मोदी सरकार ने धान, कपास और खरीफ़ की फसल पर MSP बढ़ाया

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सूत्रों से पता चला है कि मोदी सरकार इस बार अपने लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को बड़ा तोहफा दे सकती है। खरीफ़ की फसल पर केन्द्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ा दिया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आजादी के बाद अब तक किसी भी सरकार ने MSP में इतना ज्‍यादा इजाफा नहीं किया है। कैबिनेट के इस फैसले से किसानों को उनकी लागत का 50% ज़्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने की आशा है। इसके साथ-साथ कपास की फसल पर 1100 रुपये और धान की एक क्विंटल फसल पर एमएसपी 200 रुपये की बढ़त के साथ मिलेगी। अब किसी भी फ़सल की पैदावार लागत में सभी खर्चे शामिल होंगे जैसे- बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, मशीन आदि। उसके आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाएगा। इसके साथ ही केन्‍द्र सरकार के एमएसपी बढ़ाने से सरकार पर 15000 करोड़ का बोझ बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि किसान की लागत में ज़मीन की क़ीमत शामिल नहीं होगी, जिसकी सिफ़ारिश स्वामीनाथन आयोग ने की है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए फार्मूला बनेगा

देश के किसानों को बड़ी राहत देने के लिए सरकार के निर्णय की सराहना करते हुए आर्थिक विशेषज्ञ अतुल सिंह ने कहा- “जाहिर है कि अनाज और दालों के दाम डेढ़ गुना होने से महंगाई में इजाफा होगा ही। इसका असर होटल, रेस्तरां और ढाबों की थाली पर भी पड़ेगा, लेकिन मौजूदा मुद्रास्फीति की तुलना में कृषि उत्पादन की वृद्धि अभी काफी कम है। ऐसे में एमएसपी डेढ़ गुना किए जाने पर देश के अन्नदाता को वाकई में राहत मिल सकेगी और किसान आराम से अपनी फसल की पैदावार कर सकेंगे। आये दिन ऐसी खबर सुनने को मिलती रहती है कि किसान ने भारी कर्ज और फसल नष्ट होने की वजह से खुदखुशी कर ली है।“

नीति आयोग के सदस्य और कृषि मामलों के विशेषज्ञ रमेश चंद ने कहा कि डेढ़ गुना एमएसपी किए जाने से महंगाई पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण अन्य क्षेत्रों की तुलना में कृषि उत्पादन दरें बहुत ही कम हैं। यदि हम वैश्विक स्तर पर तुलना करें, तो हमारे देश का किसान हकीकत में कीमत के मामले में काफी कमजोर है और इस समय इसमें सुधार करना बहुत ही जरूरी  है। कृषि मामलों के विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र शर्मा के अनुसार जब थोक कीमतों में बढ़ोतरी होगी, तो उसका असर अपने आप ही बाजार में दिखने लगेगा और ऐसे में आम आदमी के लिए रसोई का खर्च तो कुछ जरूर बढ़ जाएगा, लेकिन दूसरी तरफ अन्नदाता को इससे राहत भी मिलेगी। यदि बाजार का मूल्य एमएसपी से कम रहता है, तो सरकार उन्हें शेष राशि मुहैया कराएगी, जिससे हर हाल में किसान को उसकी उपज का उचित दाम मिल सकेगा। सरकार के इस फ़ैसले से घर के खर्च में इज़ाफ़ा हो सकता है, यानी महंगाई बढ़ सकती है। इसेक साथ ही साथ इसका असर होटल, रेस्तरां और ढाबों की थाली पर पड़ सकता है, जबकि सरकार को सवा लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड सकता है।

किसानों की आत्महत्याएं दोगुनी हुईं कहकर शिवसेना ने PM मोदी पर निशाना साधा

शिवसेना ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि किसानों की आत्महत्याएं तो दोगुनी हुई हैं, लेकिन उनकी आय में बढ़ोत्तरी नहीं हुई। शिवसेना ने आगे कहा कि वर्तमान सरकार की कभी न समाप्त होने वाली घोषणाओं और जुमलों को सुन-सुनकर देश अब थक चुका है। किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने की बात प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की घोषणा कोई नई नहीं है। BJP सरकार ने 2014 के चुनाव से पहले घोषणा-पत्र में भी इसी तरह का वादा किया था और इससे BJP को सत्ता में आने में काफी मदद मिली, लेकिन BJP के सत्ता में आने के बाद अब तक किसानों को अधिक लाभ नहीं मिल सका है।