ति दिलाना। राजनैतिक जीवन प्रारंभ करने के वक़्त एन.टी. रामा राव तेलुगु सिनेमा के सफल और लोकप्रिय अभिनेता थे। चुनावों में उनकी पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली और 9 जनवरी 1983 को एन.टी. रामा राव 10 कैबिनेट मंत्रिओं और 5 राज्य मंत्रियों के साथ आंध्र प्रदेश के दसवें मुख्यमंत्री बने। 1983 से 1994 के बीच वे 3 बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। अपने पहले कार्यकाल के दौरान एन.टी. रामा राव ने जन मानस को एकत्र करना शुरू किया और महिलाओं और समाज के अन्य पिछड़े वर्गों को मुख्य धारा में लाने का कार्य किया। अगस्त 1984 में आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल रामलाल ने उन्हें हटाकर भास्कर राव को मुख्यमंत्री बना दिया पर भारी विरोध प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने राज्यपाल रामलाल को हटाकर शंकर दयाल शर्मा को नया राज्यपाल नियुक्त किया जिन्होंने एन.टी. रामा राव को सितम्बर 1984 में फिर से मुख्यमंत्री बनाया।

एन.टी. रामा राव इतने लोकप्रिय थे कि ‘इन्दिरा गांधी‘ की हत्या के बाद जब पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी, तब बस आंध्र प्रदेश में कांग्रेस नहीं जीत पाई। इतना ही नहीं तेलुगु देशम लोक सभा में मुख्य विपक्षी दल भी बन गया। सन 1989 के चुनाव में विरोधी लहर के कारण तेलुगु देशम पार्टी चुनाव हार गयी और कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापस आ गयी। सन 1994 में एन.टी. रामा राव दोबारा सत्ता में लौटे। उनकी तेलुगु देशम पार्टी की 226 सीटों पर विजय हुई। इस बार एन.टी. रामा राव महज 9 महीने के लिए ही मुख्यमंत्री पद रह पाए क्योंकि उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी के अन्दर भीतरघात कर एन.टी. रामा राव को पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद से हटा दिया।

एन.टी. रामा राव ने सन 1942 में अपने मामा की बेटी ‘बासव तारकम’ से विवाह किया। दम्पति के 8 बेटे और 4 बेटियां थीं। उनकी पत्नी बासव तारकम का देहांत सन 1985 में हो गया। सन 1993 में 70 वर्ष की आयु में एन.टी. रामा राव ने तेलुगु लेखक ‘लक्ष्मी पार्वती’ नाम की एक स्त्री से दूसरा विवाह किया, लेकिन एन.टी. रामा राव के परिवार ने लक्ष्मी को कभी भी स्वीकार नहीं किया।

मृत्यु

एन.टी. रामा राव की मृत्यु 18 जनवरी 1996 को ‘हैदराबाद’ में अपने निवास स्थान पर 72 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से हुई। उनका अंतिम संस्कार किया गया और उनकी राख को उनकी दूसरी पत्नी द्वारा 8 वर्ष बाद 2004 में ‘श्रीरंगपट्टनम’ में तल्लीन कर दिया गया।