मूर्ख मित्र | Murkh Mitra in Hindi

2022

किसी राजा के राजमहल में एक बन्दर सेवक के रुप में रहता था। वह राजा का बहुत विश्वास-पात्र और भक्त था। अन्त:पुर (हरम) में भी वह बिना रोक-टोक जा सकता था। एक दिन जब राजा सो रहा था और बन्दर पंखा झल रहा था तो बन्दर ने देखा, एक मक्खी बार-बार राजा की छाती पर बैठ जाती थी। पंखे से बार-बार हटाने पर भी वह मानती नहीं थी, उड़कर फिर वहीं बैठी जाती थी।

बन्दर को क्रोध आ गया। उसने पंखा छोड़कर हाथ में तलवार ले ली और इस बार जब मक्खी राजा की छाती पर बैठी तो उसने पूरे बल से मक्खी पर तलवार का हाथ छोड़ दिया। मक्खी तो उड़ गई, किन्तु राजा की छाती तलवार की चोट से दो टुकडे़ हो गई। राजा मर गया।

यदि राजा ने एक बन्दर की मानसिक दशा, उसकी सोच और समझ को ध्यान में रखा होता तो उसे अपनी जान गंवानी नहीं पड़ती।