मलयालम भाषा | Malayalam Language

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मलयालम भाषा भारत के केरल प्रान्त में बोली जाने वाली भाषा है। मलयालम भाषा को लोग ‘केरली’ के नाम से भी जानते हैं। मलयालम भाषा ‘द्रविड़ भाषा परिवार’ में आती है। यह भाषा केरल के अलावा भी भारत के कई क्षेत्रों में जैसे- तमिलनाडु के कन्याकुमारी और उत्तर में कर्नाटक का दक्षिण कन्नड़ जिला, लक्षद्वीप में बोली जाती है, और इतना ही नहीं यह भाषा भारत के बाहर भी कई देशों में केरल के मूल निवासियों द्वारा बोली जाती है।

भाषा और लिपि के हिसाब से देखा जाए, तो मलयालम भाषा तमिल भाषा के बहुत करीब है। मलयालम भाषा पर संस्कृत भाषा का असर  ईसा के पूर्व (BC) पहली सदी से हुआ है। संस्कृत के शब्दों को मलयालम शैली में लाने के लिए संस्कृत के शब्दों में कुछ परिवर्तन किए गए हैं। सदियों से हम लोग अरबों के साथ व्यपार कर रहे हैं, इस वजह से अंग्रेजी और पुर्तगाली का असर हमारी भाषाओं पर भी पड़ा है।

मलयालम शब्द की उत्पत्ति

मलयालम शब्द का संधि-विच्छेद है- मलै (मूलशब्द:मलय- अर्थ:पर्वत) + अळम (मूलशब्द:आलयम- अर्थ:स्थान)। इस भाषा को बोलने वाले लोग भारत के पश्चिमी घाट के गर्भ में रहते हैं और इसी वजह से इस भाषा का नाम ‘मलयालम’ पड़ा है। इस शब्द का सही उच्चारण ’मलयाळम्’ होता है।

जन्म

मलयालम भाषा और उसके साहित्य के जन्म के बारे में ज्यादा प्रमाण नहीं होने की वजह से इसके साहित्य के बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता। फिर भी यह माना गया है कि मलयालम साहित्य कम से कम एक हजार साल पुराना है। अगर भाषा की बात की जाए, तो हम केवल इस फैसले पर ही पहुंचते हैं कि यह भाषा संस्कृतजन्य नहीं है, यह भाषा ‘द्रविड़ भाषा परिवार’ में आती है। मगर यह अभी तक साफ नहीं हुआ है कि यह भाषा तमिल भाषा से अलग हुई उसकी एक शाखा है या बाकी दक्षिणी भाषाओं की तरह मूल द्रविड़ भाषा से विकसित हुई अलग भाषा है।

इसका मतलब समस्या यह है कि हमें नहीं पता कि तमिल और मलयालम् का रिश्ता माँ-बेटी का है या बहन-बहन का। कई भाषा वैज्ञानिक इस कार्य पर अनुसंधान कर रहे हैं, क्योंकि भाषा वैज्ञानिक ही ऐसे लोग हैं, जो इस बात की पुष्टि कर सकते हैं। मगर एक बात जो बिना संदेह के कही जा सकती है, वह यह है कि जब मलयालम का साहित्य पल्लवित होने लगा था, तब तमिल का साहित्य फल-फूल चुका था।